
यूरोप: इन दिनों भीषण Heat की चपेट में है। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और लगातार हीटवेव के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। आमतौर पर ठंडे मौसम के लिए पहचाने जाने वाले ब्रिटेन में भी हालात असामान्य हैं। स्कूलों पर असर पड़ा है, परिवहन सेवाएं प्रभावित हुई हैं और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है।

ऐसे समय में जब अधिकांश लोग एयर कंडीशनर (AC) को राहत का सबसे प्रभावी साधन मानते हैं, ब्रिटेन के कुछ हिस्सों में लोगों से अपने घरों में लगे AC हटाने या उनके इस्तेमाल को सीमित करने के लिए कहा जा रहा है। इस फैसले ने आम लोगों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के बीच भी नई बहस छेड़ दी है।
आखिर क्यों हटवाए जा रहे हैं AC?
ब्रिटेन में एयर कंडीशनर हटाने या उनके उपयोग को सीमित करने की मुख्य वजह सरकार की पर्यावरण और जलवायु नीति है। देश में लागू “नेट जीरो” लक्ष्य के तहत कार्बन उत्सर्जन कम करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इसी नीति के तहत बिल्डिंग प्लानिंग नियमों में यह सिद्धांत अपनाया गया है कि किसी भी भवन में “एक्टिव कूलिंग” यानी AC का उपयोग तभी किया जाए, जब “पैसिव कूलिंग” के सभी उपाय पूरी तरह अपनाए जा चुके हों।
सरल शब्दों में कहें तो पहले प्राकृतिक तरीकों से घर को ठंडा रखने की कोशिश की जाएगी। यदि उससे राहत नहीं मिलती, तभी एयर कंडीशनर का इस्तेमाल उचित माना जाएगा।
सरकार किन उपायों को दे रही प्राथमिकता?
स्थानीय प्रशासन लोगों को सलाह दे रहा है कि वे घरों में प्राकृतिक वेंटिलेशन बढ़ाएं। इसके लिए खिड़कियां और दरवाजे उचित समय पर खोलने, पंखों का उपयोग करने, धूप रोकने वाले पर्दे लगाने, छाया देने वाले उपाय अपनाने और भवनों को इस तरह डिजाइन करने की सलाह दी जा रही है कि अंदर गर्मी कम प्रवेश करे।
सरकार का मानना है कि यदि भवनों का निर्माण ऊर्जा दक्ष (Energy Efficient) तरीके से किया जाए तो एयर कंडीशनर की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है।
लंदन में सबसे ज्यादा सख्ती
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में इस नीति को सबसे सख्ती से लागू किया जा रहा है। कई स्थानीय काउंसिलों ने भवनों में लगे एयर कंडीशनर की समीक्षा शुरू कर दी है। कुछ मामलों में लोगों को AC हटाने या वैकल्पिक उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि एयर कंडीशनर अधिक बिजली की खपत करते हैं और कार्बन उत्सर्जन बढ़ाने में योगदान देते हैं। इसलिए उनका उपयोग केवल अंतिम विकल्प के रूप में ही किया जाना चाहिए।
लंदन प्लान क्या है?
लंदन प्रशासन ने वर्ष 2021 में “लंदन प्लान” नाम से एक व्यापक शहरी विकास नीति लागू की थी। इसका उद्देश्य नई इमारतों को इस प्रकार डिजाइन करना है कि उनमें प्राकृतिक रूप से तापमान नियंत्रित रहे और एयर कंडीशनर की आवश्यकता कम पड़े।
इस नीति के अनुसार भवनों में बेहतर वेंटिलेशन, हरित क्षेत्र, छायादार संरचनाएं और ऊर्जा दक्ष निर्माण सामग्री का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
हीटवेव के बीच बढ़ी मुश्किलें
ब्रिटेन इस समय गंभीर हीटवेव का सामना कर रहा है। मौसम विभाग ने कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी को लेकर चेतावनी जारी की है। कुछ स्थानों पर स्कूलों की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक तापमान बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है। इसलिए कई लोग सरकार की इस नीति पर सवाल उठा रहे हैं।
अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
रिपोर्टों के अनुसार, कई अस्पतालों में पर्याप्त शीतलन व्यवस्था नहीं होने के कारण चिकित्सा सेवाओं पर दबाव बढ़ा है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक गर्मी के कारण गैर-आपातकालीन सर्जरी को टालने की नौबत भी आई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल, केयर होम और स्कूल जैसी जगहों पर एयर कंडीशनिंग की पर्याप्त व्यवस्था आवश्यक है, ताकि मरीजों, छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ब्रिटेन में कितने घरों में लगे हैं AC?
दिलचस्प बात यह है कि ब्रिटेन में एयर कंडीशनर का उपयोग अभी भी बहुत सीमित है। अनुमान के अनुसार देश के केवल लगभग 3 प्रतिशत घरों में ही एयर कंडीशनर लगे हुए हैं।
इसके विपरीत अमेरिका जैसे देशों में लगभग 90 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनिंग उपलब्ध है। यही कारण है कि ब्रिटेन की अधिकांश इमारतें पारंपरिक मौसम को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं और उनमें अत्यधिक गर्मी से निपटने की व्यवस्था सीमित है।
इंजीनियरों और विशेषज्ञों की क्या राय है?
निर्माण और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन बढ़ते तापमान को देखते हुए व्यावहारिक समाधान भी आवश्यक हैं।
उनका मानना है कि आधुनिक ऊर्जा दक्ष एयर कंडीशनर, बेहतर इन्सुलेशन और सौर ऊर्जा जैसी तकनीकों का संतुलित उपयोग अधिक प्रभावी विकल्प हो सकता है। केवल AC हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।
राजनीतिक विवाद भी तेज
एयर कंडीशनर को लेकर लागू की जा रही नीतियों ने ब्रिटेन की राजनीति में भी बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लोगों की सुविधाओं को सीमित कर रही है।
वहीं सरकार का कहना है कि एयर कंडीशनर पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। केवल ऊर्जा दक्ष निर्माण और प्राकृतिक शीतलन उपायों को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई जा रही है।
सरकारी प्रवक्ताओं का कहना है कि स्थानीय निकायों को परिस्थितियों के अनुसार व्यावहारिक निर्णय लेने चाहिए और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
जलवायु परिवर्तन से बदल रही हैं चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में गर्मी की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। जिन देशों में पहले एयर कंडीशनर की आवश्यकता बहुत कम महसूस होती थी, वहां अब भवनों की डिजाइन और शहरी योजनाओं में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है।
आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण और लोगों की सुविधा के बीच संतुलन बनाना सरकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
ब्रिटेन में एयर कंडीशनर को लेकर चल रही बहस केवल गर्मी से राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संरक्षण और टिकाऊ विकास की व्यापक नीति से जुड़ा विषय बन चुकी है। एक ओर सरकार कार्बन उत्सर्जन कम करने और प्राकृतिक शीतलन उपायों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर बढ़ती हीटवेव के बीच आम लोग और स्वास्थ्य विशेषज्ञ व्यावहारिक समाधान की मांग कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ब्रिटेन पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों की आवश्यकताओं के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करता है।







































