नई दिल्ली । केंद्र सरकार आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के बीच समन्वय स्थापित कर देश में एक समग्र और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि आयुष मंत्रालय ने विभिन्न संस्थागत, शैक्षणिक, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा आधारित पहलों के माध्यम से आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ जोड़ने की व्यापक रणनीति लागू की है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आयुर्वेद को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि उसे वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक चिकित्सा पद्धति और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ प्रभावी रूप से एकीकृत करना भी है, ताकि लोगों को समग्र स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
डीजीएचएस में स्थापित हुआ आयुष वर्टिकल
सरकार ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और आयुष मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत एक समर्पित आयुष वर्टिकल स्थापित किया है। यह इकाई सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की योजना, निगरानी और संचालन के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा, क्षमता निर्माण तथा स्वास्थ्य सेवाओं में आयुष के समावेशन के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है।
तैयार किए गए साक्ष्य आधारित उपचार दिशानिर्देश
आयुष वर्टिकल ने आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए साक्ष्य आधारित मानक उपचार दिशानिर्देश (Standard Treatment Guidelines – STG) विकसित किए हैं।
इन दिशानिर्देशों में छह सामान्य मस्कुलोस्केलेटल (हड्डी एवं मांसपेशी) रोगों तथा पांच चयापचय (Metabolic) संबंधी बीमारियों के उपचार संबंधी वैज्ञानिक प्रोटोकॉल शामिल किए गए हैं। इनके आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर मास्टर ट्रेनर कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में चरणबद्ध प्रशिक्षण भी संचालित किया गया।
केंद्र सरकार के अस्पतालों में एकीकृत आयुष विभाग
सरकार ने दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल तथा लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एकीकृत आयुष विभाग स्थापित किए हैं। इन विभागों में पंचकर्म सहित निवारक, उपचारात्मक और स्वास्थ्य संवर्धन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके अतिरिक्त, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल सहित कई प्रमुख संस्थानों में आयुष अनुसंधान परिषदों द्वारा विस्तारित आयुष ओपीडी सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं।
आयुष संस्थानों के लिए भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक
आयुष मंत्रालय ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों तथा आयुष अस्पतालों के लिए भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (IPHS-2024) भी विकसित किए हैं।
इन मानकों का उद्देश्य अस्पतालों के बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन, दवाओं की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को एक समान बनाना है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में आयुष सेवाओं का प्रभावी एकीकरण सुनिश्चित हो सके।
लू और मंकीपॉक्स पर जारी किए गए आयुष परामर्श
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के सहयोग से आयुष मंत्रालय ने लू (Heat Wave) और मंकीपॉक्स जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों पर आयुष आधारित परामर्श भी जारी किए हैं। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य तैयारियों और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र में आयुष की भूमिका को मजबूत करना है।

450 से अधिक आयुष कॉलेजों में तंबाकू निषेध केंद्र
राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत आयुष वर्टिकल ने वर्ष 2025 में तंबाकू निषेध केंद्र (Tobacco Cessation Centre – TCC) स्थापित करने के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए।
इन दिशा-निर्देशों के आधार पर देशभर के 450 से अधिक आयुष महाविद्यालयों में तंबाकू निषेध केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जहां आयुष आधारित उपचार एवं परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जिला अस्पतालों और पीएचसी में आयुष सुविधाओं का विस्तार
सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तथा जिला अस्पतालों में आयुष सेवाओं के सह-स्थापन की नीति अपनाई है।
इस व्यवस्था के तहत मरीजों को एक ही परिसर में एलोपैथी, आयुर्वेद तथा अन्य चिकित्सा पद्धतियों में से अपनी आवश्यकता के अनुसार उपचार चुनने का अवसर मिलता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण किया जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत बुनियादी ढांचे, उपकरण एवं औषधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
