नई दिल्ली / ऋषिकेश : भोजपुरी लोक गायकी की जानी-मानी हस्ती देवी के सिंगल मदर बनने की खबर ने न केवल मनोरंजन जगत, बल्कि पूरे समाज में एक नई बहस और जागरूकता की शुरुआत कर दी है। बिना किसी पुरुष साथी और बिना पारंपरिक शारीरिक संबंध के, उन्होंने IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक और स्पर्म डोनेशन के माध्यम से एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में 9 सितंबर 2025 को सी-सेक्शन के ज़रिए उन्होंने अपने बच्चे का दुनिया में स्वागत किया। यह घटना केवल एक चर्चित व्यक्तित्व की निजी खुशी भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का जीवित प्रमाण है कि 21वीं सदी में आधुनिक मेडिकल साइंस (ART – असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी) ने महिलाओं को मातृत्व के चयन में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्रदान की है।
1. मामला क्या है? लोकगायिका देवी का मातृत्व की ओर संघर्षपूर्ण सफर
बिहार के छपरा जिले से ताल्लुक रखने वाली लोकगायिका देवी (जिन्होंने हिंदी, भोजपुरी, मैथिली और मगही में सैकड़ों लोकप्रिय गीत गाए हैं) ने सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए अकेले माँ बनने का निर्णय लिया।
सफर के मुख्य पड़ाव:
- दीर्घकालिक प्रयास: देवी के पिता (प्रो. प्रमोद कुमार) के अनुसार, वे पिछले लगभग 7 से 10 वर्षों से माँ बनने की कोशिश कर रही थीं।
- अनेक असफलताओं के बाद सफलता: इस प्रक्रिया में उन्हें 4 बार IVF में असफलता का सामना करना पड़ा। हालाँकि, अटूट इच्छाशक्ति के बल पर आखिरकार पाँचवीं बार में उन्हें सफलता मिली।
- डोनर स्पर्म का चयन: प्रक्रिया के लिए उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्पर्म बैंक (जर्मनी) से एक अनाम (Anonymous) डोनर का स्पर्म प्राप्त कर IVF तकनीक से गर्भधारण किया।
- एम्स ऋषिकेश में सुरक्षित डिलीवरी: एम्स के डॉक्टरों की निगरानी में उनका प्रसव संपन्न हुआ और जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ रहे।
सोशल मीडिया पर अपने बच्चे की तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने लिखा, “मेरा बाबू… अब मुझे जीवन की सबसे बड़ी खुशी मिल गई है।”
2. बिना पुरुष साथी और संभोग के माँ बनना: विज्ञान कैसे करता है यह चमत्कार?
आम जनमानस में अक्सर यह सवाल उठता है कि बिना पुरुष साथी के या बिना शारीरिक संबंध बनाए कोई महिला गर्भवती कैसे हो सकती है? इसका जवाब असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) में छिपा है।
जब कोई एकल महिला (Single Woman) माँ बनने का फैसला करती है, तो मेडिकल साइंस मुख्य रूप से दो तकनीकों का उपयोग करता है:
(A) IUI (Intrauterine Insemination / इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन)
- प्रक्रिया: इस विधि में रजिस्टर्ड स्पर्म बैंक से प्राप्त योग्य शुक्राणुओं को लैब में धोकर (wash) साफ़ किया जाता है। इसके बाद, महिला के ओव्यूलेशन (अंडे बनने के समय) के दौरान कैथेटर नामक पतली ट्यूब के ज़रिए शुक्राणुओं को सीधे महिला के गर्भाशय (Womb) में डाल दिया जाता है।
- शारीरिक संबंध की आवश्यकता: इस प्रक्रिया में किसी शारीरिक संपर्क की आवश्यकता नहीं होती।
(B) IVF (In Vitro Fertilization / इन विट्रो फर्टिलाइजेशन)
- प्रक्रिया:
- एग रिट्रीवल: महिला को हार्मोनल इंजेक्शन देकर उनके अंडाशय में एक से अधिक अंडे विकसित किए जाते हैं और फिर उन्हें एक छोटी सुई की मदद से बाहर निकाला जाता है।
