- একটি বাংলা একাডেমি প্রতিষ্ঠা এবং উচ্চশিক্ষায় বন্ধ হয়ে যাওয়া বাংলা বিভাগগুলো পুনঃস্থাপনের দাবি
- विधानसभा के समक्ष कुटे मैदान में धरना-प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
रांची, 10 अगस्त 2026। झारखंड में बांग्ला भाषा की शिक्षा, संरक्षण और संवर्धन को लेकर सोमवार को झारखंड विधानसभा के निकट कुटे मैदान में एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन झारखंड बांग्ला-भाषी उन्नयन समिति के आह्वान पर किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से छात्र, शिक्षक, भाषा-प्रेमी और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य में तत्काल बांग्ला अकादमी की स्थापना करने और कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में बांग्ला भाषा के विभागों को बंद करने के फैसले को अविलंब वापस लेने की मांग की।
विभिन्न प्रमंडलों से पहुंचे छात्र और भाषा-प्रेमी
धरना-प्रदर्शन में कोल्हान, संथाल परगना, उत्तर छोटानागपुर और दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल के विभिन्न जिलों से लोग पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने बांग्ला भाषा की शिक्षा और इसके संरक्षण को लेकर सरकार से ठोस पहल करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि झारखंड में बांग्ला भाषा की समृद्ध ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा रही है। इसके बावजूद उच्च शिक्षा में बांग्ला विभागों को बंद करने का निर्णय विद्यार्थियों के भविष्य और राज्य की भाषाई विरासत के लिए चिंता का विषय है।
सरकार की उदासीनता पर उठाए सवाल
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए समिति की राज्य कार्यकारी अध्यक्ष रीना मंडल, राज्य संयुक्त सचिव काबु दत्ता, तापस चटर्जी और भजन करमाकर सहित छात्र प्रतिनिधि इंद्रजीत पंडित, बापन घोष और बरनाली गुप्ता ने अपनी बातें रखीं।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में बांग्ला भाषा के प्रति सरकार का रवैया उदासीन है। उन्होंने कहा कि बांग्ला भाषा को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान देने के साथ-साथ इसके संरक्षण और विकास के लिए संस्थागत व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने मांग की कि उच्च शिक्षा में बांग्ला विभागों को बंद करने के निर्णय को वापस लिया जाए, ताकि बांग्ला भाषा के विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में परेशानी न हो।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन राज्य सरकार के प्रतिनिधि को सौंपा। ज्ञापन में मुख्य रूप से झारखंड में बांग्ला अकादमी की तत्काल स्थापना तथा कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में बांग्ला विभागों को बंद करने के फैसले को वापस लेने की मांग की गई।
समिति ने कहा कि बांग्ला भाषा की शिक्षा, संरक्षण, संवर्धन और भाषाई अधिकारों की रक्षा के लिए उसका लोकतांत्रिक संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। समिति ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।