एमबीबीएस छात्रों को मिलेगा आयुष का प्रशिक्षण
भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने एमबीबीएस इंटर्नशिप इलेक्टिव मॉड्यूल तैयार किया है, जिसके माध्यम से मेडिकल छात्रों को आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा प्रणालियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके साथ ही आयुर्वेद स्नातक शिक्षा के पाठ्यक्रम में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की नवीनतम प्रगति को 40 प्रतिशत तक शामिल करने का भी प्रावधान किया गया है।
अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा
आयुष मंत्रालय वर्ष 2021-22 से “आयुर्ज्ञान” योजना संचालित कर रहा है।
इस योजना के अंतर्गत क्षमता निर्माण, सतत चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार तथा Ayurveda Biology Integrated Health Research (ABIHR) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा के समन्वय पर उच्च स्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है।
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों को मिली सहायता
आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए आयुष मंत्रालय ने देश के नौ प्रतिष्ठित संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान की है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई
- केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ
- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली
- भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु
- एम्स, नई दिल्ली का सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहांस), बेंगलुरु
- यकृत एवं पित्त संबंधी विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस), नई दिल्ली
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), जोधपुर
इन संस्थानों में चल रही परियोजनाओं का उद्देश्य आयुर्वेद की वैज्ञानिक प्रभावशीलता को प्रमाणित करना तथा उसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाना है।
आयुर्वेद दिवस के माध्यम से जनजागरूकता
आयुष मंत्रालय प्रत्येक वर्ष आयुर्वेद दिवस मनाता है। वर्ष 2025 में आयोजित 10वां आयुर्वेद दिवस “मानव और धरती के लिए आयुर्वेद” विषय पर केंद्रित था।
इस अवसर पर देशभर में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, आयुर्वेदिक परामर्श, दवा वितरण, महिला एवं बाल स्वास्थ्य शिविर, वृद्धजन स्वास्थ्य कार्यक्रम, गैर-संचारी रोगों पर विशेष अभियान, ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क कार्यक्रम, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां और विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए।
गोवा स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान कई नई परियोजनाओं और स्वास्थ्य पहलों का शुभारंभ भी किया गया।

महाराष्ट्र में भी व्यापक स्तर पर आयोजन
महाराष्ट्र में आयुर्वेद दिवस से संबंधित गतिविधियों का संचालन राज्य आयुष प्रकोष्ठ के माध्यम से किया जाता है। राज्य के सभी आयुष महाविद्यालयों, जिला अस्पतालों, महिला अस्पतालों, ग्रामीण अस्पतालों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सह-स्थापित आयुष इकाइयों के माध्यम से स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता अभियान और चिकित्सा सेवाएं संचालित की जाती हैं।
समग्र स्वास्थ्य प्रणाली की ओर बढ़ता भारत
आयुष मंत्रालय की इन बहुआयामी पहलों से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार आयुर्वेद को केवल पारंपरिक चिकित्सा तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक चिकित्सा शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ जोड़कर एक समग्र, सुलभ और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे भविष्य में मरीजों को बेहतर उपचार विकल्प उपलब्ध होने के साथ-साथ भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
आयुर्स्वास्थ्य योजना के उत्कृष्टता केंद्र घटक के अंतर्गत आयुष मंत्रालय द्वारा समर्थित परियोजनाओं का विवरण
| क्र.सं. | संगठन का नाम | राज्य | परियोजना का नाम |
| 1 | टाटा स्मारक केंद्र (टीएमसी), मुंबई | महाराष्ट्र | कैंसर उपचार हेतु आयुष औषधियों की खोज एवं विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र |
| 2 | केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ | उत्तर प्रदेश | केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई) में आयुर्वेद के मौलिक एवं अनुवादात्मक अनुसंधान के लिए उत्कृष्टता केंद्र। |
| 3 | जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली | दिल्ली | आयुर्वेद एवं पद्धति चिकित्सा पर कार्यात्मक-आधारित उत्कृष्टता केंद्र |
