
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (Fssai) के लाइसेंस और पंजीकरण नियमों में अहम संशोधन किए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य व्यवसायों का लाइसेंस एवं पंजीकरण) संशोधन नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इन बदलावों का उद्देश्य खाद्य व्यवसायियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना है, जबकि खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े आवश्यक मानकों को यथावत बनाए रखा जाएगा।

गैर-निर्माण (Non-Manufacturing) खाद्य कारोबारियों को बड़ी राहत
नए संशोधनों के तहत अब खुदरा विक्रेताओं, थोक व्यापारियों और अन्य गैर-मैन्युफैक्चरिंग खाद्य व्यवसायों को रिकॉर्ड संधारण (Record Keeping) और फर्स्ट इन फर्स्ट आउट (FIFO) तथा फर्स्ट एक्सपायरी फर्स्ट आउट (FEFO) स्टॉक रोटेशन प्रणाली का पालन करने की अनिवार्यता से छूट दी गई है।
अब यह नियम केवल खाद्य निर्माण (Manufacturing) इकाइयों पर लागू होंगे, जहां उत्पादों की गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और ट्रेसबिलिटी (स्रोत की पहचान) सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
छोटे और मझोले उद्योगों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार का मानना है कि इस फैसले से विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम खाद्य उद्योगों (MSMEs) को बड़ी राहत मिलेगी। रिकॉर्ड रखने और स्टॉक प्रबंधन से जुड़े अनावश्यक दस्तावेजी बोझ में कमी आने से छोटे व्यापारियों का समय और लागत दोनों बचेंगे।
खाद्य सुरक्षा से नहीं होगा कोई समझौता
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों में ढील देने का अर्थ खाद्य सुरक्षा मानकों से समझौता करना नहीं है। जिन क्षेत्रों में गुणवत्ता नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा और उत्पादों की ट्रेसबिलिटी आवश्यक है, वहां पहले की तरह सख्त निगरानी जारी रहेगी।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बढ़ावा
यह संशोधन केंद्र सरकार के व्यापक Ease of Doing Business अभियान का हिस्सा है। सरकार का उद्देश्य खाद्य क्षेत्र में जोखिम-आधारित (Risk-Based) और परिणाम-उन्मुख (Outcome-Oriented) नियामक व्यवस्था विकसित करना है, जिससे उद्योगों को अनावश्यक प्रक्रियाओं से राहत मिल सके।
पहले भी किए गए हैं कई सुधार
पिछले कुछ वर्षों में खाद्य व्यवसायियों की सुविधा के लिए सरकार कई सुधार लागू कर चुकी है, जिनमें प्रमुख हैं—
- स्थायी एफएसएसएआई लाइसेंस एवं पंजीकरण की व्यवस्था।
- कारोबार के टर्नओवर की सीमा में संशोधन।
- स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए दोहरे अनुपालन की अनिवार्यता समाप्त करना।
- जोखिम-आधारित निरीक्षण प्रणाली लागू करना।
- लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाना।
व्यापक परामर्श के बाद लिया गया निर्णय
मंत्रालय के अनुसार, इन संशोधनों को अंतिम रूप देने से पहले राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, खाद्य उद्योग से जुड़े संगठनों तथा अन्य हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श किया गया। ये बदलाव नीति आयोग द्वारा गठित ‘गैर-वित्तीय नियामक सुधारों पर उच्च स्तरीय समिति’ की सिफारिशों के अनुरूप भी हैं।
विज्ञान आधारित नियमन पर सरकार का जोर
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि सरकार विज्ञान-आधारित नियमों, पारदर्शी नियामक व्यवस्था और उद्योग हितैषी सुधारों के माध्यम से भारत के खाद्य सुरक्षा ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन संशोधनों से एक ओर कारोबारियों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद सुनिश्चित करने का लक्ष्य भी मजबूत होगा।










































