
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (छत्तीसगढ़): खेत की सुरक्षा के नाम पर बिना अनुमति और लापरवाही से बिजली के नंगे तारों में हाई वोल्टेज करंट प्रवाहित करने वाले एक किसान को अदालत ने ऐतिहासिक सजा सुनाई है। द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने आरोपी किसान स्वरूप सिंह धुर्वे को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास (कठोर सजा) और 5,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह कृत्य केवल सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया एक गंभीर अपराध है जो ‘अपराधिक मानव वध’ (Culpable Homicide) की श्रेणी में आता है।
क्या था पूरा मामला?
यह दर्दनाक घटना 28 अगस्त 2025 को मरवाही के करगीकला (नदिया टोला) क्षेत्र में हुई थी। गांव में सार्वजनिक गणेश पंडाल सजा हुआ था, जिससे महज 50 मीटर की दूरी पर आरोपी स्वरूप सिंह धुर्वे का खेत था। स्वरूप सिंह ने अपने घर से अवैध रूप से बिजली का कनेक्शन खींचकर, बिना किसी सुरक्षा मानकों के पूरे खेत की बाड़ (घेरे) में हाई वोल्टेज करंट छोड़ रखा था।
इसी दौरान, 10 वर्षीय मासूम बच्चा गीतराम सारथी अपने साथियों के साथ पंडाल के पास खेल रहा था। खेलते-खेलते बच्चे खेत की तरफ चले गए। जैसे ही गीतराम का हाथ करंट प्रवाहित हो रहे तारों से छू गया, वह बुरी तरह झुलस गया और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम और भारी आक्रोश फैल गया था।
कोर्ट में बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष (आरोपी के वकील) ने दलील दी कि आरोपी एक सीधा-साधा किसान है और उसका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि केवल अपनी फसलों को जंगली जानवरों से बचाना था। चूंकि यह उसका पहला अपराध था, इसलिए सजा में नरमी बरतने की अपील की गई।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने इसका कड़ा विरोध करते हुए मृत बच्चे की मां पूनम सारथी और चश्मदीद गवाहों (बेदराम घसिया, गणेश सिंह, राजेन्द्र सिंह) के बयान और मर्ग रिपोर्ट पेश की। अभियोजन ने दलील दी कि सार्वजनिक स्थान के पास खुले तारों में जानलेवा करंट छोड़ना समाज के लिए अत्यंत खतरनाक है।
अदालत की सख्त टिप्पणी: इसे नजीर माना जाए
न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई भी सामान्य व्यक्ति यह भली-भांति समझ सकता है कि खुले तारों में हाई वोल्टेज करंट प्रवाहित करना किसी की भी जान ले सकता है। अदालत ने आरोपी का जमानत मुचलका तुरंत निरस्त कर उसे जिला जेल पेण्ड्रारोड भेज दिया। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माना राशि न देने पर आरोपी को 3 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
यह फैसला क्षेत्र के उन किसानों के लिए एक बड़ी नजीर है जो फसलों की सुरक्षा के नाम पर अवैध रूप से करंट बिछाकर इंसानी जिंदगियों को दांव पर लगा देते हैं।








































