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क्या यूट्यूबर, पोर्टल और सोशल मीडिया पत्रकार “पत्रकार” माने जाते हैं? जी हाँ होते हैं- पत्रकार। कैसे? आइये जानें।

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On: June 12, 2025 10:14 PM
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Press / Media Updates : भारत में यूट्यूब, पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से पत्रकारिता करने वाले लोग तेजी से उभर रहे हैं, लेकिन उनके लिए एक स्पष्ट और ठोस कानूनी ढांचा अभी पूरी तरह से परिभाषित नहीं है। फिर भी, कुछ मौजूदा संवैधानिक प्रावधान, कानून और मंत्रालयों की गाइडलाइन इनके कार्य को प्रभावित करते हैं।

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नीचे हम विस्तार से बता रहे हैं:

📰 1. क्या यूट्यूबर, पोर्टल और सोशल मीडिया पत्रकार “पत्रकार” माने जाते हैं?

कानूनन:
भारत में “पत्रकार” की कोई एक सार्वभौमिक कानूनी परिभाषा नहीं है। प्रेस काउंसिल एक्ट, 1978, प्रिंट मीडिया तक सीमित है और इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मीडिया को कवर नहीं करता।

हालांकि, डिजिटल मीडिया को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) और आईटी एक्ट के अंतर्गत कुछ हद तक नियंत्रित किया जा रहा है।

अगर कोई व्यक्ति यूट्यूब चैनल, वेबसाइट या सोशल मीडिया के माध्यम से समाचार, रिपोर्टिंग या जनहित से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचा रहा है, तो उसे डिजिटल पत्रकार माना जा सकता है।

भारत में अभी तक पत्रकार की कोई स्पष्ट कानूनी परिभाषा नहीं है, लेकिन संविधान के तहत हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है, जिसमें खबर बनाना और प्रकाशित करना शामिल है।

Ministry of Information and Broadcasting (MIB) Link : https://mib.gov.in/

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📜 2. संविधानिक आधार:

अनुच्छेद 19(1)(a)
यह प्रत्येक नागरिक को “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” का अधिकार देता है, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है। इसका लाभ यूट्यूबर और सोशल मीडिया पत्रकार भी उठा सकते हैं।

लेकिन:
यह स्वतंत्रता निर्बंधित नहीं है। अनुच्छेद 19(2) के तहत राज्य कुछ प्रतिबंध लगा सकता है – जैसे:

  • देश की सुरक्षा
  • शालीनता / नैतिकता
  • न्यायालय की अवमानना
  • मानहानि
  • सार्वजनिक व्यवस्था

🏛️ 3. क्या ये पत्रकार सरकारी दफ्तर या अफसर से सवाल कर सकते हैं?

सैद्धांतिक रूप से हां, क्योंकि:

  • RTI (Right to Information) Act 2005 के तहत कोई भी नागरिक सरकारी कार्यालयों से जानकारी मांग सकता है।
  • यदि कोई यूट्यूबर या डिजिटल पत्रकार “सार्वजनिक हित” में सवाल पूछता है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और RTI के अधिकार के तहत सुरक्षित है।

लेकिन: सरकारी अफसरों को किसी भी निजी व्यक्ति या पत्रकार के प्रश्नों का जवाब देना उनकी “नैतिक जिम्मेदारी” हो सकती है, कानूनी बाध्यता नहीं – जब तक कि RTI आवेदन न हो।

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📘 4. भारत सरकार की हालिया गाइडलाइंस / नियम:

📌 2021: Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules

इन नियमों के तहत:

  • डिजिटल न्यूज़ पोर्टल, यूट्यूब चैनल, सोशल मीडिया आधारित समाचार संस्थान को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में पंजीकरण करना होता है।
  • उन्हें आचार संहिता का पालन करना होता है जो प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों पर आधारित है।
  • शिकायत निवारण तंत्र रखना जरूरी है (Grievance Officer, Self-Regulation Body, etc.)

📌 PIB Fact Check & Fake News Guidelines:

सरकारी एजेंसियां फेक न्यूज के नाम पर कुछ कंटेंट को चुनौती देती हैं, जो डिजिटल पत्रकारों पर प्रभाव डाल सकता है।

📎 5. डिजिटल पत्रकारों को कैसे वैधता मिल सकती है?

  • News portal / YouTube चैनल को Ministry of I&B में सूचना देना चाहिए (फॉर्मेट अनुसार)।
  • प्रेस ID कार्ड (स्वतंत्र संगठन द्वारा) बनवाना चाहिए, हालाँकि यह केवल प्रमाण पत्र है, वैधानिक मान्यता नहीं।
  • पत्रकार संगठन / प्रेस क्लब / जर्नलिस्ट यूनियन में शामिल होकर नेटवर्किंग और पहचान बढ़ाई जा सकती है।

⚠️ सावधानियां:

  • सार्वजनिक जगह पर रिपोर्टिंग करते समय दूसरों की निजता और कानून का ध्यान रखें।
  • सरकारी परिसर या कार्यालय में वीडियो शूट करने से पहले अनुमति लेना उचित होता है।
  • फेक न्यूज़, मानहानि, अफवाह फैलाने या धमकी देने जैसे आरोप गंभीर अपराध माने जाते हैं।

यूट्यूब, सोशल मीडिया और पोर्टल से पत्रकारिता करने वाले नागरिकों को भारतीय संविधान की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण प्राप्त है। वे सार्वजनिक हित के मामलों पर सवाल उठा सकते हैं, रिपोर्टिंग कर सकते हैं, लेकिन उन्हें वर्तमान कानूनों और सरकार की डिजिटल मीडिया गाइडलाइंस का पालन करना अनिवार्य है। सरकारी अधिकारियों से सवाल करना वैध है, लेकिन सहयोग की बाध्यता तभी है जब औपचारिक प्रक्रिया अपनाई गई हो (जैसे RTI)।

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📌 कुछ सवाल:

  • क्या यूट्यूब, वेबसाइट (पोर्टल) या सोशल मीडिया पर काम करने वाले लोग भी पत्रकार माने जाते हैं?
  • क्या वे सरकारी दफ्तरों में जाकर अफसरों से सवाल कर सकते हैं?
  • उन्हें कौन सा कानून या अधिकार ऐसा करने की छूट देता है?

