“माह है स्वतंत्रता का
कयामत-ए-कुर्बानी है।
शहादत-ए-सरहद जो
महा विजय कहानी है।।
सफेदपोशों को क्या पता
देश भक्ति क्या चीज है।
भाषण बाजी और भ्रष्टाचारी
क्या भक्ति की दहलीज है ??
शरहद में जो डटे सदैव
शीत वर्षा क्या गर्मी है।
वही सच्चे देश भक्त है
वही इंडियन आर्मी है।।
जो स्थल जल नभ में करे
मातृभूमि की पहरेदारी।
क्या बिगाड़े दुश्मन उनके
भक्ति उनके सब पर भारी।
ऋतु हो या कोई उत्सव
डिगा ना पाए जिनके मन।
ऐसे सुपूत निगेवान है जो
क्या छुएं कोई उनके तन।।
शहादतों की पावन माह है
महाविजय की महामहोत्सव।
खून से सिंचा तिरंगा हमारा
15 अगस्त देश का गौरव।।”

भावार्थ:
“माह है स्वतंत्रता का” कविता में कवि ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीदों और सीमा पर देश की रक्षा करने वाले भारतीय सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की है। कविता में देशभक्ति के वास्तविक स्वरूप और केवल दिखावटी देशभक्ति के बीच अंतर को भी रेखांकित किया गया है।
कवि कहता है कि अगस्त का महीना केवल स्वतंत्रता का उत्सव मनाने का महीना नहीं, बल्कि उन अनगिनत वीरों के बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा और आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनकी कुर्बानियां भारत की विजय और स्वतंत्रता की गौरवपूर्ण कहानी का आधार हैं।

कविता में कवि सफेदपोश नेताओं और केवल भाषण देने वालों पर सवाल उठाता है। उसका कहना है कि जो लोग देशभक्ति की बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और स्वार्थ में लिप्त रहते हैं, वे देशभक्ति की वास्तविक भावना को नहीं समझ सकते। सच्ची देशभक्ति भाषणों में नहीं, बल्कि त्याग, कर्तव्य, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण में होती है।
कवि के अनुसार भारत के सैनिक ही देशभक्ति की सबसे सच्ची मिसाल हैं। वे कड़ाके की ठंड, तेज बारिश, तपती गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद सीमा पर अडिग खड़े रहते हैं। उनका उद्देश्य केवल एक होता है—मातृभूमि की रक्षा करना। वे अपने सुख-दुख और व्यक्तिगत जीवन से ऊपर राष्ट्रहित को रखते हैं।
कविता में भारतीय सेना के थल, जल और वायु तीनों क्षेत्रों में किए जाने वाले राष्ट्ररक्षा के कार्यों का उल्लेख किया गया है। सैनिक जमीन, समुद्र और आकाश—हर दिशा से देश की सुरक्षा करते हैं। उनके रहते दुश्मन भारत की ओर आंख उठाने से पहले भी कई बार सोचता है। उनका साहस और देश के प्रति समर्पण दुश्मन की हर चुनौती से बड़ा है।

कवि आगे कहता है कि चाहे कोई भी मौसम हो या कोई राष्ट्रीय उत्सव, सैनिकों के मनोबल को कोई परिस्थिति डिगा नहीं सकती। वे हमेशा सतर्क रहकर देश की निगरानी करते हैं। ऐसे वीर जवान भारत माता के सच्चे सपूत और प्रहरी हैं, जिनके त्याग और शौर्य के कारण देश के करोड़ों नागरिक सुरक्षित जीवन जी रहे हैं।
अंतिम पंक्तियों में कवि स्वतंत्रता दिवस को केवल उत्सव नहीं, बल्कि शहीदों की कुर्बानी को स्मरण करने का पावन अवसर बताता है। वह कहता है कि हमारा तिरंगा उन वीरों के खून और बलिदान से सींचा गया है। इसलिए 15 अगस्त केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि भारत के गौरव, स्वतंत्रता, शौर्य और बलिदान का प्रतीक है।
कविता का मूल संदेश
कविता हमें यह संदेश देती है कि सच्ची देशभक्ति केवल भाषण देने या राष्ट्रीय पर्व मनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति का वास्तविक अर्थ है—देश के प्रति ईमानदार रहना, अपने कर्तव्यों का पालन करना, राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना और देश की रक्षा करने वाले वीर जवानों के त्याग का सम्मान करना।
15 अगस्त हमें स्वतंत्रता की खुशी के साथ-साथ उन शहीदों को याद करने का भी अवसर देता है, जिनके बलिदान से आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं।
– करुणामय मंडल, पूर्व जिला पार्षद पोटका, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड.