- लैब फर्टिलाइजेशन: लैब की पेट्री डिश में इन अंडों का मिलान डोनर स्पर्म से कराया जाता है।
- भ्रूण प्रत्यारोपण (Embryo Transfer): 3 से 5 दिनों में जब लैब में भ्रूण (Embryo) बनकर तैयार हो जाता है, तब सबसे स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में रोपित (Implant) कर दिया जाता है।
- भूमिका: यदि भ्रूण गर्भाशय की दीवार से चिपक जाता है, तो महिला सामान्य रूप से गर्भवती हो जाती है।
[स्पर्म बैंक (डोनर)] + [महिला का अंडा (Egg)]
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(लैब में निषेचन - IVF)
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[भ्रूण (Embryo) निर्माण]
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[गर्भाशय में प्रत्यारोपण (Transfer)]
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(9 माह बाद सुरक्षित जन्म)
3. कानून, स्पर्म बैंक और भारत में सिंगल मदरशिप के अधिकार
भारत सरकार का ART Act, 2021 (Assisted Reproductive Technology Regulations Act) और Surrogacy Regulation Act एकल महिलाओं (अविवाहित, तलाकशुदा या विधवा) को प्रजनन तकनीक इस्तेमाल करने का कानूनी अधिकार देता है।
| पहलू | कानूनी एवं प्रक्रियात्मक नियम |
|---|---|
| पात्रता | 21 से 50 वर्ष की कोई भी एकल महिला IVF/IUI तकनीक का उपयोग कर सकती है। |
| गोपनीयता (Anonymity) | स्पर्म डोनर की पहचान गुप्त रखी जाती है। बच्चे या माँ को डोनर की व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी जाती। |
| मेडिकल स्क्रीनिंग | डोनर के स्पर्म का HIV, हेपेटाइटिस, थैलसीमिया और आनुवंशिक बीमारियों के लिए गहन परीक्षण होता है। |
| कानूनी अभिभावक | जन्म प्रमाणपत्र में केवल माँ का नाम दर्ज होता है। बच्चे पर डोनर का कोई कानूनी अधिकार या दावा नहीं होता। |
4. सामाजिक दृष्टिकोण: बदलती सोच और चुनौतियाँ
गायिका देवी का यह कदम भारतीय समाज के उस बदलाव को रेखांकित करता है, जहाँ अब महिलाएँ मातृत्व के लिए केवल पारंपरिक विवाह पर निर्भर नहीं हैं।
सकारात्मक पहलू:
- आत्मनिर्भरता का प्रतीक: यह महिलाओं को यह संदेश देता है कि जैविक घड़ी (Biological Clock) निकलने के डर से जल्दबाज़ी में गलत शादी करने के बजाय, वे स्वतंत्र रूप से माँ बन सकती हैं।
- स्टीरियोटाइप का टूटना: मनोरंजन जगत की हस्तियों द्वारा ऐसे कदम उठाने से आम समाज में IVF और स्पर्म डोनेशन को लेकर बनी भ्रांतियाँ दूर होती हैं।
समाज में मौजूद चुनौतियाँ:
हालाँकि, आज भी समाज का एक वर्ग पारंपरिक पितृसत्तात्मक ढांचे के कारण सिंगल मदर्स पर सवाल उठाता है। लोग अक्सर बच्चे के भविष्य, उसके सामाजिक नाम और “पिता की अनुपस्थिति” पर बहस छिड़ते हैं। लेकिन आधुनिक अध्ययन बताते हैं कि प्यार, सुरक्षा और आर्थिक संबल देने वाली एक अकेली माँ भी बच्चे का सर्वांगीण और स्वस्थ विकास करने में पूरी तरह सक्षम होती है।
भोजपुरी गायिका देवी का निर्णय यह साबित करता है कि आधुनिक दौर में मातृत्व किसी सामाजिक बंधन या शादी के प्रमाण पत्र का मोहताज नहीं है। विज्ञान ने महिलाओं को अपने जीवन और शरीर पर पूर्ण अधिकार चुनने की शक्ति दी है। IVF के ज़रिए देवी का माँ बनना न केवल चिकित्सा जगत की प्रगति को दर्शाता है, बल्कि उन तमाम महिलाओं के लिए उम्मीद की एक किरण है जो किसी भी कारणवश एकल रहते हुए मातृत्व का सुख पाना चाहती हैं।













