
राजस्थान: अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में Chambal के कुख्यात पूर्व दस्यु जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जेल में बंद एक साथी कैदी ने कथित तौर पर उसका गला दबाकर हत्या कर दी। घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल कड़ा कर दिया गया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और हत्या के पीछे की वजह का पता लगाया जा रहा है।

जगन गुर्जर कभी राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से लगे चंबल के बीहड़ों में आतंक का पर्याय माना जाता था। जिस अपराधी के नाम से लोग कांपते थे, उसकी मौत अब जेल की चारदीवारी के भीतर हुई।
तीन राज्यों में फैला था जगन का खौफ
Chambal के बीहड़ों में सक्रिय रहे जगन गुर्जर का नाम हत्या, अपहरण, फिरौती, लूट और रंगदारी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ा रहा। करीब दो दशकों तक उसने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में अपना आतंक कायम रखा।
उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में 125 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह कई बार वांछित अपराधी रहा और उस पर लाखों रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। एक समय उस पर 11 लाख रुपये तक का इनाम घोषित किया गया, जो उस दौर के सबसे बड़े इनामों में शामिल था।
कई बार किया आत्मसमर्पण, फिर लौट आया अपराध की दुनिया में
जगन गुर्जर का आपराधिक जीवन कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा। वर्ष 2001 में उसने पहली बार पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। हालांकि जेल से जमानत मिलने के बाद वह फिर अपराध की दुनिया में लौट आया।
इसके बाद भी उसने अलग-अलग समय पर कई बार आत्मसमर्पण किया। वर्ष 2009 में उसने सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान आत्मसमर्पण किया, जबकि बाद के वर्षों में भी पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते कई बार कानून के सामने झुकना पड़ा। इसके बावजूद उसका नाम लगातार गंभीर अपराधों में सामने आता रहा।
गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान चर्चा में आया नाम
साल 2008 के गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान जगन गुर्जर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। उस दौरान उसने राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। इस घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने उसके खिलाफ व्यापक अभियान चलाया और उस पर इनाम भी बढ़ा दिया गया।
लगातार बढ़ते पुलिस दबाव के बीच उसने वर्ष 2009 में आत्मसमर्पण कर दिया, लेकिन उसका नाम लंबे समय तक अपराध जगत में चर्चाओं का विषय बना रहा।
विधायक को धमकी देने के बाद फिर सुर्खियों में
वर्ष 2022 में जगन गुर्जर एक बार फिर चर्चा में आया, जब उसने बाड़ी विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को कथित रूप से जान से मारने की धमकी दी। इस मामले के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई तेज की और इनाम घोषित किया।
पुलिस दबाव बढ़ने पर उसने फरवरी 2022 में करौली पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद सुरक्षा कारणों से उसे अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल भेज दिया गया, जहां वह न्यायिक हिरासत में बंद था।
तीन राज्यों की पुलिस के लिए बना रहा चुनौती
जगन गुर्जर को पकड़ना तीन राज्यों की पुलिस के लिए लंबे समय तक बड़ी चुनौती रहा। चंबल के दुर्गम बीहड़ों की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय नेटवर्क का फायदा उठाकर वह अक्सर पुलिस को चकमा देने में सफल रहता था।
दिलचस्प बात यह रही कि अधिकांश अवसरों पर पुलिस उसे मुठभेड़ या अभियान में गिरफ्तार नहीं कर सकी। उसने अलग-अलग समय पर स्वयं आत्मसमर्पण करना ही बेहतर समझा।
Chambal के बीहड़ों से शुरू हुआ अपराध का सफर
धौलपुर और चंबल के बीहड़ दशकों तक डकैतों की शरणस्थली रहे हैं। इन्हीं बीहड़ों में जगन गुर्जर ने अपना आपराधिक साम्राज्य खड़ा किया। शुरुआत साधारण आपराधिक घटनाओं से हुई, लेकिन धीरे-धीरे वह एक संगठित गिरोह का सरगना बन गया।
उसकी गैंग पर हत्या, अपहरण, लूट, रंगदारी और अवैध हथियार रखने जैसे कई गंभीर आरोप लगे। बीहड़ों की कठिन भौगोलिक स्थिति उसके लिए सुरक्षा कवच का काम करती रही।
महिला दस्यु कौमेश गुर्जर से जुड़ी रही चर्चाएं
जगन गुर्जर के जीवन का एक चर्चित पहलू महिला दस्यु कौमेश गुर्जर भी रही। बताया जाता है कि कौमेश ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए कम उम्र में ही बंदूक उठा ली थी और बाद में जगन के गिरोह में शामिल हो गई।
समय के साथ दोनों एक-दूसरे के करीब आए और चंबल के बीहड़ों में लंबे समय तक साथ रहे। कौमेश का नाम भी कई गंभीर आपराधिक मामलों में सामने आया। बाद में वह पुलिस कार्रवाई में गिरफ्तार हुई और जेल भी गई।
परिवार और राजनीति से भी जुड़ा रहा नाम
जगन गुर्जर का निजी जीवन भी अक्सर चर्चा में रहा। बताया जाता है कि उसकी तीन पत्नियां थीं। वर्ष 2010 में बेटी की शादी के दौरान उसे पुलिस सुरक्षा में गांव लाया गया था। उस समय उसने अपराध छोड़ने की बात कही थी।
जेल से रिहा होने के बाद उसने अपने परिवार के माध्यम से राजनीति में भी कदम रखने की कोशिश की। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उसकी पत्नी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली।
125 से अधिक मामलों का था आरोपी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जगन गुर्जर के खिलाफ वर्ष 1994 से लेकर हाल के वर्षों तक कुल 125 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हुए। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, फिरौती, डकैती, रंगदारी, अवैध हथियार और अन्य गंभीर धाराओं के मामले शामिल थे।
मार्च 2026 में भी वह एक मारपीट के मामले में जेल भेजा गया था और उसी दौरान वह अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था।
जेल के भीतर हत्या से उठे सुरक्षा पर सवाल
जगन गुर्जर की हत्या के बाद हाई सिक्योरिटी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिस अपराधी को बाहरी दुनिया से सुरक्षित रखने के लिए विशेष निगरानी में रखा गया था, उसकी जेल के भीतर ही हत्या हो जाना प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
जेल प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हत्या के कारणों, सुरक्षा में हुई चूक और इसमें शामिल अन्य संभावित व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जाएगी।
Chambal के बीहड़ों में कभी आतंक का दूसरा नाम रहे जगन गुर्जर का अंत जेल की चारदीवारी के भीतर हुआ। वर्षों तक तीन राज्यों की पुलिस के लिए चुनौती बने रहे इस कुख्यात दस्यु की कहानी अपराध, आत्मसमर्पण, राजनीति और जेल तक सीमित एक लंबे सफर की गवाह रही। अब उसकी हत्या के बाद एक बार फिर चंबल के पुराने दस्यु इतिहास और जेल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर इतनी बड़ी वारदात कैसे हुई।









































