
पुणे: महाराष्ट्र के चर्चित Ketan अग्रवाल हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मामले में नए तथ्य सामने आ रहे हैं। 25 वर्षीय व्यवसायी केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत की जांच कर रही पुलिस अब इस मामले को कई अलग-अलग पहलुओं से खंगाल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह पूरी घटना किस तरह योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई और इसमें शामिल लोगों की भूमिका क्या रही।

पुलिस फिलहाल मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
हत्या के पीछे किसकी थी मुख्य भूमिका?
जांच अधिकारियों के अनुसार, सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित साजिश का मास्टरमाइंड कौन था। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि क्या सिया ने स्वयं योजना बनाई थी या फिर उसे कथित रूप से चेतन चौधरी ने किसी प्रकार के दबाव, ब्लैकमेल या अन्य कारणों से इस कथित अपराध में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
जांच टीम दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, चैट, कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि पूरी योजना किसने बनाई और किसकी भूमिका कितनी थी।
पुरानी कॉल रिकॉर्डिंग और निजी संदेशों की जांच
सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या चेतन चौधरी के पास सिया के साथ हुई पुरानी बातचीत, कॉल रिकॉर्डिंग या निजी संदेश मौजूद थे, जिनका कथित रूप से इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया गया।
हालांकि, अभी तक इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई अंतिम पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारी केवल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
पहले भागने की योजना, फिर कथित हत्या की साजिश
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर दोनों के बीच कहीं और जाकर नई जिंदगी शुरू करने की योजना होने की आशंका जताई जा रही है। लेकिन बाद में परिस्थितियां बदलने के बाद कथित तौर पर केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या आर्थिक लाभ, सामाजिक प्रतिष्ठा या भविष्य में मिलने वाले संभावित फायदे इस कथित साजिश के पीछे कारण बने। हालांकि इन सभी बिंदुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
बैंक खातों और लेन-देन की हो रही फोरेंसिक जांच
मामले की आर्थिक कड़ी को समझने के लिए पुलिस ने सिया गोयल के बैंक खातों की फोरेंसिक जांच शुरू की है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना से पहले और बाद में किसी प्रकार का संदिग्ध वित्तीय लेन-देन हुआ था या नहीं।
जांच अधिकारी बैंक स्टेटमेंट, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, यूपीआई भुगतान, नकद निकासी तथा अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर रहे हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कथित तौर पर किसी योजना को अंजाम देने के लिए कोई राशि स्थानांतरित की गई थी या नहीं।
नकद निकासी और खर्च का भी मिलान
पुलिस घटना से कुछ दिन पहले किए गए कैश विड्रॉल और अन्य वित्तीय गतिविधियों की भी जांच कर रही है। यदि किसी प्रकार का संदिग्ध लेन-देन सामने आता है तो उसे केस के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल किया जा सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल वित्तीय जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।
प्लान C की भी जांच
मामले की जांच के दौरान एक और पहलू सामने आया है, जिसे जांच अधिकारी कथित “प्लान C” के रूप में देख रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यदि कथित मुख्य योजना सफल नहीं होती तो क्या आरोपियों ने कोई वैकल्पिक योजना भी तैयार कर रखी थी।
हालांकि, इस संबंध में भी अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस केवल उपलब्ध साक्ष्यों और केस डायरी के आधार पर सभी संभावनाओं की जांच कर रही है।
पहली कथित कोशिश की भी जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, घटना से पहले की गतिविधियों का भी विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या घटना से पहले भी कोई प्रयास किया गया था और यदि ऐसा हुआ था तो उसमें किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही।
इस संबंध में घटनास्थल, डिजिटल लोकेशन, मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है।
आमने-सामने पूछताछ में सामने आए अलग-अलग दावे
गुरुवार को पुलिस ने दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों ने कई सवालों पर अलग-अलग जवाब दिए और कथित रूप से एक-दूसरे पर अधिक जिम्मेदारी डालने का प्रयास किया।
पुलिस का मानना है कि दोनों के बयानों में मौजूद विरोधाभासों का विश्लेषण अन्य साक्ष्यों के साथ किया जाएगा। यदि किसी बयान की पुष्टि तकनीकी या भौतिक साक्ष्यों से होती है तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हादसा या सुनियोजित साजिश?
शुरुआती दौर में इस घटना को दुर्घटना माना जा रहा था। बताया गया था कि केतन अग्रवाल किसी ऊंचे स्थान पर फोटो लेते समय संतुलन खो बैठे थे। लेकिन बाद में जांच के दौरान सामने आए कुछ तथ्यों ने पुलिस का संदेह बढ़ा दिया।
इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और विभिन्न पहलुओं को शामिल करते हुए विस्तृत जांच शुरू की गई। वर्तमान में पुलिस घटना से जुड़े हर तथ्य की पुष्टि करने में जुटी हुई है।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर विशेष जोर
जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, सोशल मीडिया चैट, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन हिस्ट्री, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीकी साक्ष्य इस मामले की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि आवश्यक हुआ तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि किसी भी डिजिटल जानकारी की प्रामाणिकता सुनिश्चित की जा सके।
जांच पूरी होने तक आरोप साबित नहीं
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामला अभी जांच के अधीन है। जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा। सिया गोयल और चेतन चौधरी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाएगा।
पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के अनुरूप जारी है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों की गहनता से पड़ताल की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद जो भी साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।












































