जमशेदपुर: Srinath विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट की ओर से आयोजित सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) “डिमिस्टिफाइंग रिसर्च पेपर राइटिंग: फ्रॉम कॉन्सेप्ट टू मैन्युस्क्रिप्ट” का सफलतापूर्वक समापन हुआ। ऑनलाइन माध्यम से आयोजित यह कार्यक्रम 17 से 23 अगस्त 2026 तक चला। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों एवं शोधार्थियों को शोध पत्र लेखन, अकादमिक लेखन तथा शोध प्रकाशन की प्रक्रिया से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करना और उनके शोध कौशल को विकसित करना था।
सात दिनों तक चले इस एफडीपी में प्रतिभागियों को शोध की शुरुआत से लेकर शोध पत्र को पांडुलिपि के रूप में तैयार करने और उसे गुणवत्तापूर्ण जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजने तक की प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने शोध के क्षेत्र में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और उनके समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की।
सात दिवसीय एफडीपी का रहा विशेष महत्व
आज के समय में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध और गुणवत्तापूर्ण अकादमिक प्रकाशन का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए शोध पत्र तैयार करने की व्यवस्थित प्रक्रिया को समझना बेहद आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए श्रीनाथ विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट की ओर से इस एफडीपी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के सातों दिनों में शोध से जुड़े अलग-अलग विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को शोध प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें शोध पत्र लेखन को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक तकनीकों से भी परिचित कराया गया।
शोध विचार विकसित करने पर हुई चर्चा
एफडीपी के दौरान शोध विचार विकसित करने के विषय पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी गुणवत्तापूर्ण शोध की शुरुआत एक स्पष्ट और प्रासंगिक शोध विचार से होती है। इसलिए शोधार्थियों के लिए यह समझना आवश्यक है कि किसी विषय का चयन किस प्रकार किया जाए और उस विषय से संबंधित महत्वपूर्ण शोध प्रश्न कैसे तैयार किए जाएं।
प्रतिभागियों को बताया गया कि शोध विषय केवल रुचि के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी प्रासंगिकता, नवीनता और उपलब्ध शोध साहित्य को ध्यान में रखते हुए चुना जाना चाहिए। विशेषज्ञों ने शोधार्थियों को अपने विषय की मौलिकता और वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
शोध विषय के चयन की प्रक्रिया
कार्यक्रम के दौरान शोध विषय के चयन को लेकर भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी शोध पत्र की गुणवत्ता काफी हद तक उसके विषय के सही चयन पर निर्भर करती है।
प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि शोध विषय चुनते समय वर्तमान सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक और अकादमिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए। इसके साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि चुने गए विषय पर पहले कितना शोध हो चुका है और उसमें आगे शोध की कितनी संभावनाएं मौजूद हैं।
अकादमिक लेखन की व्यवस्थित प्रक्रिया
एफडीपी में अकादमिक लेखन की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि सामान्य लेखन और अकादमिक लेखन में काफी अंतर होता है। अकादमिक लेखन में भाषा की स्पष्टता, तथ्यों की विश्वसनीयता, तार्किक प्रस्तुति और संदर्भों का सही उपयोग महत्वपूर्ण होता है।
प्रतिभागियों को शोध पत्र की संरचना, विषय-वस्तु की प्रस्तुति, शोध समस्या, उद्देश्य, शोध पद्धति, निष्कर्ष और संदर्भ लेखन आदि के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने शोध पत्र को सरल, स्पष्ट और वैज्ञानिक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए व्यावहारिक सुझाव भी दिए।
पांडुलिपि तैयार करने की जानकारी
एफडीपी के दौरान शोध पत्र को पांडुलिपि के रूप में तैयार करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि शोध पत्र लिखने के बाद उसे प्रकाशन के लिए भेजने से पहले उसकी संरचना और प्रस्तुति की अच्छी तरह समीक्षा करना आवश्यक है।
प्रतिभागियों को बताया गया कि पांडुलिपि तैयार करते समय शीर्षक, सारांश, की-वर्ड्स, परिचय, शोध पद्धति, परिणाम, चर्चा, निष्कर्ष और संदर्भ जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
शोध पत्र के प्रभावी प्रकाशन पर मार्गदर्शन
