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भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CBI जांच की मांग

On: June 24, 2026 3:00 PM
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नई दिल्ली/भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में घटना की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने तथा एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है।

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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग को स्वीकार नहीं किया है। अदालत ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता विशाल तिवारी को निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश देते हुए कहा कि वे पहले सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से संपर्क करें। रजिस्ट्री की अनुमति मिलने के बाद ही मामले की सुनवाई की तारीख तय होगी।

CBI जांच और FIR की मांग

दायर याचिका में कहा गया है कि भरत भूषण तिवारी की मौत की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और इसके लिए मामले को CBI को सौंपा जाना चाहिए। साथ ही, एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि देश में कथित फर्जी एनकाउंटर मामलों की निगरानी और कानून के शासन को मजबूत करने के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपने का सुझाव भी दिया गया है।

‘फर्जी एनकाउंटर और सुनियोजित हत्या’ का आरोप

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी की मौत एक कथित फर्जी एनकाउंटर का परिणाम है। उनका कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आ सकेगी। इसलिए किसी निष्पक्ष एजेंसी द्वारा जांच कराया जाना आवश्यक है।

मुख्य न्यायाधीश को भेजी गई पत्र याचिका

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी एक पत्र याचिका भेजी गई है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता नरेन्द्र मिश्रा द्वारा भेजी गई इस याचिका में अदालत से स्वतः संज्ञान लेने, स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने तथा पीड़ित परिवार और संभावित गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है।

पत्र याचिका में भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज करने तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही मामले की जांच CBI या विशेष जांच दल (SIT) से कराने और एनकाउंटर मामलों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की मांग भी उठाई गई है।

कौन थे भरत भूषण तिवारी?

28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के निवासी थे। वे क्षेत्रीय और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को मुखरता से उठाने के लिए जाने जाते थे। सड़क, बिजली, पेयजल, बाढ़ प्रभावित गांवों के पुनर्वास और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़े विषयों पर वे लगातार आवाज उठाते रहे थे।

भरत तिवारी सोशल मीडिया, विशेषकर फेसबुक पर काफी सक्रिय थे और प्रशासनिक अधिकारियों, सरकारी नीतियों तथा राजनीतिक नेतृत्व की खुलकर आलोचना करते थे। उनके समर्थकों का कहना है कि वे जनता की समस्याओं को उठाने वाले युवा सामाजिक कार्यकर्ता थे।

क्या कहती है पुलिस?

पुलिस के अनुसार, कुछ दिन पहले भरत भूषण तिवारी का एक फेसबुक पोस्ट वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने एक अधिकारी के एनकाउंटर की बात लिखी थी। पोस्ट के बाद पुलिस उनसे पूछताछ करने उनके घर पहुंची थी। पुलिस का दावा है कि बातचीत के दौरान भरत भूषण ने कथित तौर पर पिस्टल निकाल ली, जिसके बाद हुई कार्रवाई में उन्हें गोली लगी। गंभीर रूप से घायल भरत को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

मामले पर बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस

भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद पूरे बिहार में इस घटना को लेकर बहस छिड़ी हुई है। एक पक्ष इसे पुलिस कार्रवाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे कथित फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट और जांच एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका और मुख्य न्यायाधीश को भेजी गई पत्र याचिका के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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