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जमशेदपुर में गहराया गैस संकट: साकची में बंद मिली एजेंसी, दर-दर भटकने को मजबूर हुए सैकड़ों परिवार।

On: March 31, 2026 1:48 PM
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  • जमशेदपुर में हाहाकार: लक्ष्मी गैस एजेंसी पर लटका ताला, 4 दिनों से भटक रहे उपभोक्ता; युद्ध के बहाने जनता का ‘खून चूसने’ का खेल!
  • गैस किल्लत से ‘त्राहिमाम’: साकची-बाराद्वारी में रसोई का चूल्हा बुझा, हेल्पलाइन नंबर निकले फर्जी; जनता बेहाल!
  • युद्ध विदेश में, आफत जमशेदपुर में! लक्ष्मी गैस एजेंसी की मनमानी से भड़की जनता, बंद शटर और फर्जी नंबरों ने बढ़ाई मुसीबत।

जमशेदपुर के साकची और बाराद्वारी क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पेट्रोलियम विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरान, अमेरिका और इस्रायल के बीच चल रहे युद्ध की आहट अब जमशेदपुर के आम नागरिकों की रसोई तक पहुंच गई है। साकची और बाराद्वारी इलाके में संचालित लक्ष्मी गैस एजेंसी के अचानक बंद होने से हजारों उपभोक्ताओं के सामने एलपीजी सिलेंडर का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

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बंद शटर और मायूस चेहरे: घंटों इंतजार को मजबूर लोग

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लक्ष्मी गैस एजेंसी के बाहर इन दिनों सन्नाटा पसरा है, लेकिन उसके शटर पर लटके ताले के सामने सैकड़ों लोग उम्मीद लगाए खड़े रहते हैं। लोगों का कहना है कि वे इस भीषण गर्मी में घंटों इस आशा में खड़े रहते हैं कि शायद अब एजेंसी खुलेगी और उन्हें खाना पकाने के लिए गैस मिल सकेगी। विडंबना यह है कि घंटों के लंबे इंतजार के बाद भी एजेंसी का शटर नहीं उठता और लोग मायूस होकर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले चार दिनों से लगातार एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। घर में रसोई गैस खत्म हो चुकी है और बच्चों के लिए खाना बनाना तक दूभर हो गया है। कई घरों में चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है, लेकिन एजेंसी संचालकों को जनता के इस दर्द से कोई सरोकार नजर नहीं आ रहा।

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वैकल्पिक नंबरों का ‘मायाजाल’: एक व्यस्त, बाकी बंद

जब उपभोक्ताओं ने एजेंसी के बाहर चिपकाए गए नोटिस को देखा, तो वहां मित्तल गैस एजेंसी के कुछ वैकल्पिक फोन नंबर लिखे पाए गए। 0657 2306622 / 0657 2311700 / 0657 2311555

उपभोक्ताओं को लगा कि शायद यहां से राहत मिल जाएगी, लेकिन यह उम्मीद भी जल्द ही छलावा साबित हुई।

पीड़ित लोगों ने जब उन नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका अनुभव बेहद निराशाजनक रहा:

  • दिए गए नंबरों में से एक नंबर लगातार ‘बिजी’ (व्यस्त) बता रहा है।
  • अन्य दो नंबर डायल करने पर ‘नॉट एक्जिस्ट’ (अस्तित्व में नहीं है) की टोन सुनाई दे रही है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब संकट की घड़ी में ये नंबर काम ही नहीं कर रहे, तो इन्हें सार्वजनिक रूप से चस्पा करने का क्या औचित्य है? क्या यह सिर्फ जनता को गुमराह करने और अपना पल्ला झाड़ने की एक कोशिश है?

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सरकारी वेबसाइट का भी बुरा हाल: शिकायत करें तो कहां?