| 4 | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली | दिल्ली | उन्नत तकनीकी समाधानों, स्टार्टअप सहयोग एवं रसौषधियों के लिए नेट-जीरो सतत् समाधान हेतु सतत् आयुष उत्कृष्टता केंद्र |
| 5 | भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु | कर्नाटक | मधुमेह एवं चयापचय संबंधी विकारों के लिए उत्कृष्टता केंद्र |
| 6 | एकीकृत चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र (सीआईएमआर), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस), नई दिल्ली | दिल्ली | योग एवं आयुर्वेद के लिए उत्कृष्टता केंद्र |
| 7 | राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (एनआईएमएएनएचएस), बेंगलुरु | कर्नाटक | आयुष अनुसंधान में उत्कृष्टता केंद्र |
| 8 | यकृत एवं पित्त संबंधी विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस) | दिल्ली | स्वस्थ एवं रोगग्रस्त यकृत पर भारतीय खाद्य पदार्थों एवं आयुर्वेदिक औषधियों के प्रभाव |
| 9 | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), जोधपुर | राजस्थान | एकीकृत सटीक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के लिए आयुर्टेक में उत्कृष्टता केंद्र |
आयुष मंत्रालय द्वारा अपनी अनुसंधान परिषदों एवं राष्ट्रीय संस्थानों के माध्यम से की गई पहलों का विवरण
| क्र. सं. | अनुसंधान परिषद्/ राष्ट्रीय संस्थान | पहल का विवरण |
| 1 | केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) | केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) ने आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ एकीकृत करने के लाभों एवं व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए विभिन्न अनुसंधान अध्ययन किए हैं। इनमें तृतीयक देखभाल अस्पताल (सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली) में ऑस्टियोआर्थराइटिस (घुटने) के प्रबंधन हेतु आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ आयुर्वेद के एकीकरण की व्यवहार्यता का अध्ययन, हिमाचल प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में राष्ट्रीय प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में आयुर्वेद को शामिल करने की व्यवहार्यता का अध्ययन, कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीडीसीएस) में आयुष प्रणालियों के एकीकरण पर अध्ययन तथा महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के चयनित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (आरसीएच) सेवाओं के अंतर्गत प्रसव-पूर्व देखभाल (गर्भिणी परिचर्या) के लिए आयुर्वेदिक उपचार की प्रभावशीलता एवं व्यवहार्यता पर बहु-केंद्रित परिचालन अध्ययन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर) और आयुष मंत्रालय के बीच समन्वित स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु संपन्न समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत गैर-गर्भवती महिलाओं में लौह-अल्पता जनित एनीमिया पर समुदाय-आधारित नैदानिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अतिरिक्त, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर) तथा आयुष मंत्रालय ने संयुक्त रूप से केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) के माध्यम से चयनित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (एम्स दिल्ली, एम्स जोधपुर, एम्स नागपुर एवं एम्स ऋषिकेश) में आयुष–आईसीएमआर समन्वित स्वास्थ्य अनुसंधान उन्नत केंद्र (एआई-एसीआईएचआर) की स्थापना के लिए पहल की है। इन केंद्रों का उद्देश्य प्राथमिकता वाले रोग क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक साक्ष्य विकसित करना तथा समन्वित स्वास्थ्य देखभाल के सुदृढ़ मॉडल तैयार करना है। इन केंद्रों में ऑस्टियोआर्थराइटिस, हल्के संज्ञानात्मक विकार, दीर्घकालिक अवरोधक फेफड़ा रोग (सीओपीडी) एवं न्यूमोकोनियोसिस में फुफ्फुसीय पुनर्वास, असामान्य योनि स्राव, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, गर्भकालीन मधुमेह, चयापचय संबंधी विकार-जनित स्टियाटोटिक यकृत रोग (एमएएसएलडी), अग्न्याशय-पित्त संबंधी रोग, क्रोहन रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस, गैस्ट्रो-इसोफेजियल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी), मुख के पूर्व-कैंसरकारी घाव, सिर एवं गर्दन का स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा तथा सार्कोपीनिया पर अनुसंधान अध्ययन किए जा रहे हैं। |
