चाईबासा: आधुनिक Treatment के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की उपयोगिता एक बार फिर पश्चिमी सिंहभूम जिले में देखने को मिली है। आयुष विभाग, पश्चिमी सिंहभूम द्वारा आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी प्राचीन एवं वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणालियों के माध्यम से कई जटिल और लंबे समय से बीमार मरीजों को राहत दिलाई जा रही है। विभाग का उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों को समग्र स्वास्थ्य, बेहतर जीवनशैली और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करना है।
हाल ही में सदर अस्पताल, चाईबासा और आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मंझारी में सामने आए दो सफल उपचार मामलों ने यह साबित कर दिया है कि सही चिकित्सकीय परामर्श, नियमित उपचार और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इन मामलों ने जिले में आयुष चिकित्सा के प्रति लोगों का विश्वास और भी मजबूत किया है।
आयुष Treatment परंपरा और विज्ञान का प्रभावी समन्वय
भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियां—आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी और सिद्ध—आज भी लाखों लोगों के लिए स्वास्थ्य का भरोसेमंद आधार बनी हुई हैं।
आयुष विभाग का मानना है कि उपचार केवल दवाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि रोग के मूल कारण, व्यक्ति की जीवनशैली, खान-पान और मानसिक संतुलन को भी ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। यही समग्र दृष्टिकोण कई पुरानी और जटिल बीमारियों में बेहतर परिणाम दे रहा है।
उच्च रक्तचाप से जूझ रहे मरीज को मिली नई जिंदगी
सदर अस्पताल, चाईबासा में आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. कविता माइती के पास 42 वर्षीय मोरेन सिंह पुरती उपचार के लिए पहुंचे। वे पिछले पांच से छह महीनों से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की गंभीर समस्या से परेशान थे।
लगातार निगरानी और विभिन्न प्रयासों के बावजूद उनका रक्तचाप सामान्य नहीं हो पा रहा था। इस कारण उन्हें नियमित चिकित्सकीय देखरेख की आवश्यकता पड़ रही थी और उनका दैनिक जीवन भी प्रभावित हो रहा था।
45 दिनों के समन्वित उपचार से सामान्य हुआ ब्लड प्रेशर
डॉ. कविता माइती ने मरीज की स्थिति का विस्तृत आकलन करने के बाद उन्हें आयुर्वेद एवं होम्योपैथी आधारित समन्वित उपचार पर रखा।
लगभग 45 दिनों तक नियमित दवा, चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यक जीवनशैली संबंधी सलाह का पालन कराया गया। धीरे-धीरे मरीज के स्वास्थ्य में सुधार दिखाई देने लगा और कुछ ही सप्ताह में उनका रक्तचाप सामान्य स्तर पर आ गया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उपचार पूरा होने के बाद भी उनका ब्लड प्रेशर लगातार सामान्य बना हुआ है। मरीज ने बताया कि अब उन्हें पहले की तुलना में अधिक ऊर्जा, मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य का अनुभव हो रहा है।
खूनी बवासीर से पीड़ित बुजुर्ग को भी मिली बड़ी राहत
दूसरा प्रेरणादायक मामला आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मंझारी से सामने आया।
यहां आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. प्रदीप गुड़िया के पास टोंटो गांव के 60 वर्षीय मिहिर मार्शल बिरुआ उपचार के लिए पहुंचे। वे पिछले एक वर्ष से खूनी बवासीर की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे।
शौच के दौरान लगातार रक्तस्राव होने के कारण उनका शरीर कमजोर हो चुका था। उन्होंने पहले कई जगह उपचार कराया, लेकिन स्थायी राहत नहीं मिल सकी, जिससे वे मानसिक रूप से भी निराश हो गए थे।
स्वास्थ्य शिविर बना नई उम्मीद की शुरुआत
जून माह में आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मंझारी द्वारा उनके गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर के दौरान उनका परीक्षण किया गया।
जांच के बाद उन्हें विशेष आयुर्वेदिक उपचार शुरू कराया गया। इसके साथ ही चिकित्सकों ने उन्हें खान-पान में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।
उन्हें मसालेदार भोजन से बचने, अदरकयुक्त खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन करने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने तथा नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी गई।
महज एक महीने में मिला आश्चर्यजनक परिणाम
डॉक्टरों द्वारा दी गई दवाओं का नियमित सेवन और परामर्श का पूरी तरह पालन करने से केवल एक महीने के भीतर मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
धीरे-धीरे उनका रक्तस्राव पूरी तरह बंद हो गया और वे सामान्य जीवन जीने लगे। आज वे स्वयं को पूरी तरह स्वस्थ, ऊर्जावान और पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सक्रिय महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने आयुष विभाग और चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें ऐसी राहत की उम्मीद नहीं थी।
जीवनशैली में बदलाव भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा
आयुष विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी उपचार की सफलता केवल दवाओं पर निर्भर नहीं करती।
संतुलित भोजन, पर्याप्त जल सेवन, नियमित दिनचर्या, तनाव नियंत्रण, पर्याप्त नींद और चिकित्सकीय सलाह का पालन भी उतना ही आवश्यक है।
दोनों सफल मामलों में यह स्पष्ट हुआ कि दवाओं के साथ उचित जीवनशैली अपनाने से उपचार का प्रभाव और अधिक बेहतर हुआ।
उपायुक्त मनीष कुमार ने बताया स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिकता
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा—
बेहतर स्वास्थ्य सेवा मानव कल्याण का अभिन्न अंग है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि जिले के दूर-दराज क्षेत्रों तक पारदर्शी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा पहुंचे। आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जो कम खर्च में प्रभावी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती हैं। हमारा लक्ष्य एक स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है।”
आयुष विभाग बढ़ा रहा जन-जागरूकता अभियान
आयुष विभाग जिले में नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और परामर्श सेवाओं का संचालन कर रहा है।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के लाभों से अवगत कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
गंभीर बीमारियों के प्रबंधन में कारगर साबित हो रही आयुष चिकित्सा
सदर अस्पताल चाईबासा और आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मंझारी के ये दोनों सफल उपचार इस बात का उदाहरण हैं कि उचित चिकित्सकीय परामर्श, नियमित दवा, अनुशासित जीवनशैली और आयुष चिकित्सा के समन्वित दृष्टिकोण से कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभावी प्रबंधन संभव है।
हालांकि प्रत्येक मरीज की स्थिति अलग होती है और सभी रोगों का परिणाम समान नहीं होता, इसलिए किसी भी उपचार को शुरू करने या बदलने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।
पश्चिमी सिंहभूम में आयुष विभाग द्वारा किए जा रहे ये प्रयास न केवल लोगों को बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि यह भी साबित कर रहे हैं कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां आज भी आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण और उपयोगी सहयोगी बन सकती हैं। इनके माध्यम से जिले में स्वस्थ, जागरूक और रोगमुक्त समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर सार्थक कार्य किए जा रहे हैं।






