स्थानीय स्तर पर जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो कुछ जागरूक उपभोक्ताओं ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP) की आधिकारिक वेबसाइट https://www.hindustanpetroleum.com/contactus पर जाकर सीधे कंपनी से शिकायत करने की सोची। लेकिन यहां जो हकीकत सामने आई, उसने डिजिटल इंडिया और उपभोक्ता सहायता के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलकर रख दी।

वेबसाइट पर दिए गए तीनों हेल्पलाइन नंबर पूरी तरह से बंद या अमान्य (‘नॉट एक्जिस्ट’) बता रहे हैं।

ये रहें वे नंबर: +91 2222863900 / +919297777495 / +912222008243 / 02222008243 / 02222863900

उपभोक्ताओं का कहना है कि जब देश की इतनी बड़ी सरकारी नवरत्न कंपनी के आधिकारिक संपर्क सूत्र ही फेल हैं, तो स्थानीय स्तर पर कालाबाजारी करने वाले और मनमानी करने वाले प्राइवेट वेंडर्स पर नकेल कौन कसेगा? लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब सरकारी व्यवस्था का यह हाल है, तो स्थानीय प्राइवेट एजेंसियां तो आम जनता का खून चूसेंगी ही।

सरकार और जिला प्रशासन से गुहार

एक तरफ जहां वैश्विक युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने की बातें कही जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर कुप्रबंधन ने आग में घी डालने का काम किया है। जमशेदपुर के जागरूक नागरिकों ने झारखंड सरकार, खाद्य आपूर्ति विभाग और पूर्वी सिंहभूम के जिला प्रशासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि रसोई गैस जैसी अनिवार्य वस्तु के लिए इस तरह की किल्लत बर्दाश्त से बाहर है। प्रशासन को तुरंत लक्ष्मी गैस एजेंसी के प्रबंधन से जवाब तलब करना चाहिए और क्षेत्र में सुचारू रूप से गैस वितरण सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो आक्रोशित जनता सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएगी।

गैस संकट के बीच कालाबाजारी का खेल: आपदा में ‘अवसर’ तलाश रहे मुनाफाखोर

जमशेदपुर के साकची और बाराद्वारी इलाके में चल रहे गैस संकट के बीच अब एक और बेहद चौंकाने वाली और विचलित करने वाली जानकारी सामने आ रही है। स्थानीय सूत्रों और पीड़ित उपभोक्ताओं के अनुसार, जहां एक तरफ आम और ईमानदार नागरिक रसोई गैस के लिए दर-दर भटक रहे हैं और घंटों बंद शटर के बाहर धूप में खड़े रहने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे गैस सिलेंडरों की धड़ल्ले से कालाबाजारी (Black Marketing) की जा रही है।

आपदा को अवसर में बदलने वाले कुछ मुनाफाखोर और बिचौलिए इस त्राहिमाम की स्थिति का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। आरोप है कि जो सिलेंडर आम जनता को उनके हक के सरकारी रेट पर मिलने चाहिए, उन्हें ही पिछले दरवाजे से दोगुने और तिगुने दामों पर जरूरतमंदों को बेचा जा रहा है। आम आदमी, जिसके घर का चूल्हा पिछले चार दिनों से बंद है और बच्चों के सामने भूखे रहने की नौबत आ गई है, वह मजबूरी में अपनी गाढ़ी कमाई इन कालाबाजारियों की जेब में डालने को विवश है।

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अंतर्राष्ट्रीय युद्ध और सप्लाई चेन में रुकावट का बहाना बनाकर स्थानीय स्तर पर कृत्रिम किल्लत (Artificial Scarcity) पैदा की जा रही है, ताकि सिलेंडरों को ब्लैक में खपाया जा सके। एजेंसी के बाहर चिपकाए गए फर्जी और बंद नंबर इस शक को और गहरा करते हैं कि यह पूरी अव्यवस्था कहीं न कहीं सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।

यह सीधे तौर पर आम जनता का आर्थिक और मानसिक शोषण है। जब देश की एक बड़ी आबादी पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, तब इस तरह की अवैध वसूली सीधे तौर पर लोगों की जेब पर डकैती डालने जैसा है। इस गंभीर खुलासे के बाद अब जिला प्रशासन, खाद्य आपूर्ति विभाग और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। सरकार को चाहिए कि वह तुरंत अपनी स्पेशल विजिलेंस टीम या टास्क फोर्स को सक्रिय करे। इन संदिग्ध इलाकों और गैस गोडाउन पर अचानक छापेमारी की जाए, ताकि गैस की कालाबाजारी करने वाले इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो सके और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके। जनता को अब खोखले आश्वासनों की नहीं, बल्कि सख्त और ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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