| 2 | अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) | अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली में 200 बिस्तरों वाला तृतीयक देखभाल अस्पताल है, जिसमें कार्यात्मक आईसीयू की सुविधा उपलब्ध है। यह संस्थान एक मॉडल समन्वित स्वास्थ्य देखभाल केंद्र के रूप में कार्य करता है, जहाँ विभिन्न नैदानिक एवं अर्ध-नैदानिक विभागों में आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों के सहयोग से आयुर्वेद सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। संस्थान ने एकीकृत ऑन्कोलॉजी, छाती रोग, चयापचय संबंधी रोग, जीवनशैली संबंधी रोग, रूमेटोलॉजी तथा त्वचा रोग चिकित्सालय स्थापित किए हैं। समन्वित स्वास्थ्य सेवाएँ नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के समन्वित चिकित्सा सेवा इकाई, समन्वित चिकित्सा सेवा इकाई एम्स झज्जर और राष्ट्रीय कैंसर संस्थान–एम्स, झज्जर में समन्वित ऑन्कोलॉजी केंद्र में स्थापित सैटेलाइट क्लिनिकल सेवा इकाइयों के माध्यम से भी प्रदान की जा रही हैं। संस्थान में आयुर्वेद के वैश्विक प्रचार एवं अनुसंधान के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग केंद्र भी स्थापित किया गया है। वर्तमान में संस्थान लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन, एफआईजेड जर्मनी, रोसेनबर्ग यूरोपियन एकेडमी ऑफ आयुर्वेद, सीएबीएसआईएन एवं फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ रियो डी जनेरियो (यूएफआरजे), ब्राजील तथा यूनिवर्सिटी हेल्थ नेटवर्क और कनाडा इंडिया फाउंडेशन, कनाडा के सहयोग से समन्वित अनुसंधान कार्य कर रहा है। |
| 3 | राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) | राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) ने आयुर्वेद के अभ्यास एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए छह अंतर्विषयक विभाग स्थापित किए हैं, जिनमें आयुर्वेदिक एवं आधुनिक वैज्ञानिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों की विशेषज्ञता को शामिल किया गया है। इन विभागों का उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सकों और समकालीन वैज्ञानिकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना तथा ऐसे नवाचारात्मक दृष्टिकोणों को प्रोत्साहित करना है, जो प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ समन्वित करते हैं। एनआईए ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) के सहयोग से द्वैध पीएच.डी. डिग्री कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। यह पहल ऐसे अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा देती है, जो सख्त वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन करते हुए पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर बल देते हैं तथा साथ ही प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) के मूलभूत सिद्धांतों का सम्मान एवं संरक्षण सुनिश्चित करते हैं।इसके अतिरिक्त, संस्थान सहयोगात्मक नैदानिक सेवाओं एवं साक्ष्य-आधारित अनुसंधान के माध्यम से आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ एकीकृत करने को बढ़ावा देता है। यह केंद्रीय अस्पताल, उत्तर पश्चिम रेलवे (एनडब्ल्यूआर), जयपुर में एक समन्वित आयुर्वेद ओपीडी संचालित करता है। एनआईए, टाटा स्मारक केंद्र, मुंबई के सहयोग से नॉन-स्मॉल सेल लंग कार्सिनोमा (एनएससीएलसी) तथा सवाई मानसिंह चिकित्सा महाविद्यालय (एसएमएस), जयपुर के सहयोग से नॉन-प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (एनपीडीआर) एवं आंख के अगले हिस्से आइरिस तथा सिलियरी बॉडी (एंटीरियर यूवाइटिस) पर संयुक्त अनुसंधान कार्य भी कर रहा है। |
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा में आयोजित 10वें आयुर्वेद दिवस के मुख्य कार्यक्रम के दौरान उद्घाटन/शुभारंभ की गई परियोजनाओं/पहलों का विवरण
1. सुविधाओं का उद्घाटन
- अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा में एकीकृत ऑन्कोलॉजी इकाई का उद्घाटन।
- अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा में केंद्रीय स्टेराइल आपूर्ति विभाग (सीएसएसडी) इकाई का उद्घाटन।
- अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा में रक्त भंडारण इकाई का उद्घाटन।
- अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा में अस्पताल लिनेन प्रसंस्करण एवं देखभाल इकाई का उद्घाटन।
2. लोकार्पण
- पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक कार्यालय (सीजीपीडीटीएम) द्वारा आयुष संबंधी उपचारों के परीक्षण हेतु दिशानिर्देश।
- देशव्यापी अभियान –“देश का स्वास्थ्य परीक्षण” का शुभारंभ, जिसका उद्देश्य व्यक्तियों की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करना है।
- वेबसाइट – “आयुर्वेद को रूपांतरित करने वाले प्रशंसनीय व्यक्तित्व (एपीटीए)” का शुभारंभ, जिसे केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) द्वारा आयुर्वेद के क्षेत्र में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों के सम्मान में तैयार किया गया है।
- वेब-आधारित पोर्टल – “आयुष पदार्थों के बहुआयामी मानदंड के लिए डिजिटाइज्ड रिट्रीवल एप्लीकेशन (द्रव्य)” का शुभारंभ, जिसे केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) द्वारा विकसित किया गया है।



















