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Dalsa की ओर से वाहन दुर्घटना दावा पर जिलास्तरीय कार्यशाला का आयोजन

On: April 19, 2026 7:33 AM
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जमशेदपुर: Dalsa ने महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की। वाहन दुर्घटना दावा (एमएसीटी) पर फोकस करते हुए पुलिस अधिकारियों को 60 दिनों में जांच रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया। यह आयोजन मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम के प्रावधानों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Dalsa कार्यशाला का आयोजन और उद्देश्य

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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (Dalsa ) ने शनिवार को लोक अदालत हॉल में वाहन दुर्घटना दावा पर जिलास्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। जिले के थानों से अधिकृत पुलिस पदाधिकारी, एलएडीसी और पीएलवी उपस्थित रहे। उद्देश्य था दुर्घटना के बाद त्वरित जांच और मुआवजा प्रक्रिया सुनिश्चित करना।

कार्यशाला में एमएसीटी के स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीशों ने पुलिस को प्रपत्र भरने और रिपोर्ट जमा करने की ट्रेनिंग दी। इससे पीड़ित परिवारों को जल्द न्याय मिलेगा। यह झारखंड जैसे राज्य में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देगी।

मुख्य अतिथि और वक्ता

मुख्य अतिथि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-1 सह एमएसीटी स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश कनकन पट्टदार थे। विशिष्ट अतिथियों में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-2 आनंद मणि त्रिपाठी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-3 नीति कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-4 नमिता चंद्रा शामिल हुए।

Dalsa सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी, अधिवक्ता सतेन्द्र कुमार सिंह और सुनील कुमार स्वाईं भी मौजूद रहे। वक्ताओं ने बीएनएस (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के प्रावधानों पर प्रकाश डाला। दीप प्रज्वलन और नालसा गान से शुभारंभ हुआ।

Dalsa वाहन दुर्घटना दावा प्रक्रिया

कार्यशाला में बताया गया कि दुर्घटना के बाद जांच प्रक्रिया का सख्ती से पालन अनिवार्य है। अलग-अलग प्रपत्र भरना जरूरी, जैसे प्रारूप-1। एक्सीडेंट इंफोर्मेशन रिपोर्ट (एआईआर) की कॉपी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को जमा करनी होगी।

सक्षम कोर्ट और Dalsa को भी प्रति देनी है। इससे मुआवजा का त्वरित निष्पादन संभव। जांच अधिकारी 60 दिनों में फाइनल रिपोर्ट सौंपें। यह प्रावधान पीड़ितों के हित में है।

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60 दिनों की समय सीमा का महत्व

दुर्घटना के 48 घंटे में प्रारंभिक रिपोर्ट और 60 दिनों में विस्तृत रिपोर्ट जमा अनिवार्य। इससे केस में देरी नहीं होगी। बीमा कंपनी, वाहन मालिक और चालक की जिम्मेदारी तय होगी। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन।

एमएसीटी क्या है?

मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) वाहन दुर्घटना में घायल या मृतक के परिवार को मुआवजा दिलाता है। चालक, मालिक या बीमा कंपनी के खिलाफ दावा किया जा सकता। डालसा गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता देती।

झारखंड में लोक अदालतों से एमएसीटी केस तेजी से निपटाए जाते। कार्यशाला ने पुलिस को जागरूक किया।

प्रपत्र और रिपोर्ट के प्रकार

  • प्रारूप-1: प्रथम दुर्घटना रिपोर्ट (48 घंटे में)।
  • डीएआर: विस्तृत रिपोर्ट (60 दिनों में)।
  • एआईआर कॉपी: सभी सक्षम प्राधिकारों को।

ये प्रक्रियाएं पारदर्शी बनाती हैं।

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जमशेदपुर में सड़क दुर्घटनाओं का परिदृश्य

जमशेदपुर औद्योगिक शहर होने से भारी वाहनों की समस्या। कार्यशाला ने सतर्कता पर जोर दिया। Dalsa की पहल से जागरूकता बढ़ेगी। सड़क सुरक्षा अभियान मजबूत होंगे।

प्रभाव और भविष्य की योजनाएं

यह कार्यशाला पुलिस को सशक्त बनाएगी। मुआवजा प्रक्रिया तेज होगी, पीड़ितों को राहत। डालसा नियमित ट्रेनिंग आयोजित करे। समाज में कानूनी जागरूकता फैले।

Dalsa वाहन दुर्घटना दावा कार्यशाला ने न्याय प्रक्रिया को मजबूत किया। 60 दिनों की समय सीमा से पीड़ितों को जल्द मुआवजा मिलेगा। ऐसी पहलें जारी रहें। सड़क सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी।

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