
जमशेदपुर: उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, छात्र-केंद्रित अधिगम तथा समावेशी शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी NIT जमशेदपुर द्वारा छात्र मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सहयोग, सकारात्मक परिसर संस्कृति, डिजिटल शिक्षण, शोध पर्यवेक्षण तथा शिक्षण नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित पाँच दिवसीय फैकल्टी उन्नयन कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की परिकल्पना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के माननीय निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य संकाय सदस्यों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, प्रभावी छात्र मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता तथा तकनीक-सक्षम शिक्षण के प्रति प्रशिक्षित करना था, जिससे विद्यार्थियों के समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा सके।
उद्घाटन सत्र: शिक्षक केवल अध्यापक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक भी
कार्यक्रम का शुभारंभ 26 मई 2026 को आयोजित उद्घाटन समारोह के साथ हुआ। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों की उपस्थिति में शिक्षा के बदलते स्वरूप और शिक्षक की विस्तृत भूमिका पर विशेष चर्चा की गई।
उद्घाटन संबोधन में यह रेखांकित किया गया कि आज के समय में संकाय सदस्य केवल विषय विशेषज्ञ नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, प्रेरक एवं सकारात्मक व्यक्तित्व निर्माण के प्रमुख आधार हैं। स्वस्थ, सुरक्षित एवं समावेशी शैक्षणिक वातावरण का निर्माण शिक्षकों की सक्रिय भूमिका से ही संभव है।
उद्घाटन दिवस के प्रथम तकनीकी सत्र में “संकाय सदस्यों के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक बुद्धिमत्ता” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इस सत्र का संचालन डीन (फैकल्टी वेलफेयर) एवं डीन (स्टूडेंट्स वेलफेयर) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। विशेषज्ञ वक्ता सुश्री सागरिका मिश्रा ने भावनात्मक बुद्धिमत्ता, तनाव प्रबंधन, सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार तथा सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

छात्र मार्गदर्शन एवं आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर विशेष चर्चा
कार्यक्रम के दूसरे चरण में 4 जून 2026 को छात्र मार्गदर्शन तथा परिणाम-आधारित शिक्षण प्रणाली पर दो महत्वपूर्ण विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए।
सुश्री विषाणु सुरेश ने “स्टूडेंट मेंटरिंग स्किल्स” विषय पर अपने व्याख्यान में बताया कि विद्यार्थियों के समक्ष केवल शैक्षणिक ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक एवं भावनात्मक चुनौतियाँ भी होती हैं। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों की समस्याओं की समय पर पहचान कर उन्हें उचित मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रभावी गुरु-शिष्य संबंधों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला बताया।
इसके पश्चात सुश्री एन. टी. रूपा ने “आउटकम-बेस्ड एजुकेशन (OBE) एवं एक्टिव पेडागॉजी” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण, सतत मूल्यांकन, पाठ्यक्रम समन्वयन तथा सक्रिय अधिगम पद्धतियाँ विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को अधिक प्रभावी बनाती हैं। उन्होंने विभिन्न नवाचारी शिक्षण तकनीकों के व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत किए।
सकारात्मक परिसर संस्कृति एवं डिजिटल शिक्षण पर जोर
कार्यक्रम की अगली श्रृंखला 11 जून 2026 को आयोजित हुई, जिसमें समावेशी परिसर संस्कृति एवं डिजिटल शिक्षा पर विशेष चर्चा की गई।
सुश्री सोनल बावडेकर ने “सकारात्मक परिसर वातावरण” विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसके सुरक्षित, सम्मानजनक एवं समावेशी वातावरण से भी निर्धारित होती है। उन्होंने सहयोग, विविधता, समान अवसर तथा मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले संस्थागत वातावरण की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके बाद सुश्री कल्याणी गोखले ने “डिजिटल पेडागॉजी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शिक्षकों को एआई आधारित शिक्षण उपकरणों, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, व्यक्तिगत अधिगम, ऑनलाइन शिक्षण तथा तकनीक-सक्षम कक्षा प्रबंधन की नवीनतम अवधारणाओं से परिचित कराया। साथ ही उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग पर भी प्रकाश डाला।

एआई आधारित ई-लर्निंग एवं शोध पर्यवेक्षण पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन
