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सिंहभूम चैम्बर ने साईबर अपराध से ग्राहकों को बचाने के लिये आरबीआई गर्वनर को दिया सुझाव।

On: June 9, 2024 7:25 PM
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साईबर

 सिंहभूम चैम्बर ने एनईएफटी/आरटीजीएस में बैंक के द्वारा लाभार्थी खाताधारक के नाम का मिलान न करने से ग्राहकों के साथ होने वाले साईबर अपराध के मामले में रिजर्व बैंक गर्वनर का कराया ध्यानाकृष्ट।

जमशेदपुर : सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने ग्राहकों के द्वारा बैंक के माध्यम से एन.ई.एफ.टी व आर.टी.जी.एस. करने के समय लाभार्थी के खाता संख्या और आई.एफ.सी. कोड का ग्राहकों के नाम के साथ मिलान न करने से होने वाली साईबर अपराधों के संबंध में तथा इनपर रोकथाम हेतु किये जाने वाले उपायों को लेकर देश के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गर्वनर को पत्र के माध्यम से ध्यानाकृष्ट कराया है। यह जानकारी अध्यक्ष विजय आनंद मूनका तथा मानद महासचिव मानव केडिया ने दी।

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अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने कहा कि आजकल साईबर अपराधी लोगोें को लूटने के नीत नये-नये तरीके अपना रहे हैं और साईबर अपराधियों द्वारा ऐसे अपराधों का ग्राफ उपर की ओर लगातार बढ़ते जा रहा है जिसमें बैंको और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा नियामक कार्रवाइयों से जांचने की आवश्यकता है लेकिन बैंकों या अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा इसकी जांच नहीं की जा रही है। साईबर अपराधी ग्राहकों के द्वारा बैंक के माध्यम से एनईएफटी/आरटीजीएस भुगतान पर भी बैंक ग्राहकों के साथ साईबर अपराध की घटना को अंजाम देकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं। इसमें बैंकों के द्वारा एनईएफटी/आरटीजीएस के समय लाभार्थी के खाता संख्या एवं आईएफसी कोड के साथ उनके नाम का मिलान न करना भी एक प्रमुख कारण बन रहा है।

साईबर

साईबर अपराधी एनईएफटी/आरटीजीएस से वित्तीय लेनदेन में बैंक की खामियों और फूलप्रूफ प्रणाली के साथ कार्य न करने की कमी का भी अनुचित लाभ उठाकर उन्हें अपना शिकार बनाकर लाखों की ठगी कर रहें हैं। अध्यक्ष ने बताया इन घटनाओं की रोकथाम को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया गर्वनर को पत्र लिखकर उनका ध्यानाकृष्ट कराते हुये आग्रह किया गया है कि बैंको को सिस्टम को फूलप्रूफ बनाने के लिये यह निर्देशित किया जाय कि लाभार्थी का नाम, खाता संख्या और आईएफसी कोड को अनिवार्य रूप से सत्यापित करना चाहिए और यह सुनिश्चित हो कि एनईएफटी व आरटीजीएस के माध्यम से लाभार्थी के खाते में ही पैसा जमा हो।

मानद महासचिव मानव केडिया ने बताया कि पिछले दिनों में जमशेदपुर के एक व्यवसायी जिन्होंने किसी संस्थान से खरीदारी के पश्चात् उनके खाते में एनईएफटी/आरटीजीएस के माध्यम से पैसा हस्तांरित किया और इसके लिये फॉर्म में विक्रयकर्ता का खातासंख्या, आईएफसी कोड के साथ उनका नाम अंकित किया था। लेकिन साईबर अपराधियों ने बड़े ही शातिर तरीके से ईमेल के माध्यम से अपने खाता संख्या और आईएफसी कोड विक्रयकर्ता के नाम से खरीदार को भेज दिया। जिसमें एनईएफटी/आरटीजीएस के माध्यम से पैसा भेजने पर वह विक्रय कर्ता के खाते में न जाकर साईबर अपराधी के खाते में जमा हो गया। इससे व्यवसायी को लाखों की चपत लग गई। इसलिये ऐसे मामलों में बैंको को भी सतर्कता बरतते हुये नाम के साथ खाता संख्या एवं आई.एफ.सी कोड का मिलान कर सत्यापित अवश्य करना चाहिए।

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चैम्बर के पदाधिकारियों उपाध्यक्ष अनिल मोदी, अधिवक्ता राजीव अग्रवाल, पुनीत कांवटिया, अभिषेक अग्रवाल गोल्डी, सचिव भरत मकानी, अंशुल रिंगसिया, बिनोद शर्मा, सुरेश शर्मा लिपु एवं कोषाध्यक्ष सीए अनिल रिंगसिया ने भी गर्वनर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने आग्रह किया कि वे बैंकों को यह निर्देशित करे ऐसे मामलों में उचित जांच अवश्य करें जिससे ग्राहकों को लाखों रूपये की हानि होने से बचाया जा सके।

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