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भावनात्मक धरातल पर — भक्ति, वेदना और विश्वास की त्रिवेणी

On: July 22, 2025 7:43 PM
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कविता: करुणामय मंडल द्वारा रचित यह कविता एक भक्त की गहराई से ओतप्रोत अंतरात्मा की पुकार है, जिसमें सावन सोमवारी के अवसर पर भोलेनाथ के चरणों में समर्पण, श्रद्धा और सामाजिक प्रार्थना का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। कवि न केवल ईश्वर की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि एक आम व्यक्ति की वेदना और संघर्षमय जीवन को भी भगवान के समक्ष रखते हुए करुणा और कृपा की याचना करता है।

“भोले तेरे दरबार में

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        तेरे भक्त पुजारी है।

परम पावन दिन आज

      सावन सोमाबारी है।।

हो प्रिय परिवार कल्याण

     सब ने वरदान मांगी है।

सब पर कृपा बनाए रखना

      सब तेरे अनुरागी है।।

जीवन की जो जटिलता है

        संकट संशय भरी है।

दुःख कष्ट तकलीफें सदा

     साथ में गरीबी बीमारी है।।

वावजूद भक्त अडिग है

       अपनी भक्ति शक्ति में।

स्नेह प्रलेप प्रभु शंकर का

    लग जाय रगों दु:खती में।।

जलाभिषेक का पावन पर्व

        शिव सावन महोत्सव है।

भक्त भगवान का महामिलन

      आस्था का परम वैभव है।।

गूंज उठा आज हर शिवालय

        बोल बम का नारों से।

हर हर महादेव हर हर महादेव

       भोले का जयकारों से।।

जगत जीव का हो कल्याण

         प्रभु से ये प्रार्थना है।

सावन के ये पावन उत्सव

       भक्ति भव्य मानना है।।”

  • करुणामय मंडल, पूर्व जिला पार्षद पोटका, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड

 विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण:

 1. धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ:

“सावन सोमबारी” के पावन अवसर पर रचित यह कविता हिंदू धर्म की शिव भक्ति परंपरा से गहराई से जुड़ी है। शिव के प्रति समर्पण का जो भाव कवि ने व्यक्त किया है, वह लोक आस्था से निकला हुआ है – जलाभिषेक, बोल बम, हर-हर महादेव जैसे प्रतीक वाक्य जनमानस की धार्मिक चेतना को स्वर देते हैं।

 2. सामाजिक यथार्थ का चित्रण:

कवि केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शिव से समाज के लिए भी सामूहिक प्रार्थना करता है — “प्रिय परिवार कल्याण सब ने वरदान मांगी है…”।

यहां वह आम जन की पीड़ा को शिव के दरबार में निवेदन के रूप में प्रस्तुत करता है:

“दुःख कष्ट तकलीफें सदा, साथ में गरीबी बीमारी है।।”

 यह पंक्ति न केवल आर्थिक-सामाजिक विषमता को उजागर करती है, बल्कि ईश्वर से राहत की अपील भी करती है।

 3. भक्ति और अडिग आस्था का संदेश:

कविता में गूंजता हुआ यह भाव अत्यंत मार्मिक है —

“वावजूद भक्त अडिग है, अपनी भक्ति शक्ति में।।”

 यहां भक्त की डगमगाती परिस्थितियों में भी अडिग आस्था दर्शाई गई है, जो जीवन की सच्ची ताकत बनती है।

 4. काव्य संरचना और भाषिक माधुर्य:

रचना दोहा छंद शैली के समीप प्रतीत होती है, जो सहज, प्रवाहपूर्ण और गेय बनाती है। भाषा अत्यंत सरल, भावप्रधान और जनमानस को स्पर्श करने वाली है। “स्नेह प्रलेप”, “अनुरागी”, “परम वैभव” जैसे शब्दों का चयन कविता को एक अध्यात्मिक गरिमा प्रदान करता है।

यह कविता केवल सावन की एक भक्ति रचना नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक सन्देश, एक आत्मीय पुकार और एक लोक-प्रेरणा का माध्यम है। करुणामय मंडल की लेखनी एक जनप्रतिनिधि की संवेदनशीलता और एक भक्त के समर्पण का सुंदर समन्वय है।

इस कविता के माध्यम से पाठक को यह अनुभव होता है कि शिव की भक्ति केवल मंदिरों में सीमित नहीं, बल्कि जीवन की हर कठिनाई, आशा और आस्था का केंद्र भी है।

“ॐ नमः शिवाय” — यह केवल मंत्र नहीं, बल्कि इस पूरी कविता का प्राण है, जो हर अंत:करण को शिवमय कर देता है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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