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विश्व Breastfeeding सप्ताह 2026 सतत जीवन की मजबूत शुरुआत के लिए स्तनपान को बढ़ावा देने का संदेश टाटा मेन हॉस्पिटल ने शुरू किया जागरूकता अभियान

On: August 1, 2026 4:53 PM
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जमशेदपुर: विश्वभर में 1 से 7 अगस्त तक मनाए जाने वाले विश्व Breastfeeding सप्ताह (World Breastfeeding Week 2026) के अवसर पर टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH), जमशेदपुर ने भी स्तनपान के महत्व को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। इस वर्ष का वैश्विक विषय “Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works” यानी “सतत जीवन की मजबूत शुरुआत के लिए स्तनपान: जो प्रभावी है, उसे और सशक्त बनाएं” रखा गया है।

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इस अवसर पर अस्पताल ने माताओं, परिवारों और समाज को यह संदेश दिया कि स्तनपान केवल शिशु का पहला भोजन नहीं, बल्कि उसके स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। अस्पताल ने पूरे सप्ताह विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, परामर्श सत्र, शिक्षण गतिविधियां और सामुदायिक अभियान आयोजित करने की घोषणा की है।

विश्व Breastfeeding सप्ताह का उद्देश्य

विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य नवजात शिशुओं और माताओं के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में स्तनपान को प्रोत्साहित करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) भी जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने और शिशु को पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध पिलाने की सलाह देते हैं।

टाटा मेन हॉस्पिटल ने इस अवसर पर यह दोहराया कि स्तनपान सबसे सरल, प्रभावी और टिकाऊ उपायों में से एक है, जो मां और बच्चे दोनों के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता है।

Strengthen What Works थीम का विशेष संदेश

इस वर्ष की थीम “Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works” समाज को यह संदेश देती है कि जो उपाय पहले से प्रभावी हैं, उन्हें और मजबूत बनाया जाए। स्तनपान ऐसा ही एक प्राकृतिक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माध्यम है, जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि यदि प्रत्येक नवजात को जीवन की शुरुआत से ही स्तनपान का लाभ मिले तो कुपोषण, संक्रमण और कई गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

पूरे सप्ताह चलेंगे जागरूकता और परामर्श कार्यक्रम

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान टाटा मेन हॉस्पिटल में कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, व्यक्तिगत परामर्श, समूह चर्चा तथा सामुदायिक पहुंच कार्यक्रम शामिल हैं।

इन गतिविधियों का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और नई माताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना, स्तनपान की वैज्ञानिक प्रक्रिया समझाना तथा उन भ्रांतियों को दूर करना है, जो अक्सर माताओं को स्तनपान से दूर कर देती हैं।

अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि सही जानकारी और समय पर सहयोग मिलने से अधिक से अधिक माताएं आत्मविश्वास के साथ स्तनपान करा सकती हैं।

रोल प्ले और मिथक-भंजन सत्र बने आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के उद्घाटन दिवस पर अस्पताल की स्वास्थ्य टीमों ने रोल प्ले (Role Play) और मिथक-भंजन (Myth-Buster) सत्रों का आयोजन किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से स्तनपान से जुड़े कई पुराने और गलत विश्वासों को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर स्पष्ट किया गया।

विशेष रूप से कोलोस्ट्रम (Colostrum) यानी जन्म के बाद निकलने वाले गाढ़े पीले पहले दूध को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास किया गया। कई स्थानों पर आज भी इस पहले दूध को फेंक दिया जाता है, जबकि चिकित्सकों ने इसे पूरी तरह गलत और हानिकारक बताया।

कोलोस्ट्रम नवजात का पहला टीका

अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि कोलोस्ट्रम को अक्सर शिशु का “पहला टीका” या “जादुई अमृत” कहा जाता है। यह एंटीबॉडी, प्रोटीन, विटामिन, खनिज और रोग प्रतिरोधक तत्वों से भरपूर होता है।

कोलोस्ट्रम नवजात को संक्रमणों से बचाने, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने और जीवनभर अच्छे स्वास्थ्य की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अस्पताल ने माताओं और परिवारों से अपील की कि हर नवजात को जन्म के तुरंत बाद यह अमूल्य पहला दूध अवश्य दिया जाए।

Breastfeeding केवल पोषण नहीं, संपूर्ण विकास का आधार

विशेषज्ञों के अनुसार स्तनपान केवल बच्चे की भूख मिटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उसके संपूर्ण शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास की आधारशिला है।

मां का दूध जन्म से लेकर पहले छह महीनों तक शिशु की सभी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मस्तिष्क का बेहतर विकास होता है, स्वस्थ वृद्धि सुनिश्चित होती है और मां-बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध भी मजबूत होता है।

साथ ही स्तनपान माताओं के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद शरीर जल्दी सामान्य स्थिति में लौटता है और कई स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों में भी कमी आती है।

प्रशिक्षित नर्सें दे रही हैं माताओं को विशेष सहयोग

टाटा मेन हॉस्पिटल में विशेष रूप से प्रशिक्षित नर्सों की टीम गर्भावस्था और प्रसव के बाद माताओं को स्तनपान संबंधी व्यापक सहायता प्रदान करती है।

ये नर्सें माताओं को सही स्तनपान तकनीक, शिशु को सही स्थिति में दूध पिलाने की विधि, उचित अटैचमेंट, दूध की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के उपाय तथा स्तनपान के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान के बारे में विस्तार से जानकारी देती हैं।

इसके अलावा वे माताओं की व्यक्तिगत समस्याओं को समझकर उनकी शंकाओं का समाधान करती हैं और उन्हें आत्मविश्वास के साथ स्तनपान जारी रखने के लिए प्रेरित करती हैं।

Breastfeeding को सफल बनाने में सभी की है जिम्मेदारी

अस्पताल ने इस अवसर पर कहा कि सफल स्तनपान केवल मां की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें परिवार, स्वास्थ्यकर्मी, कार्यस्थल, नियोक्ता और पूरे समाज की समान भागीदारी आवश्यक है।

यदि परिवार और समाज सहयोगात्मक वातावरण प्रदान करें तो माताएं बिना किसी झिझक के अपने शिशु को स्तनपान करा सकती हैं और आने वाली चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकती हैं।

स्वस्थ भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान

विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 के अवसर पर टाटा मेन हॉस्पिटल ने स्वास्थ्यकर्मियों, परिवारों और समाज के सभी वर्गों से स्तनपान को बढ़ावा देने की अपील की है। अस्पताल ने लोगों से आग्रह किया कि वे भ्रांतियों को दूर करें, हर मां का सहयोग करें और ऐसा वातावरण तैयार करें जहां प्रत्येक नवजात को मां के दूध का अधिकार मिल सके।

अस्पताल का संदेश स्पष्ट है—“हर मां सहयोग की हकदार है, हर बच्चे को मां के दूध का अमूल्य उपहार मिलना चाहिए।” यही प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ, सुरक्षित और मजबूत भविष्य की नींव रखेगा।

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