- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री इरफान अंसारी को टैग कर सरयू राय ने बाजार में हस्तक्षेप की मांग उठाई
- चीनी-प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच झारखंड में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका, जमाखोरी और स्टॉक की निगरानी की मांग
जमशेदपुर, 23 अगस्त 2026। चीनी और प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने केंद्र और झारखंड सरकार से तत्काल बाजार में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि चीनी और प्याज के बाजार में कार्टेल, जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर प्रभावी अंकुश लगाया जाना चाहिए।
सरयू राय ने विशेष रूप से मांग की कि चीनी को पुराने रेट पर बाजार में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर न पड़े।
मिल रेट में तेजी पर उठाए सवाल
सरयू राय ने 22 अगस्त के उपलब्ध मिल रेट का हवाला देते हुए चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाया। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों में चीनी का भाव करीब 5,820 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल है। उत्तर प्रदेश स्टेट शुगर कॉरपोरेशन की मोहीउद्दीनपुर मिल में यह दर 6,000 रुपये, जबकि पिपराइच और मुंडेरवा मिलों में करीब 6,200 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है।
महाराष्ट्र में कीमतें इससे भी अधिक होने का दावा करते हुए उन्होंने बताया कि छत्रपति संभाजी राजे सहकारी चीनी उद्योग लिमिटेड की ओर से एम-30 चीनी की कीमत 6,800 रुपये, एसएस-30 की 6,700 रुपये और एस-30 की 6,675 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। इन दरों पर जीएसटी अतिरिक्त है। इस हिसाब से मिल स्तर पर चीनी की कीमत करीब 66.75 से 68 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है।
झारखंड में अभी से निगरानी की जरूरत
सरयू राय ने कहा कि झारखंड अपनी खाद्य जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए दूसरे राज्यों से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर है। ऐसे में मिल स्तर पर कीमतों में होने वाली वृद्धि का असर राज्य के थोक और खुदरा बाजार तक पहुंचने में अधिक समय नहीं लगता।
उन्होंने राज्य सरकार से कीमतें बढ़ने का इंतजार करने के बजाय अभी से आपूर्ति, स्टॉक और थोक कीमतों की निगरानी शुरू करने की मांग की। उनके अनुसार बड़े थोक विक्रेताओं और स्टॉकिस्टों के पास मौजूद चीनी के भंडार की जांच होनी चाहिए, ताकि कोई कारोबारी कृत्रिम कमी पैदा कर बढ़ी कीमतों का फायदा न उठा सके।
नई गन्ने की फसल से पहले बढ़ोतरी पर सवाल
सरयू राय ने चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी के समय पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि करीब एक से डेढ़ महीने में गन्ने की नई फसल आने वाली है। ऐसे में नई फसल आने में ज्यादा समय नहीं बचने के बावजूद चीनी के दाम में अचानक तेजी समझ से परे है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब नई फसल आने वाली है तो अभी से कीमत बढ़ाकर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का क्या औचित्य है। उन्होंने पुराने रेट पर चीनी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
मिलों और स्टॉकिस्टों के भंडार की जांच की मांग
विधायक ने सरकार से यह भी पता लगाने को कहा कि चीनी मिलों के पास कितना स्टॉक उपलब्ध है, थोक व्यापारियों ने कितना माल जमा कर रखा है और बाजार में वास्तविक आपूर्ति कितनी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारोबारी के पास निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।

प्याज की कीमतों को लेकर भी चिंता
सरयू राय ने प्याज की बढ़ती कीमतों को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज की कीमतों में वृद्धि की खबरें सामने आ रही हैं और ऐसे समय में जमाखोरी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कीमतों को नियंत्रित करने में नाफेड की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी हस्तक्षेप का वास्तविक असर बाजार में दिखाई देना चाहिए। केवल कागजी स्तर पर कार्रवाई से उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिलेगी।
जमशेदपुर, रांची और धनबाद में निगरानी की मांग
सरयू राय ने झारखंड सरकार से राज्य के प्रमुख बाजारों में चीनी और प्याज के स्टॉक तथा थोक कीमतों की नियमित निगरानी करने का आग्रह किया। उन्होंने विशेष रूप से जमशेदपुर, रांची और धनबाद जैसे बड़े बाजारों में अचानक कीमत बढ़ने की स्थिति में प्रशासन से बाजार के साथ-साथ आपूर्ति के स्रोत तक जांच करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि महंगाई का असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रहता। चीनी और प्याज की कीमतों में वृद्धि से होटल-रेस्तरां, मिठाई कारोबार और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे कारोबार भी प्रभावित होते हैं। इसलिए सरकार को कार्टेल, कृत्रिम कमी और जमाखोरी—तीनों पर एक साथ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक मूल्यवृद्धि से राहत मिल सके।