19 जून 2026 को आयोजित तीसरे चरण में तीन महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
पहले सत्र में सुश्री कल्याणी गोखले ने “एआई आधारित ई-लर्निंग” विषय पर व्याख्यान देते हुए ऑनलाइन शिक्षण सामग्री तैयार करने, छात्र सहभागिता बढ़ाने, डिजिटल कक्षाओं के प्रभावी संचालन तथा एआई आधारित शिक्षण तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग का प्रदर्शन किया।
दूसरे सत्र में डॉ. अभिजीत सिंह ने “शोध पर्यवेक्षण एवं शोधार्थी प्रबंधन” विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने शोध निर्देशन की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं, शोध नैतिकता, वैज्ञानिक लेखन, शोध प्रकाशन की रणनीतियों तथा स्नातकोत्तर एवं पीएचडी शोधार्थियों के प्रभावी मार्गदर्शन पर अपने अनुभव साझा किए।
दिन के अंतिम सत्र में सुश्री प्रिया कुमारी ने “परिसर संस्कृति एवं सकारात्मक वातावरण निर्माण” विषय पर व्याख्यान देते हुए संस्थागत मूल्यों, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क, पारस्परिक सहयोग एवं समावेशी कार्य संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक संस्थागत संस्कृति विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
समापन समारोह में संस्थागत संस्कृति पर विशेष व्याख्यान
कार्यक्रम का भव्य समापन 29 जून 2026 को आयोजित समापन समारोह के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. के. पोद्दार ने “संस्थागत संस्कृति एवं सकारात्मक परिसर वातावरण का प्रभाव” विषय पर मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की उत्कृष्टता उसके मजबूत संस्थागत मूल्यों, प्रभावी नेतृत्व, पारदर्शी कार्य प्रणाली तथा सहयोगात्मक वातावरण पर आधारित होती है।
समापन सत्र के अंतिम विशेषज्ञ व्याख्यान में सुश्री सागरिका मिश्रा ने पुनः “स्टूडेंट मेंटरिंग स्किल्स” विषय पर विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, सहानुभूतिपूर्ण मार्गदर्शन, सक्रिय संवाद, प्रेरणा एवं समग्र व्यक्तित्व विकास के महत्व को विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए शिक्षा मंत्रालय, आमंत्रित विशेषज्ञों, संस्थान प्रशासन, आयोजन समिति तथा सभी प्रतिभागी संकाय सदस्यों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका
यह कार्यक्रम प्रो. सरोज कुमार सारंगी, डीन (स्टूडेंट्स वेलफेयर) एवं रजिस्ट्रार (प्रभारी), तथा प्रो. दिलीप कुमार यादव, डीन (फैकल्टी वेलफेयर) के अध्यक्षीय मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कुमारी नम्रता एवं डॉ. सक्थिवेल एस. थे। वहीं कार्यक्रम समन्वयकों के रूप में डॉ. विजय कुमार डल्ला, डॉ. कुनाल सिंह, डॉ. संगीता कुमारी तथा डॉ. पौलमी माजी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सह-समन्वयक के रूप में श्री अजिताभ गौतम एवं श्रीमती पुष्पा बाला महतो ने आयोजन को सफल बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया।
कार्यक्रम के प्रमुख विषय
इस पाँच दिवसीय फैकल्टी उन्नयन कार्यक्रम में निम्नलिखित विषयों पर विशेष चर्चा एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया—
- छात्र मार्गदर्शन एवं परामर्श
- मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण
- संकाय सदस्यों के लिए भावनात्मक बुद्धिमत्ता
- आउटकम-बेस्ड एजुकेशन (OBE)
- सक्रिय अधिगम आधारित शिक्षण पद्धतियाँ
- डिजिटल पेडागॉजी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- एआई आधारित ई-लर्निंग
- शोध पर्यवेक्षण एवं शोधार्थी प्रबंधन
- सकारात्मक परिसर वातावरण
- संस्थागत संस्कृति एवं नेतृत्व
- समावेशी एवं छात्र-केंद्रित शिक्षण अभ्यास
कार्यक्रम की उपलब्धियाँ एवं निष्कर्ष
इस फैकल्टी उन्नयन कार्यक्रम ने संकाय सदस्यों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, प्रभावी छात्र मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, डिजिटल शिक्षण तकनीकों तथा शोध पर्यवेक्षण की नवीनतम रणनीतियों से समृद्ध किया। विशेषज्ञों के व्याख्यानों ने प्रतिभागियों को तकनीक-सक्षम शिक्षण, नवाचार आधारित अधिगम, समावेशी शिक्षा तथा संवेदनशील छात्र सहयोग को अपने दैनिक शैक्षणिक कार्यों में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
यह आयोजन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर की छात्र-केंद्रित, समावेशी एवं उत्कृष्ट उच्च शिक्षा प्रणाली के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है। साथ ही यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार, समावेशिता एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।








































