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परंपरागत खेती से आधुनिक कृषि तक का सफर पश्चिमी Singhbhum की महिला किसान पदमा महतो बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

On: August 3, 2026 5:41 PM
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पश्चिमी सिंहभूम: झारखंड के पश्चिमी Singhbhum जिले के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत सिमिदीरी पंचायत के सिमिदीरी गांव की प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती पदमा महतो आज जिले के किसानों, विशेषकर महिला कृषकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं, सरकारी योजनाओं का सही लाभ लें और सीखने की इच्छा बनाए रखें, तो सीमित संसाधनों में भी खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।

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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के तहत मिले तकनीकी मार्गदर्शन, उन्नत धान बीज और वैज्ञानिक खेती की बदौलत पदमा महतो ने धान उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। जहां पहले उनकी खेती मुश्किल से परिवार की जरूरतें पूरी कर पाती थी, वहीं अब वही खेती उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है।

करीब दो एकड़ भूमि पर करती थीं पारंपरिक खेती

पदमा महतो लगभग दो एकड़ कृषि भूमि की स्वामिनी हैं और वर्षों से खेती-किसानी से जुड़ी हुई हैं। पहले वे स्थानीय धान की पारंपरिक किस्मों की खेती करती थीं। उनकी खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, जिससे उत्पादन अनिश्चित रहता था।

कम उत्पादन, मौसम की मार और सीमित आय के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो पा रही थी। खेती में कड़ी मेहनत के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिलता था, जिससे कृषि एक लाभकारी व्यवसाय के बजाय केवल आजीविका का साधन बनकर रह गई थी।

कम वर्षा ने बढ़ाई आर्थिक चुनौतियां

एक वर्ष कम वर्षा के कारण उनकी धान की फसल गंभीर रूप से प्रभावित हुई। पूरे खेत से उन्हें केवल 8 से 9 क्विंटल धान का उत्पादन मिला।

इस उत्पादन का बड़ा हिस्सा परिवार की आवश्यकताओं में खर्च हो गया, जबकि बचा हुआ धान बेचने के बाद भी पर्याप्त आय नहीं हो सकी। सीमित आमदनी के कारण खेती की लागत निकालना और परिवार का खर्च चलाना दोनों ही चुनौतीपूर्ण हो गया था।

इसी कठिन समय ने उन्हें खेती में बदलाव की आवश्यकता का एहसास कराया।

कृषि विभाग के प्रशिक्षण ने बदली सोच

इसी दौरान चक्रधरपुर प्रखंड में कृषि विभाग द्वारा आयोजित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक खेती, उन्नत धान किस्मों, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जल संरक्षण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी।

पदमा महतो ने इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रेरणा लेकर पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने का निर्णय लिया। यही निर्णय उनके जीवन का सबसे बड़ा परिवर्तन साबित हुआ।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन से मिला उन्नत बीज और तकनीकी सहयोग

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत पदमा महतो को सुखारोधी धान किस्म आई.आर.-64 डी.आर.टी. का लगभग 40 किलोग्राम प्रमाणित बीज, आवश्यक कृषि आदान तथा विशेषज्ञों का नियमित तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया।

कृषि विभाग के निर्देशानुसार उन्होंने खेत की वैज्ञानिक तैयारी, समय पर रोपाई, संतुलित उर्वरक उपयोग, खरपतवार नियंत्रण तथा उचित फसल प्रबंधन अपनाया। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

उत्पादन में हुआ तीन गुना से अधिक इजाफा

आधुनिक कृषि तकनीकों का परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां पहले उनके खेत से लगभग 9.25 क्विंटल धान का उत्पादन होता था, वहीं वैज्ञानिक खेती अपनाने के बाद उत्पादन बढ़कर 28.80 क्विंटल तक पहुंच गया।

यह केवल उत्पादन में वृद्धि नहीं थी, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी था कि सही तकनीक और उचित मार्गदर्शन से खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है।

आय में आया बड़ा बदलाव, बढ़ी आर्थिक आत्मनिर्भरता

धान उत्पादन बढ़ने के साथ उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

  • पहले धान बिक्री से लगभग 18,500 रुपये की आय होती थी।
  • आधुनिक खेती अपनाने के बाद यह बढ़कर 57,600 रुपये तक पहुंच गई।

बेहतर उत्पादन और संतुलित लागत प्रबंधन के कारण उनकी शुद्ध बचत 5,400 रुपये से बढ़कर लगभग 41,700 रुपये हो गई।

इस अतिरिक्त आय से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, कृषि में पुनर्निवेश संभव हुआ और भविष्य के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।

अब अन्य किसानों के लिए बनीं प्रेरणा

आज पदमा महतो केवल सफल किसान नहीं हैं, बल्कि अपने क्षेत्र की अन्य महिला किसानों और युवा कृषकों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं।

वे स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़कर कृषि नवाचारों का प्रचार-प्रसार कर रही हैं। साथ ही विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा करती हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ उठा सकें।

उनकी सफलता से आसपास के गांवों के कई किसानों ने भी उन्नत धान किस्मों और वैज्ञानिक खेती को अपनाना शुरू किया है।

पदमा महतो ने साझा किया अपना अनुभव

श्रीमती पदमा महतो ने कहा—

पहले हम परंपरागत तरीके से खेती करते थे, जिससे मेहनत अधिक और उत्पादन कम मिलता था। कृषि विभाग के प्रशिक्षण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन से मिले उन्नत बीज एवं तकनीकी मार्गदर्शन ने मेरी सोच बदल दी। अब खेती पहले की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक हो गई है। मेरी इच्छा है कि हमारे गांव की अधिक से अधिक महिलाएं और किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं।”

उन्होंने बताया कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार हों, तो खेती निश्चित रूप से बेहतर आय का माध्यम बन सकती है।

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया सफलता का आधार

जिला कृषि पदाधिकारी अमरजीत कुजूर ने कहा कि जिले में कृषि को लाभकारी बनाने के लिए किसानों तक वैज्ञानिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पदमा महतो जैसी महिला किसान इस बात का प्रमाण हैं कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का समुचित उपयोग करके उत्पादन एवं आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि विभाग ऐसे सफल किसानों के अनुभव अन्य किसानों तक पहुंचाकर आधुनिक कृषि को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में कार्य कर रहा है।

उपायुक्त मनीष कुमार ने कही प्रेरणादायक बात

पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन किसानों को आधुनिक तकनीकों, प्रशिक्षण और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा

पदमा महतो की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए आगे आएं, तो खेती आय का सशक्त माध्यम बन सकती है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि जिले का प्रत्येक किसान योजनाओं का लाभ लेकर उत्पादन बढ़ाए, लागत घटाए और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए।”

महिला सशक्तिकरण और आधुनिक कृषि का प्रेरणादायक उदाहरण

पदमा महतो की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और आधुनिक कृषि का उत्कृष्ट उदाहरण भी है। उन्होंने यह साबित किया है कि सीमित भूमि और संसाधनों के बावजूद वैज्ञानिक खेती अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सकती है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और कृषि विभाग के सहयोग से उन्होंने जो परिवर्तन अपने जीवन में लाया है, वह जिले के हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन चुका है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि नई तकनीक, सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और मेहनत का समन्वय किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

आज पदमा महतो की सफलता पश्चिमी सिंहभूम ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है, जो यह विश्वास दिलाती है कि आधुनिक कृषि ही आत्मनिर्भर और समृद्ध किसान की पहचान है।

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