
पिछले कुछ महीनों से निवेशकों की पहली पसंद रहे Gold-Silver अब लगातार दबाव में दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं पर भारी दबाव बनाया है। जून 2026 के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों और कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। आने वाले तीन महीनों में सोना और चांदी दोनों में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। कुछ बाजार विशेषज्ञ तो यहां तक अनुमान लगा रहे हैं कि सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे और चांदी ₹1.90 लाख प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
जून में Gold और चांदी में आई बड़ी गिरावट
कमोडिटी बाजार में जून महीना निवेशकों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। इस दौरान सोने की कीमतों में लगभग ₹16,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी में करीब ₹33,000 प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि यह गिरावट अचानक नहीं आई है। इसके पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरों की संभावनाएं, निवेशकों की बदलती रणनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम जिम्मेदार माने जा रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब निवेशकों को जोखिम कम दिखाई देता है तो वे सुरक्षित निवेश यानी गोल्ड से पैसा निकालकर शेयर बाजार और अन्य एसेट क्लास की ओर रुख करने लगते हैं।
Gold में गिरावट के 4 बड़े कारण
1. फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी
विशेषज्ञ अनुज गुप्ता के अनुसार अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और वृद्धि किए जाने की संभावना सोने के लिए सबसे बड़ा नकारात्मक संकेत है।
यदि ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशकों को बैंकिंग और बॉन्ड निवेश में बेहतर रिटर्न मिलने लगता है। ऐसे में सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो जाता है।
यही कारण है कि ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की खबरों ने सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है।
2. डॉलर इंडेक्स का मजबूत होना
दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। डॉलर इंडेक्स में तेजी का सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।
जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है, जिससे उसकी मांग कम हो सकती है। परिणामस्वरूप कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर की मजबूती फिलहाल सोने के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
3. गोल्ड ETF में भारी बिकवाली
वैश्विक निवेशकों द्वारा गोल्ड ईटीएफ से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला जा रहा है। हाल के समय में अरबों डॉलर की बिकवाली ने बाजार को कमजोर किया है।
जब बड़े संस्थागत निवेशक गोल्ड ईटीएफ से बाहर निकलते हैं तो बाजार में सप्लाई बढ़ जाती है और कीमतों पर दबाव बनता है।
यह संकेत भी दर्शाता है कि फिलहाल निवेशकों का भरोसा सोने पर पहले की तुलना में कमजोर हुआ है।
4. मध्य पूर्व में तनाव कम होना
पिछले वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने को सुरक्षित निवेश माना जा रहा था। लेकिन ईरान और मध्य पूर्व से जुड़े तनाव में कमी आने के बाद निवेशकों की चिंता कम हुई है।
जैसे-जैसे युद्ध और संघर्ष की आशंकाएं कम होती हैं, वैसे-वैसे सुरक्षित निवेश की मांग भी घटती है। इसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य बने रहते हैं तो सोने में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों का भी पड़ रहा असर
सोने और चांदी की कीमतों पर कच्चे तेल का प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के दिनों में तेल की कीमतों में आई गिरावट ने वैश्विक महंगाई संबंधी चिंताओं को कम किया है।
जब महंगाई कम होने की संभावना बढ़ती है तो निवेशक सोने में हेजिंग की आवश्यकता कम महसूस करते हैं। इससे सोने की मांग पर नकारात्मक असर पड़ता है।
क्या चांदी में आ सकती है बड़ी गिरावट?
चांदी का बाजार इस समय सोने की तुलना में अधिक अस्थिर दिखाई दे रहा है। कमोडिटी विशेषज्ञ अजय केडिया के अनुसार वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों में और कमजोरी आ सकती है।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 53 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचती है, तो भारतीय बाजार में इसकी कीमत ₹1.90 लाख प्रति किलो तक गिर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निवेशकों के बीच घबराहट बढ़ी और बड़े स्तर पर बिकवाली शुरू हुई तो चांदी में गिरावट और तेज हो सकती है।
क्या पूरी तरह टूट जाएगा सोने-चांदी का बाजार?
हालांकि बाजार में गिरावट के बावजूद विशेषज्ञ यह नहीं मानते कि सोना और चांदी पूरी तरह धराशायी हो जाएंगे।
कुछ ऐसे मजबूत कारक भी मौजूद हैं जो इन धातुओं को निचले स्तरों पर समर्थन प्रदान कर सकते हैं।
सेंट्रल बैंकों की खरीदारी दे रही सहारा
दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। यह प्रवृत्ति पिछले कुछ वर्षों से जारी है।
जब केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोना खरीदते हैं तो बाजार में मांग बनी रहती है और कीमतों को एक आधार मिलता है।
यही वजह है कि कई विशेषज्ञ सोने में अत्यधिक गिरावट की संभावना को सीमित मानते हैं।
बैंक ऑफ जापान की नीतियां भी महत्वपूर्ण
बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीतियां भी वैश्विक वित्तीय बाजारों को प्रभावित करती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जापान की नीतियों के कारण वैश्विक निवेशकों का एक वर्ग अब भी सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहा है, जिससे बाजार को कुछ हद तक समर्थन मिल रहा है।
कमजोर अमेरिकी अर्थव्यवस्था भी बन सकती है सहारा
हालांकि डॉलर फिलहाल मजबूत दिखाई दे रहा है, लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लंबी अवधि में चुनौतियों का सामना कर सकती है।
यदि आर्थिक विकास कमजोर पड़ता है या मंदी की आशंका बढ़ती है, तो निवेशक फिर से सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर लौट सकते हैं। ऐसी स्थिति में सोने और चांदी की मांग बढ़ सकती है।
रिकॉर्ड हाई से कितनी गिर चुकी हैं कीमतें?
इस वर्ष की शुरुआत में सोना और चांदी अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गए थे।
भारत में एमसीएक्स पर सोना लगभग ₹1.93 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹4.20 लाख प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थी।
वर्तमान स्तरों की तुलना करें तो सोना करीब ₹50,000 और चांदी लगभग ₹2 लाख प्रति किलो तक सस्ती हो चुकी है। यह गिरावट बाजार के इतिहास की बड़ी गिरावटों में गिनी जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को एकमुश्त निवेश से बचना चाहिए।
यदि कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए सोना या चांदी खरीदना चाहता है, तो उसे चरणबद्ध तरीके से निवेश करना चाहिए। बाजार में हर गिरावट पर थोड़ी-थोड़ी खरीदारी करने से औसत लागत कम हो सकती है।
यह रणनीति विशेष रूप से उन निवेशकों के लिए उपयोगी मानी जाती है जो लंबी अवधि में धन सृजन का लक्ष्य रखते हैं।
Gold और चांदी के बाजार में इस समय भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। फेडरल रिजर्व की संभावित नीतियां, डॉलर की मजबूती, गोल्ड ईटीएफ से निकासी और भू-राजनीतिक तनाव में कमी जैसे कारकों ने कीमतों पर दबाव बनाया है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में कीमतों में और गिरावट संभव है, लेकिन केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारक इन धातुओं को पूरी तरह टूटने से बचा सकते हैं।
ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए सोच-समझकर और चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।












































