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10 लाख के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम समेत 4 Naxal ने किया आत्मसमर्पण

On: August 11, 2026 5:30 PM
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चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम पुलिस को Naxal विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार, 11 अगस्त को ऑपरेशन नवजीवन-III’ के तहत भाकपा (माओवादी) संगठन के 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम समेत कुल चार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

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आत्मसमर्पण का कार्यक्रम पुलिस उप-महानिरीक्षक (कोल्हान क्षेत्र) एवं पुलिस उप-महानिरीक्षक, सीआरपीएफ रेंज चाईबासा की उपस्थिति में आयोजित किया गया। पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली लंबे समय से कोल्हान, पोड़ाहाट और सारंडा के जंगल एवं पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय थे।

10 लाख के इनामी जोनल कमांडर ने छोड़ा नक्सल संगठन

आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम सालुका कायम का है, जिस पर पुलिस की ओर से 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह भाकपा (माओवादी) संगठन में जोनल कमांडर के पद पर सक्रिय था।

पुलिस के अनुसार, सालुका कायम लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से जुड़ा हुआ था और पश्चिमी सिंहभूम के जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में संगठन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।

उसके आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

एक जोनल कमेटी सदस्य और तीन दस्ता सदस्य भी शामिल

पुलिस के मुताबिक, सालुका कायम के अलावा आत्मसमर्पण करने वाले अन्य तीन नक्सलियों में एक जोनल कमेटी सदस्य और तीन दस्ता सदस्य शामिल हैं।

ये सभी नक्सली कोल्हान, पोड़ाहाट एवं सारंडा के जंगल-पहाड़ी इलाकों में सक्रिय बताए गए हैं। इन क्षेत्रों में लंबे समय से सुरक्षा बलों और नक्सली संगठनों के बीच अभियान चलता रहा है।

चारों के आत्मसमर्पण से संगठन की गतिविधियों को बड़ा झटका लगने की बात पुलिस अधिकारियों ने कही है।

आत्मसमर्पण के दौरान हथियार और कारतूस बरामद

पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पास से कई हथियार और अन्य सामान बरामद किए गए हैं।

बरामद सामान में:

  • एक AK-47 रायफल
  • एक इंसास रायफल
  • वायरलेस सेट
  • मैगजीन
  • बड़ी मात्रा में कारतूस

शामिल हैं।

सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों और अन्य सामान की जांच कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किन-किन नक्सली गतिविधियों में किया गया था।

ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत आत्मसमर्पण

पश्चिमी सिंहभूम में नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापस लाने के लिए आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

इसी अभियान के तहत ऑपरेशन ‘नवजीवन-III’ में चार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। पुलिस के अनुसार लगातार चलाए जा रहे संयुक्त अभियान के साथ-साथ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का भी नक्सलियों पर प्रभाव पड़ रहा है।

पुलिस का कहना है कि जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें सरकार की निर्धारित पुनर्वास नीति का लाभ दिया जाएगा।

वर्ष 2025 से अब तक 49 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 से जुलाई 2026 तक पश्चिमी सिंहभूम जिले में कुल 49 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

यह आंकड़ा क्षेत्र में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान और आत्मसमर्पण नीति के प्रभाव को दर्शाता है। पुलिस लगातार नक्सली संगठन से जुड़े लोगों को हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।

अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

सुरक्षा बलों के अभियान में 22 नक्सली मारे गए

पुलिस के अनुसार, इसी अवधि में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए विभिन्न अभियानों के दौरान 22 नक्सली मारे गए हैं।

सुरक्षा बलों ने जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाकर नक्सली गतिविधियों पर दबाव बनाने का प्रयास किया है। पुलिस और सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियान के कारण नक्सली संगठन की गतिविधियों पर प्रभाव पड़ने का दावा किया गया है।