एफडीपी का एक महत्वपूर्ण विषय शोध पत्र का प्रभावी प्रकाशन भी रहा। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को शोध पत्र के लिए उपयुक्त जर्नल के चयन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि शोध पत्र को किसी भी जर्नल में भेजने से पहले उसके विषय, दायरे और प्रकाशन मानकों को समझना आवश्यक है। शोधार्थियों को जर्नल की गुणवत्ता, शोध क्षेत्र से उसकी प्रासंगिकता और प्रकाशन प्रक्रिया जैसे पहलुओं पर ध्यान देने की सलाह दी गई।
विशेषज्ञों ने साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम में विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने बतौर रिसोर्स पर्सन हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने अपने लंबे अकादमिक और शोध अनुभवों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया।
उन्होंने शोध पत्र लेखन के दौरान आने वाली सामान्य समस्याओं, शोध विषय की पहचान, लेखन की गुणवत्ता, पांडुलिपि तैयार करने और प्रकाशन से जुड़ी चुनौतियों के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों के व्यावहारिक अनुभव प्रतिभागियों के लिए काफी उपयोगी रहे।
डॉ. शिखा अग्रवाल ने दिया मार्गदर्शन
एफडीपी में डॉ. शिखा अग्रवाल, प्रिंसिपल, ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस, इंदौर ने बतौर रिसोर्स पर्सन हिस्सा लिया। उन्होंने शोध और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
उन्होंने शोध कार्य को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण अकादमिक लेखन पर जोर दिया। उनके अनुभव और सुझाव प्रतिभागियों के लिए उपयोगी रहे।

डॉ. मोहिताश नागोत्रा ने साझा किए शोध अनुभव
कार्यक्रम में डॉ. मोहिताश नागोत्रा, एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च (AIMSR) ने भी विशेषज्ञ के रूप में हिस्सा लिया।
उन्होंने शोध पत्र तैयार करने की प्रक्रिया और अकादमिक लेखन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। साथ ही शोध के दौरान आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक सुझाव साझा किए।
डॉ. एम. एम. अंजुम परवेज ने किया मार्गदर्शन
डॉ. एम. एम. अंजुम परवेज, एसोसिएट प्रोफेसर, चमेली देवी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने भी एफडीपी में रिसोर्स पर्सन के रूप में भाग लिया। उन्होंने शोध पत्र लेखन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा किए।

उनके सत्र में शोध लेखन की व्यवस्थित प्रक्रिया और गुणवत्तापूर्ण शोध तैयार करने से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।
डॉ. धीरज निम ने बताए प्रकाशन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू
एफडीपी में डॉ. धीरज निम, प्रोफेसर एवं एसोसिएट डीन (रिसर्च), ओरिएंटल यूनिवर्सिटी, इंदौर ने भी विशेषज्ञ के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने शोध और प्रकाशन के क्षेत्र में अपने अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए।
उन्होंने शोध पत्र को प्रकाशन-केंद्रित बनाने के लिए आवश्यक सावधानियों और व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उनके सुझावों से प्रतिभागियों को शोध पत्र की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिली।
विशेषज्ञ व्याख्यान और संवादात्मक सत्र रहे प्रभावी
सात दिवसीय एफडीपी के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान के साथ-साथ व्यावहारिक और संवादात्मक सत्र भी आयोजित किए गए। इससे प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं मिली, बल्कि उन्हें अपने प्रश्न विशेषज्ञों के सामने रखने और उनका समाधान प्राप्त करने का अवसर भी मिला।
सत्रों में प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और शोध तथा अकादमिक लेखन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
शोध लेखन की सामान्य चुनौतियों पर चर्चा
कार्यक्रम में शोध एवं अकादमिक लेखन के दौरान आने वाली सामान्य चुनौतियों पर भी विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि शोधार्थियों को विषय चयन, शोध प्रश्न तैयार करने, साहित्य समीक्षा, डेटा के विश्लेषण, लेखन और प्रकाशन के दौरान कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

इन चुनौतियों को व्यवस्थित तरीके से समझकर और सही शोध पद्धति अपनाकर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को शोध कार्य में धैर्य, निरंतरता और गुणवत्ता बनाए रखने की सलाह दी।
कन्वेनर डॉ. मृत्युंजय महतो की महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम का आयोजन कन्वेनर डॉ. मृत्युंजय महतो के मार्गदर्शन में किया गया। उनके नेतृत्व और समन्वय ने सात दिवसीय एफडीपी के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने से लेकर विभिन्न सत्रों के संचालन और समन्वय तक उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनके मार्गदर्शन में एफडीपी को व्यवस्थित रूप से संचालित किया गया।
डॉ. प्रकाश चौधरी ने संभाला आयोजन का समन्वय
