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भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ से आगे बढ़कर ‘विश्व की प्रयोगशाला’ बनना होगा: अनुप्रिया पटेल

On: August 22, 2026 9:57 PM
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अहमदाबाद | 22 अगस्त 2026

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भारत को दुनिया की फार्मेसी के रूप में स्थापित करने के बाद अब अनुसंधान, नवाचार और अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से ‘विश्व की प्रयोगशाला’ बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने शनिवार को अहमदाबाद स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIMA) में आयोजित IIMA हेल्थकेयर समिट 2026 में यह बात कही।

समिट के तीसरे संस्करण का मुख्य विषय ‘स्वास्थ्य सेवा में एआई को बढ़ावा देना’ था। कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के विशेषज्ञों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल, दवा खोज, रोगों की पहचान, व्यक्तिगत उपचार और स्वास्थ्य सेवा वितरण में इसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी फार्मास्युटिकल और स्वास्थ्य सेवा क्षमताओं का दुनिया के सामने प्रभावी प्रदर्शन किया। भारतीय दवा उद्योग ने महामारी के दौरान 200 से अधिक देशों को टीकों और आवश्यक चिकित्सा उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित की। वहीं, देश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत 220 करोड़ से अधिक वैक्सीन खुराक दी गईं।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, दवा उद्योग, स्वास्थ्य व्यवस्था और बड़े पैमाने पर उत्पादन एवं वितरण की क्षमता को दर्शाती है। अब आवश्यकता इस बात की है कि भारत अनुसंधान एवं नवाचार में भी वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़े।

एआई स्वास्थ्य क्षेत्र में ला सकता है बड़ा बदलाव

स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर बोलते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि एआई में दवा खोज की प्रक्रिया को तेज करने, व्यक्तिगत उपचार विकसित करने, बेहतर स्क्रीनिंग, नैदानिक निर्णय लेने और रोगों की निगरानी को मजबूत करने की व्यापक क्षमता है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक, तेज और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, इसके इस्तेमाल को लेकर सावधानी भी उतनी ही जरूरी है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई को मानव चिकित्सकीय निर्णय का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक होना चाहिए। स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित तरीके से किया जाना चाहिए। इसके साथ ही मरीजों की गोपनीयता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी डेटा की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय विकसित करना आवश्यक है।

उन्होंने सरकार, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, स्टार्टअप और उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि एआई आधारित स्वास्थ्य समाधानों को केवल पायलट परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय सफल मॉडलों को बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

एम्स में स्थापित किए गए एआई उत्कृष्टता केंद्र

अनुप्रिया पटेल ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एम्स नई दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं।

इन केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के व्यावहारिक इस्तेमाल, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीकों को विकसित करना है, जो चिकित्सकों और स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकें।

5,000 करोड़ रुपये की PRIP योजना पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार की 5,000 करोड़ रुपये की फार्मा-मेडटेक सेक्टर में रिसर्च एंड इनोवेशन प्रमोशन (PRIP) योजना का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य अनुसंधान गतिविधियों को मजबूत करना, उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना तथा देश को नवाचार आधारित विकास की दिशा में आगे ले जाना है।

इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय बजट में घोषित 10,000 करोड़ रुपये के बायोफार्मा शक्ति मिशन की जानकारी भी दी। इस मिशन का उद्देश्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को मजबूत करना, कुशल मानव संसाधन तैयार करना, नियामक और क्लिनिकल ट्रायल क्षमताओं को बेहतर बनाना तथा देश के घरेलू बायोफार्मास्युटिकल इकोसिस्टम को मजबूती देना है।

दवा खोज में एआई से घट सकता है समय

औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि फार्मास्युटिकल और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी दवा कंपनियां उत्पादन, मानव संसाधन, मार्केटिंग, वितरण और इन्वेंट्री मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि दूसरी ओर बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में काम कर रहे कई स्टार्टअप दवा खोज के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे संभावित दवा उम्मीदवारों की पहचान और चयन की प्रक्रिया तेज हो सकती है और नई दवाओं की खोज में लगने वाला समय कम किया जा सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि एआई आधारित नवाचार के सामने पूंजी, सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग, कंप्यूटिंग क्षमता और विशेषज्ञ प्रतिभा जैसी कई चुनौतियां मौजूद हैं। सरकार राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन और इंडियाएआई मिशन जैसी पहलों के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए योग्य स्टार्टअप को सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग और परिचालन लागत से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य और आनुवंशिक डेटा तक सुरक्षित पहुंच जरूरी

मनोज जोशी ने कहा कि भारतीय नवप्रवर्तकों को स्वास्थ्य सेवा और आनुवंशिक डेटा तक उचित सुरक्षा उपायों के साथ पहुंच उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। उन्होंने क्लिनिकल ट्रायल, प्रिसिजन मेडिसिन और मरीज स्तर के स्वास्थ्य डेटा के डिजिटलीकरण में एआई की संभावनाओं पर भी जोर दिया।

