
झारखंड: जमशेदपुर में आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा JET Exam 2026 के अवसर पर हिंद इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (Hind ITI) ने न केवल शिक्षा बल्कि मानव सेवा का एक जीवित उदाहरण पेश किया है। भीषण गर्मी, तेज धूप और भीड़‑भाड़ के बीच परीक्षार्थी, अभिभावक और आमजन को राहत देने के लिए यहां एक छोटा‑सा, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण मानवता संचालित शिविर लगा दिया गया। इस पहल से लगभग हजारों लोगों को ठंडा पानी, शरबत, चना और गुड़ की राहत मिली, जो न केवल शारीरिक तरस बुझाने वाला था, बल्कि मानवीय संवेदना को जगाने वाला था।

JET Exam के दिन चलाया गया ‘सेवा शिविर’
आज 26 अप्रैल 2026 को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित JET Exam के लिए जमशेदपुर जैसे शहर‑मुख्यालयों पर भारी भीड़ देखी गई। सुबह से ही परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थी, उनके अभिभावक और आस‑पास से गुजरने वाले राहगीरों की भीड़ लगी हुई थी। इतनी गर्मी में खड़े रहना और बार‑बार पानी की जरूरत पड़ना किसी भी आम व्यक्ति के लिए आसान नहीं रहता।
इसी को ध्यान में रखते हुए हिंद आईटीआई ने परीक्षा केंद्र के आसपास या नजदीकी स्थान पर एक सेवा शिविर लगाया। यहां परीक्षा देने वाले छात्रों के अलावा अभिभावक और आम जनता को भी निशुल्क ठंडा पानी, शरबत, चना और गुड़ उपलब्ध कराया गया। ऐसे में दूर‑दराज से आए अभ्यर्थी भी थकान और गर्मी से राहत महसूस कर सके, यही इस पहल का मुख्य उद्देश्य रहा।

गर्मी के बीच चलाया गया यह कार्यक्रम क्यों ज़रूरी था?
जमशेदपुर के कई परीक्षा केंद्रों पर आज सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक लगातार लाइनें लगी रहीं, जहां छात्र, उनके अभिभावक और शिक्षक सभी गर्मी और धूप के बीच इंतज़ार कर रहे थे। ऐसी स्थिति में:
- लंबे समय तक खुली धूप में खड़े रहने से डिहाइड्रेशन और थकान का खतरा बढ़ जाता है।
- परीक्षा से पहले घबराहट और उत्तेजना भी दिमाग पर दबाव बना देती है, जिसे ठंडा पानी और हल्का खाना थोड़ा राहत दे सकता है।
ऐसे में हिंद आईटीआई द्वारा चलाया गया यह शिविर सेवा से ज्यादा कुछ था – यह एक सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण था। इससे यह संदेश भी जाता है कि शिक्षण संस्थान सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज की दैनिक आवश्यकताओं को भी समझना चाहिए।
इस शिविर की व्यवस्था किस तरह से की गई?
इस मानवता संचालित शिविर को हिंद आईटीआई के निदेशक डॉ. मोहम्मद ताहिर हुसैन के मार्गदर्शन में बनाया और चलाया गया। इसमें भरपूर भूमिका अदा की:
- संस्थान के प्रबंधन ने व्यवस्था और योजना बनाई।
- शिक्षकों ने निर्देश दिए कि कैसे सेवा दौरान अनुशासन और आदर दोनों कायम रहें।
- आईटीआई के छात्रों ने स्वयंसेवक की भूमिका निभाई – वे खड़े‑खड़े शरबत, चना, गुड़ और पानी बांटते रहे।
- स्थानीय जनसहयोग से भी जरूरतमंद लोगों तक सुविधा पहुंचाई गई।
सबसे खास बात यह रही कि यहां सिर्फ संस्था के छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी समाज के लिए यह व्यवस्था रखी गई – कोई भी व्यक्ति चाहे वह अभ्यर्थी हो या बस राहगीर, उसे बिना किसी भेदभाव के राहत दी गई।
ठंडा पानी, शरबत, चना और गुड़ – ये सिर्फ खान‑पान नहीं, एक संदेश हैं
भीषण गर्मी में जब लोग बिना छाते के खड़े हों, तब ठंडा पानी और शरबत उनके लिए जीवनरक्षक हो सकते हैं। इसी तरह, चना‑गुड़, जो पारंपरिक रूप से ऊर्जावर्धक माना जाता है, न सिर्फ भूख को शांत करता है बल्कि मानसिक तनाव भी कुछ हद तक घटाता है।
धार्मिक और सामाजिक मान्यता के अनुसार गर्मियों में प्यासे को पानी, भूखे को अन्न और जरूरतमंद को सहायता देना:
- सेवा भावना का प्रतीक है।
- सामाजिक बंधुत्व को मजबूत करता है।
- संस्कार और संस्कृति को जीवित रखने वाला कार्य भी कहा जाता है।
हिंद आईटीआई ने इस दृष्टि से भी यह कार्यक्रम चलाया, ताकि युवा छात्रों को यह भी समझ आए कि शिक्षा का सच्चा उद्देश्य सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा और मानवता की सेवा भी है।
निदेशक डॉ. मोहम्मद ताहिर हुसैन का संदेश
इस अवसर पर हिंद आईटीआई के निदेशक डॉ. मोहम्मद ताहिर हुसैन ने साफ शब्दों में कहा कि “समाज सेवा ही सच्ची शिक्षा का परिचय है।” उनका मानना है कि जो संस्थाएं बस दीवारों के अंदर पढ़ाती रह जाती हैं, वे आधी‑अधूरी शिक्षा देती हैं।
डॉ. हुसैन ने यह भी विश्वास दिलाया कि हिंद आईटीआई आगे भी ऐसे जनहितकारी और सामाजिक कार्यक्रमों को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा। इस संकल्प से यह स्पष्ट होता है कि इस संस्थान का लक्ष्य न केवल युवाओं को कौशल (स्किल) देना है, बल्कि उन्हें संवेदनशील, दयालु और समाज सेवी नागरिक भी बनाना है।
यह पहल क्यों प्रेरणादायक है?
- युवाओं के लिए उदाहरण
जब आईटीआई के छात्र खुद झुलसती धूप में खड़े होकर अन्य अभ्यर्थियों को शरबत बांट रहे होते हैं, तो यह युवाओं के लिए एक जीवंत उदाहरण बन जाता है कि छोटी‑छोटी सेवाएं भी बड़ा असर छोड़ सकती हैं। - संस्थान और समाज का जुड़ाव
इस तरह के कार्यक्रमों से संस्थान और आस‑पास के लोगों के बीच आस्था और विश्वास का संबंध मजबूत होता है। लोग यह जानने लगते हैं कि आईटीआई सिर्फ तकनीकी शिक्षण
इस पहल ने न केवल परीक्षार्थियों को राहत पहुंचाई, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी मजबूत किया। कठिन परिस्थितियों में इस तरह का सहयोग युवाओं के लिए एक सकारात्मक संदेश देता है और यह दिखाता है कि सामाजिक संगठन किस तरह शिक्षा और युवाओं के भविष्य के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।