एफडीपी के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. प्रकाश चौधरी ने कार्यक्रम की योजना, समन्वय और सात दिवसीय आयोजन के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने विभिन्न सत्रों के समन्वय के साथ कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से ऑनलाइन एफडीपी का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
ऑनलाइन माध्यम से हुआ कार्यक्रम
सात दिवसीय एफडीपी का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया गया। इस माध्यम से विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को एक मंच पर जोड़ना संभव हुआ।
ऑनलाइन आयोजन के बावजूद कार्यक्रम में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच प्रभावी संवाद कायम रहा। व्याख्यान, चर्चा और प्रश्नोत्तर सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने शोध लेखन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की।
शिक्षकों और शोधार्थियों को मिला लाभ
एफडीपी का सबसे महत्वपूर्ण लाभ शिक्षकों और शोधार्थियों को मिला। कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें शोध पत्र लिखने और उसे प्रकाशन के योग्य बनाने की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।
विशेषज्ञों के व्यावहारिक सुझावों से प्रतिभागियों को शोध कार्य को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिली। कार्यक्रम ने उन्हें अकादमिक लेखन के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
Srinath विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित यह एफडीपी विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। गुणवत्तापूर्ण शोध और अकादमिक प्रकाशन को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों और शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को शोध के नए तरीकों और अकादमिक लेखन की बेहतर तकनीकों से परिचित कराया गया।
अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
श्रीनाथ विश्वविद्यालय शोध और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में आयोजित यह सात दिवसीय एफडीपी विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कार्यक्रम ने शिक्षकों को अपने शोध कौशल को बेहतर करने तथा गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र तैयार करने के लिए प्रेरित किया। इससे विश्वविद्यालय में अकादमिक वातावरण को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रतिभागियों ने किया आभार व्यक्त
कार्यक्रम के समापन अवसर पर रिसोर्स पर्सन्स, प्रतिभागियों और आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया गया। प्रतिभागियों ने एफडीपी को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि सात दिनों के दौरान उन्हें शोध पत्र लेखन और प्रकाशन के संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं।
विशेषज्ञों के अनुभव और व्यावहारिक सुझावों को प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्य के लिए उपयोगी बताया।
गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन को मिलेगा प्रोत्साहन
एफडीपी के माध्यम से शोध पत्रों की गुणवत्ता और प्रभावी प्रकाशन पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शोध पत्र लिखना सिखाना नहीं था, बल्कि उसे बेहतर गुणवत्ता के साथ प्रकाशन योग्य बनाना भी था।
इस दिशा में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को शोध की मौलिकता, व्यवस्थित लेखन और उचित प्रकाशन मंच के चयन के बारे में जानकारी दी।
Srinath विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट की ओर से आयोजित सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम “डिमिस्टिफाइंग रिसर्च पेपर राइटिंग: फ्रॉम कॉन्सेप्ट टू मैन्युस्क्रिप्ट” का सफल समापन विश्वविद्यालय में शोध और अकादमिक लेखन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा।

17 से 23 अगस्त 2026 तक चले इस ऑनलाइन कार्यक्रम में शोध विचार विकसित करने से लेकर शोध पत्र तैयार करने, पांडुलिपि बनाने और उसे प्रभावी तरीके से प्रकाशित कराने तक की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रतिभागियों को शोध लेखन की बारीकियों और प्रकाशन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कन्वेनर डॉ. मृत्युंजय महतो के मार्गदर्शन तथा ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. प्रकाश चौधरी के समन्वय में आयोजित इस कार्यक्रम ने शिक्षकों और शोधार्थियों को शोध के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
एफडीपी ने श्रीनाथ विश्वविद्यालय की शोध, अकादमिक उत्कृष्टता और शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया। कार्यक्रम को विश्वविद्यालय में मजबूत शोध संस्कृति विकसित करने और गुणवत्तापूर्ण अकादमिक प्रकाशनों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।























