मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

संथाल परगना में हूल दिवस मनाएंगे पूर्व सीएम Champai सोरेन जामताड़ा से दुमका तक रहेगा व्यस्त कार्यक्रम

810c92dedce0cbe5e9d700a4ea327a2e
On: June 29, 2026 8:43 PM
Follow Us:
Champai
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

Netaji 2 1

झारखंड: पूर्व मुख्यमंत्री Champai सोरेन इस वर्ष हूल दिवस के अवसर पर संथाल परगना में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। उनका पूरा दिन जामताड़ा और दुमका जिले में आयोजित श्रद्धांजलि, पूजा-अर्चना, पौधारोपण तथा आदिवासी समाज के साथ संवाद कार्यक्रमों को समर्पित रहेगा। इस दौरान वे वीर शहीद सिदो-कान्हू, फुलो-झानो सहित संथाल हूल आंदोलन के महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और समाज के विभिन्न वर्गों से मुलाकात करेंगे।

Headlines

Netaji 3

हूल दिवस के मौके पर आयोजित इन कार्यक्रमों को लेकर समर्थकों और आदिवासी समाज में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

सुबह जामताड़ा के पुसाई मोड़ से होगा कार्यक्रम का शुभारंभ

पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन का पहला कार्यक्रम सुबह 9 बजे जामताड़ा जिले के पुसाई मोड़ में निर्धारित है। यहां पहुंचने के बाद वे अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ आमलावनी गांव स्थित वीर सिदो-कान्हू चौक जाएंगे।

वहां वे वीर सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद स्थानीय लोगों एवं पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर हूल दिवस के महत्व पर चर्चा करेंगे।

आदिवासी सांवता सुसार अखाड़ा के कार्यक्रम को करेंगे संबोधित

जामताड़ा प्रवास के दौरान चम्पाई सोरेन आदिवासी सांवता सुसार अखाड़ा द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर वे उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे।

अपने संबोधन में उनके संथाल हूल आंदोलन के इतिहास, आदिवासी समाज के योगदान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और समाज के विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार रखने की संभावना है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और आदिवासी समाज के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

दुमका पहुंचकर करेंगे पूजा-अर्चना

जामताड़ा के कार्यक्रम के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दुमका के लिए रवाना होंगे। दुमका पहुंचने पर उनका पहला कार्यक्रम सुबह करीब 11 बजे दिशोम मांझी थान में पूजा-अर्चना का रहेगा।

यह धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल आदिवासी समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां पूजा कर वे समाज की समृद्धि, एकता और खुशहाली की कामना करेंगे।

दिशोम जाहेरस्थान में करेंगे पौधारोपण

पूजा-अर्चना के बाद चम्पाई सोरेन दिशोम जाहेरस्थान में पौधारोपण कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश देंगे।

पौधारोपण को आदिवासी संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है। कार्यक्रम में समाज के कई गणमान्य लोग और कार्यकर्ता भी शामिल रहेंगे।

वीर सिदो-कान्हू मुर्मू चौक पर देंगे श्रद्धांजलि

इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अपने समर्थकों के साथ सिदो-कान्हू मुर्मू चौक (पोखरा चौक) पहुंचेंगे। यहां वे वीर सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।

हूल दिवस के अवसर पर यह कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा, जहां बड़ी संख्या में लोग अपने महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगे।

फुलो-झानो चौक पर वीरांगनाओं को करेंगे नमन

दुमका दौरे के दौरान चम्पाई सोरेन फुलो-झानो चौक भी जाएंगे। यहां वे वीरांगना फुलो और झानो की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।

फुलो-झानो ने संथाल हूल आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके साहस और बलिदान को आज भी आदिवासी समाज गर्व के साथ याद करता है।

कन्वेंशन हॉल में आदिवासी समाज के साथ करेंगे संवाद

श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दुमका के कन्वेंशन हॉल पहुंचेंगे, जहां आदिवासी समाज के मांझी बाबा, समाज के मार्गदर्शकों, बुद्धिजीवियों और अन्य गणमान्य लोगों के साथ संवाद करेंगे।

इस संवाद कार्यक्रम में समाज के विकास, शिक्षा, संस्कृति, परंपराओं के संरक्षण तथा वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही समाज को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न सुझावों पर भी विचार-विमर्श होगा।

प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, खिलाड़ियों और साहित्यकारों का होगा सम्मान

कन्वेंशन हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज से जुड़े प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, साहित्यकारों एवं विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया जाएगा।

इस सम्मान समारोह का उद्देश्य समाज की नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और उनकी उपलब्धियों को सम्मान देना है। आयोजकों का मानना है कि इससे युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

क्या है हूल दिवस का महत्व?

हर वर्ष 30 जून को हूल दिवस मनाया जाता है। यह दिन वर्ष 1855 में सिदो, कान्हू, चांद और भैरव मुर्मू के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुए ऐतिहासिक संथाल हूल आंदोलन की याद में मनाया जाता है।

इस आंदोलन ने आदिवासी समाज के स्वाभिमान, अधिकारों और स्वतंत्रता की लड़ाई को नई दिशा दी थी। हूल दिवस पर झारखंड सहित कई राज्यों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

आदिवासी संस्कृति और विरासत को मिलेगा बढ़ावा

पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।

हूल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में एकता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संदेश दिया जाएगा।

संथाल परगना में हूल दिवस के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री Champai सोरेन का दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जामताड़ा और दुमका में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए वे वीर सिदो-कान्हू, फुलो-झानो सहित हूल आंदोलन के महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। साथ ही आदिवासी समाज के लोगों से संवाद कर सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक विकास पर भी चर्चा करेंगे। इस अवसर पर प्रतिभाओं को सम्मानित कर युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

Netaji 4

Leave a Comment

धार्मिक

See All

लाइफस्टाइल

See All

मौसम

See All

खेल

See All

क्राइम

See All

Entertainment

See All

ज्योतिष

See All
Link copied