
📍 जमशेदपुर | श्री सत्यानंद योग केंद्र के तत्वावधान में आज से गुजराती सनातन समाज परिसर में साप्ताहिक योग शिविर की शुरुआत की गई। दीप प्रज्वलन कर इस शिविर का उद्घाटन बिहार स्कूल ऑफ योग के वरिष्ठ सन्यासी स्वामी गोरखनाथ जी एवं श्रीमान रश्मि ठक्कर ने संयुक्त रूप से किया।

🧘 मुख्य योग अभ्यास
शिविर के पहले दिन स्वामी गोरखनाथ जी के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को निम्नलिखित योगासनों का अभ्यास करवाया गया:
- ताड़ासन, त्रियक ताड़ासन
- कटी चक्रासन, चक्की चलन
- नौका संचालन, शशांक आसन
- उष्ट्रासन, मर्जरी आसन
स्वामी जी ने रीड की हड्डी को मानव शरीर की ऊर्जा का मुख्य संवाहक मार्ग बताते हुए कहा कि —
“शरीर में ऊर्जा ‘प्राण’ के रूप में प्रवाहित होती है और रीड की हड्डी को स्वस्थ रखना हर व्यक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है।“
उन्होंने कहा कि उपरोक्त सभी आसनों का नियमबद्ध एवं क्षमता अनुसार अभ्यास, व्यक्ति को तनावमुक्त, स्फूर्तिवान और एकाग्रचित बनाता है।

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🧘♀️ भ्रमरी प्राणायाम का महत्व
शिविर के अंत में स्वामी जी ने भ्रमरी प्राणायाम का अभ्यास करवाया और बताया कि यह अभ्यास:
- बच्चों की चंचलता कम करने
- पढ़ाई में एकाग्रता लाने
- मानसिक तनाव को कम करने में अत्यंत प्रभावी है।
❌ स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति को भ्रमरी प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
💬 योग पर विशेष टिप्पणी
स्वामी जी ने बताया—
“तनाव, चिंता, अनिद्रा आदि का मुख्य कारण शरीर में प्राणशक्ति की कमी है। इसे नियमित योग अभ्यास द्वारा दूर किया जा सकता है, लेकिन हमेशा प्रशिक्षित योग गुरु के मार्गदर्शन में ही अभ्यास करें।“
उन्होंने बिहार योग विद्यालय को विश्व का सबसे प्रसिद्ध योग संस्थान बताया, जिसे प्रधानमंत्री पुरस्कार एवं पद्मश्री सम्मान मिल चुका है।
🙏 सहयोगकर्ताओं का योगदान
इस सफल आयोजन में इन प्रमुख लोगों का विशेष योगदान रहा:
- श्री रश्मि ठक्कर, श्रीमती प्रतिभा सिंह
- श्री लखन ठाकुर, श्री मलाई दे
- श्री अश्वनी शुक्ला, श्री राज शर्मा
- श्री प्रिंस अग्रवाल, श्री आदित्य आदि।












