1. सबसे पहले – क्या ये लोग पत्रकार हैं?

  • अगर कोई व्यक्ति यूट्यूब चैनल, फेसबुक पेज, वेबसाइट या पोर्टल चलाकर खबरें दिखा रहा है, तो वह खुद को “डिजिटल पत्रकार” कह सकता है।
  • भारत में अभी तक ऐसा कोई कानून नहीं है जो साफ-साफ कहता हो कि कौन “पत्रकार” है और कौन नहीं।
  • लेकिन संविधान के अनुसार, हर नागरिक को बोलने और लिखने की आज़ादी (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) है। इस वजह से यूट्यूब और सोशल मीडिया वाले भी खबर दिखा सकते हैं।

📜 2. संविधान का आधार – कौन सा अधिकार मिलता है?

भारत का संविधान – अनुच्छेद 19(1)(a)
यह कहता है कि:

हर भारतीय को बोलने, लिखने और अपनी बात रखने की आज़ादी है।

इसी अधिकार के तहत –

  • आप खबर बना सकते हैं,
  • किसी अफसर से सवाल पूछ सकते हैं,
  • और वीडियो बनाकर लोगों को सच्चाई दिखा सकते हैं।

लेकिन…

🚫 कुछ सीमाएं भी हैं

सरकार कुछ मामलों में रोक लगा सकती है, जैसे:

  • देश की सुरक्षा
  • झूठ फैलाना (फेक न्यूज)
  • दंगे भड़काना
  • मानहानि करना
  • अदालत का अपमान

इसलिए इस आज़ादी का सही तरीके से और जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करना जरूरी है।

🏛️ 3. क्या सरकारी अफसर से सवाल किया जा सकता है?

हाँ, लेकिन शर्तों के साथ:

  • आप आरटीआई (RTI) यानी सूचना का अधिकार के तहत लिखित में सवाल पूछ सकते हैं।
  • अगर आप किसी सरकारी दफ्तर में कैमरा लेकर जाते हैं, तो पहले अनुमति लेना बेहतर होता है।
  • अफसर चाहे तो आपकी बात का जवाब दे सकता है, लेकिन उसे मजबूर नहीं किया जा सकता (बिना RTI के)।

अगर आप पत्रकार हैं या पत्रकारिता कर रहे हैं – तो सवाल पूछना आपका हक है, लेकिन सरकारी परिसर के नियमों का पालन करना भी जरूरी है।

📋 4. भारत सरकार की डिजिटल मीडिया के लिए गाइडलाइन क्या है?

2021 में सरकार ने बनाए थे नए नियम:

नाम:
👉 IT Rules 2021 – डिजिटल न्यूज़ और सोशल मीडिया के लिए बनाए गए।

इन नियमों में कहा गया:

  • अगर आप न्यूज़ वेबसाइट या न्यूज़ यूट्यूब चैनल चलाते हैं, तो आपको सरकार (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
  • आप को एक शिकायत अधिकारी (Grievance Officer) बनाना होगा ताकि कोई शिकायत होने पर लोग आपसे संपर्क कर सकें।
  • आपको फेक न्यूज या भड़काऊ खबरों से बचना होगा।
  • आप पर भी वही नियम लागू होंगे, जो बड़े मीडिया चैनलों पर होते हैं।

🪪 5. डिजिटल पत्रकार की पहचान कैसे बनाएं?

  • आप खुद की प्रेस आईडी कार्ड बना सकते हैं या किसी पत्रकार संगठन से जुड़ सकते हैं।
  • कुछ पत्रकार संगठन यूट्यूबर और पोर्टल पत्रकारों को भी सदस्यता देते हैं।
  • आप प्रेस क्लब या जर्नलिस्ट यूनियन से भी जुड़ सकते हैं।

⚠️ 6. किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

ध्यान रखेंक्यों
सरकारी दफ्तर में बिना अनुमति शूटिंग न करेंयह सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हो सकता है
किसी व्यक्ति की इज्जत या निजता को नुकसान न पहुंचाएंयह मानहानि के केस में आ सकता है
फर्जी खबर न फैलाएंयह फेक न्यूज कानून के अंतर्गत अपराध हो सकता है
धमकी भरी या नफरत फैलाने वाली भाषा न अपनाएंइससे आपके चैनल पर कार्रवाई हो सकती है

🔚 निष्कर्ष:

यूट्यूब, पोर्टल और सोशल मीडिया के ज़रिये खबर दिखाने वाले लोग भी पत्रकारिता कर सकते हैं। उन्हें भारत के संविधान से बोलने और लिखने की आज़ादी मिली है। वे सरकारी दफ्तरों में सवाल कर सकते हैं, लेकिन उन्हें RTI, सरकारी नियम और नैतिकता का पालन करना चाहिए। सरकार की 2021 की गाइडलाइन के अनुसार डिजिटल पत्रकारों को भी जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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