
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने और विश्वास-आधारित सुशासन को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जन विश्वास कानून, 2026 के तहत औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 में महत्वपूर्ण संशोधन लागू कर दिए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य व्यवसायों पर अनावश्यक अनुपालन (Compliance) का बोझ कम करना है, जबकि जन स्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े कड़े मानकों को पहले की तरह बरकरार रखा गया है।

छोटे और तकनीकी उल्लंघनों पर अब नहीं होगी आपराधिक कार्रवाई
सरकार ने कई ऐसे छोटे और प्रक्रियागत (Technical) उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है, जिनसे जन स्वास्थ्य पर कोई गंभीर खतरा नहीं होता। अब ऐसे मामलों में आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के बजाय प्रशासनिक दंड (Administrative Penalty) लगाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे उद्योगों को राहत मिलेगी और नियामकीय व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी।
गंभीर अपराधों पर पहले जैसी सख्ती जारी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मिलावटी, नकली या जन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों से जुड़े मामलों में कोई ढील नहीं दी गई है। ऐसे गंभीर अपराधों पर पहले की तरह कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
दवा एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम में अहम बदलाव
संशोधनों के तहत औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 29 समाप्त कर दी गई है।
पहले इस धारा के तहत किसी दवा या कॉस्मेटिक के विज्ञापन में सरकारी विश्लेषक (Government Analyst) की रिपोर्ट का उपयोग करने पर एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था। अब इस प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।
इसके अलावा—
- कम जोखिम वाले कॉस्मेटिक उत्पादों से जुड़े मामूली गुणवत्ता संबंधी मामलों को प्रशासनिक दंड के दायरे में लाया गया है।
- लेबलिंग में छोटी त्रुटियां या प्रक्रियागत कमियों पर अब आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी।
- नकली एवं मिलावटी कॉस्मेटिक्स के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी।
रिकॉर्ड रखने संबंधी उल्लंघनों में भी राहत
धारा 28ए के तहत रिकॉर्ड संधारण, आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने तथा अन्य प्रक्रियागत कमियों को भी अब प्रशासनिक दंड के दायरे में रखा गया है।
अपील और निपटारे के लिए नई व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत—
- निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) की नियुक्ति,
- अपील की सुनवाई,
- समयबद्ध एवं पारदर्शी निपटारे
के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं, जिससे विवादों का तेजी से समाधान हो सके।
खाद्य सुरक्षा कानून में भी कई बदलाव
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत भी कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं।
इनमें प्रमुख बदलाव हैं—
- खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ झूठी शिकायत करने पर अब अदालत के बजाय प्रशासनिक दंड लगाया जाएगा।
- जब्त किए गए खाद्य पदार्थों या वस्तुओं के साथ छेड़छाड़ करने पर अधिकतम कारावास 6 माह से घटाकर 3 माह कर दिया गया है।
- खाद्य सुरक्षा अधिकारी के कार्य में बाधा डालने संबंधी प्रावधान को कानून से हटाया गया है, क्योंकि ऐसे अपराध पहले से ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत शामिल हैं।
कारोबारियों को मिलेगा बड़ा लाभ
सरकार का कहना है कि इन सुधारों से—
- व्यवसायों पर अनुपालन का बोझ कम होगा।
- अनावश्यक मुकदमों में कमी आएगी।
- नियामकीय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
- निवेश और कारोबार को प्रोत्साहन मिलेगा।
- व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलेगा।
जन स्वास्थ्य से समझौता नहीं
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन संशोधनों का उद्देश्य केवल छोटे एवं प्रक्रियागत उल्लंघनों को तर्कसंगत बनाना है। जन स्वास्थ्य, उपभोक्ता सुरक्षा, नकली दवाओं, मिलावटी खाद्य पदार्थों और गंभीर अपराधों के खिलाफ कड़े कानून पहले की तरह लागू रहेंगे।
आधुनिक और विश्वास-आधारित नियामक व्यवस्था की ओर कदम
मंत्रालय के अनुसार, जन विश्वास कानून, 2026 भारत में एक आधुनिक, पारदर्शी और विश्वास-आधारित नियामकीय व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे उद्योगों को राहत मिलेगी, जबकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मानकों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।






