उनके अनुसार, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण डेटा की उपलब्धता एआई आधारित स्वास्थ्य तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन भी अनिवार्य होना चाहिए।

डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को मिल रही मजबूती

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने देश में मजबूत डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) खुले मानकों और इंटरऑपरेबल व्यवस्था पर आधारित डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम विकसित कर रहा है। इसके तहत 96 करोड़ से अधिक ABHA आईडी बनाई जा चुकी हैं और 1,000 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच डिजिटल रूप से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इतना बड़ा डिजिटल स्वास्थ्य नेटवर्क भविष्य में एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के विकास और विस्तार के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकता है।

टीबी और डायबिटिक रेटिनोपैथी की पहचान में एआई का इस्तेमाल

पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के मौजूदा इस्तेमाल के उदाहरण भी साझा किए। उन्होंने तपेदिक (टीबी) और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों की जल्द पहचान के लिए एआई आधारित अनुप्रयोगों का उल्लेख किया।

इसके अलावा ई-संजीवनी के माध्यम से एआई आधारित क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि ई-संजीवनी से अब तक 20 करोड़ से अधिक मरीज लाभान्वित हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि एआई आधारित स्वास्थ्य समाधानों को अपनाते समय गोपनीयता, जिम्मेदार एआई और वैज्ञानिक प्रमाणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही सरकार, शिक्षाविदों, स्टार्टअप और उद्योग के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

IndiaAI और AIKosh से नवाचार को बढ़ावा

स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के लोकतांत्रिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए IndiaAI Mission और AIKosh जैसी पहलों का भी उल्लेख किया गया। इन पहलों के माध्यम से डेटासेट, एआई मॉडल और टूलकिट तक पहुंच को व्यापक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और नवप्रवर्तकों को आवश्यक संसाधनों तक बेहतर पहुंच प्रदान करना है, ताकि भारत में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप एआई आधारित समाधान विकसित किए जा सकें।

दवा से मरीज की देखभाल तक एआई की भूमिका

IIMA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष और जायडस लाइफसाइंसेज के चेयरमैन पंकज पटेल ने कहा कि एआई स्वास्थ्य सेवा की पूरी वैल्यू चेन में बदलाव ला सकता है। दवा खोज से लेकर मरीज की देखभाल तक इसके इस्तेमाल की व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि एआई संभावित दवा उम्मीदवारों की पहचान तेज करने के साथ-साथ क्लिनिकल ट्रायल के डिजाइन, मरीजों की भर्ती और शोध प्रक्रिया में संभावित विफलताओं की शुरुआती पहचान में मदद कर सकता है।

इंडिया फार्मा आर्काइव्स का हुआ अनावरण

समिट के दौरान इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) और IIM अहमदाबाद आर्काइव्स के सहयोग से तैयार डिजिटल पहल ‘इंडिया फार्मा आर्काइव्स’ का भी अनावरण किया गया।

इस डिजिटल पहल का उद्देश्य भारत के फार्मास्युटिकल उद्योग के विकास को दस्तावेजीकृत और संरक्षित करना है। इसमें मौखिक इतिहास, अभिलेखीय दस्तावेज, तस्वीरें और दुर्लभ मीडिया सामग्री को एक साथ संकलित किया गया है।

यह संग्रह पिछले लगभग एक शताब्दी में भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र को आकार देने वाले लोगों, संस्थानों और उपलब्धियों को सामने लाने का प्रयास है।

कार्यक्रम के दौरान भारत में कोविड-19 वैक्सीन के विकास और यात्रा पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। यह पुस्तक महामारी के दौरान भारत की वैज्ञानिक, फार्मास्युटिकल और संस्थागत प्रतिक्रिया के महत्वपूर्ण पहलुओं को दस्तावेजीकृत करती है।

विकसित भारत @2047 के लिए एआई आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था पर जोर

IIMA हेल्थकेयर समिट 2026 में हुई चर्चा का व्यापक उद्देश्य विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को तकनीक और नवाचार से मजबूत करना रहा।

समिट में यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि भारत के लिए एआई केवल तकनीकी बदलाव का माध्यम नहीं, बल्कि दवा अनुसंधान, रोग की जल्द पहचान, व्यक्तिगत उपचार, क्लिनिकल निर्णय सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण साधन बन सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल मरीजों की सुरक्षा, गोपनीयता और मानवीय चिकित्सा निर्णयों की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।

भारत की फार्मास्युटिकल ताकत, बढ़ते डिजिटल हेल्थ नेटवर्क, मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और एआई जैसी उभरती तकनीकों को एक साथ जोड़कर देश न केवल वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की आपूर्ति में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है, बल्कि अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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