60 नक्सलियों को किया गया गिरफ्तार

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 से जुलाई 2026 तक पश्चिमी सिंहभूम में अभियान के दौरान 60 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि नक्सल विरोधी अभियान के दौरान गिरफ्तारी, हथियारों की बरामदगी और आत्मसमर्पण की कार्रवाई लगातार जारी है।

संयुक्त अभियानों का बढ़ा दबाव

पुलिस अधिकारियों के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम के जंगलों में लगातार चलाए जा रहे संयुक्त अभियानों के कारण नक्सली संगठनों पर दबाव बढ़ा है।

कोल्हान, पोड़ाहाट और सारंडा क्षेत्र में सुरक्षा बलों की गतिविधियां बढ़ाई गई हैं। जंगल-पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा अभियान चलाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर लोगों से संपर्क भी स्थापित किया जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के कारण कई नक्सली अब संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का विकल्प चुन रहे हैं।

संगठन के अंदरूनी शोषण का भी दावा

पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के अनुसार संगठन के अंदरूनी शोषण और परेशानियों ने भी उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रभावित किया।

इसके अलावा सुरक्षा बलों का बढ़ता दबाव और नक्सली संगठन में बदलती परिस्थितियां भी आत्मसमर्पण का कारण बताई जा रही हैं।

पुलिस के मुताबिक सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय ले रहे हैं।

सामुदायिक पुलिसिंग का सकारात्मक प्रभाव

पुलिस ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के बीच विश्वास बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

चक्रधरपुर एसडीपीओ डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी की ओर से सामुदायिक पुलिसिंग के तहत किए गए प्रयासों और ग्रामीण क्षेत्रों में चलाए गए जनसंपर्क कार्यक्रमों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है।

पुलिस का उद्देश्य ग्रामीणों के साथ बेहतर संबंध स्थापित करना और उन्हें नक्सली गतिविधियों से दूर रहने के लिए जागरूक करना है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान जारी

पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से ग्रामीण इलाकों में जनसंपर्क कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं को समझने और सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केवल सुरक्षा अभियान ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों के साथ बेहतर संवाद भी जरूरी है।

इसी उद्देश्य से सामुदायिक पुलिसिंग को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

सारंडा और पोड़ाहाट में अभियान रहेगा जारी

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सारंडा और पोड़ाहाट क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान आगे भी जारी रहेगा।

सुरक्षा बलों की ओर से जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में अभियान चलाकर नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश की जाएगी। साथ ही, संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।

आत्मसमर्पण करने वालों को मिलेगा पुनर्वास नीति का लाभ

पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को झारखंड सरकार की निर्धारित आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिया जाएगा।

इस नीति का उद्देश्य नक्सली संगठन में शामिल लोगों को हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने के लिए प्रोत्साहित करना है। आत्मसमर्पण करने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए सरकार की ओर से निर्धारित प्रावधानों के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

Naxal संगठन को बड़ा झटका

10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर के आत्मसमर्पण समेत चार नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने को पश्चिमी सिंहभूम पुलिस के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

एक जोनल कमांडर और जोनल कमेटी स्तर के सदस्य के आत्मसमर्पण से संगठन की स्थानीय गतिविधियों और नेटवर्क पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

हथियारों की बरामदगी भी सुरक्षा बलों के लिए अहम मानी जा रही है।

पश्चिमी सिंहभूम में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। ऑपरेशन ‘नवजीवन-III’ के तहत 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम समेत चार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।

पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में एक जोनल कमेटी सदस्य और तीन दस्ता सदस्य शामिल हैं। इनके पास से AK-47, इंसास रायफल, वायरलेस सेट, मैगजीन और बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं।

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 से जुलाई 2026 तक पश्चिमी सिंहभूम में 49 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण, 22 नक्सली मारे गए और 60 गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस ने कहा है कि सारंडा और पोड़ाहाट क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान जारी रहेगा और आत्मसमर्पण करने वालों को सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ दिया जाएगा।

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