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क्या 2026 की गर्मी तोड़ेगी 144 साल का रिकॉर्ड? जानिए सच्चाई और वैज्ञानिकों की चेतावनी

On: April 26, 2026 2:01 PM
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नई दिल्ली : देशभर में इन दिनों भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि साल 2026 की गर्मी पिछले 144 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ सकती है। कई पोस्ट और वीडियो में यह कहा जा रहा है कि इस बार तापमान इतना बढ़ेगा कि भारत अब तक की सबसे भयंकर गर्मी का सामना करेगा। हालांकि जब इस दावे की पड़ताल की गई, तो सामने आया कि इसमें सच्चाई के साथ-साथ काफी हद तक भ्रम भी फैलाया जा रहा है।

मौसम विभाग India Meteorological Department (IMD) के अनुसार, इस साल देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना जरूर है। खासकर उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी क्षेत्रों में लू (हीटवेव) के दिनों में बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन IMD ने कहीं भी आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि “144 साल का रिकॉर्ड” निश्चित रूप से टूट जाएगा। यानी सोशल मीडिया पर जो दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह प्रमाणित नहीं है।

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दरअसल “144 साल” का आंकड़ा भारत में मौसम के पुराने रिकॉर्ड से जुड़ा है। भारत में तापमान का व्यवस्थित रिकॉर्ड लगभग 1880 के आसपास से रखा जा रहा है, यानी करीब 140 से ज्यादा साल का डेटा उपलब्ध है। इसी आधार पर कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि इस साल सबसे ज्यादा गर्मी पड़ सकती है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी भी साल को रिकॉर्ड तोड़ने वाला घोषित करने के लिए पूरे सीजन के आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी होता है, न कि शुरुआती गर्मी के आधार पर निष्कर्ष निकालना।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ती गर्मी के पीछे सबसे बड़ा कारण Climate Change यानी जलवायु परिवर्तन है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे हीटवेव की घटनाएं ज्यादा तीव्र और लंबी हो रही हैं। भारत में भी पिछले कुछ वर्षों में गर्मी के रिकॉर्ड लगातार टूटते देखे गए हैं, जिससे लोगों में इस बार भी डर और आशंका बढ़ गई है।

फिलहाल देश के कई शहरों में तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लू का असर स्वास्थ्य पर गंभीर पड़ सकता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर। हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और थकावट जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं।

सरकार और प्रशासन ने भी स्थिति को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। कई राज्यों में स्कूलों के समय में बदलाव, अस्पतालों में विशेष इंतजाम और सार्वजनिक स्थानों पर पानी की व्यवस्था की जा रही है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पिएं, हल्के कपड़े पहनें और धूप से बचाव के उपाय करें।

सोशल मीडिया पर वायरल “144 साल का रिकॉर्ड टूटने” वाला दावा पूरी तरह सही नहीं है। हां, यह जरूर तय है कि इस साल गर्मी अधिक पड़ सकती है और हीटवेव का असर बढ़ सकता है, लेकिन इसे ऐतिहासिक रिकॉर्ड से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। ऐसे में जरूरी है कि लोग अफवाहों से दूर रहें, आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और गर्मी से बचाव के सभी जरूरी कदम अपनाएं।

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