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Shocking Corruption in Govt School: Paint सिर्फ 4 लीटर, पर मजदूर 168!

On: July 6, 2025 12:57 PM
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Shocking Corruption in Govt School: Paint सिर्फ 4 लीटर, पर मजदूर 168!

भ्रष्टाचार की हद: 4 लीटर Paint , 168 मजदूर और ₹1 लाख का बिल! स्कूल की मरम्मत के नाम पर फर्जीवाड़ा, ट्रेजरी ऑफिस, शिक्षा विभाग और खुद स्कूल प्रिंसिपल की मिलीभगत

शहडोल, मध्यप्रदेश।
सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार किस कदर गहराया हुआ है, इसकी बानगी हाल ही में शहडोल जिले के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सकंदी स्थित सरकारी हाईस्कूल में देखने को मिली। यहां स्कूल की मरम्मत के नाम पर ऐसा फर्जीवाड़ा हुआ जिसे सुनकर आम जनता ही नहीं, अफसरों के भी होश उड़ गए।

168 मजदूर, 65 मिस्त्री… और Paint सिर्फ 4 लीटर!

स्कूल में चार लीटर ऑयल पेंट (Paint) से पुताई का काम हुआ। लेकिन बिल में जो लिखा है, वो गजब है — इस छोटे से काम में 168 मजदूर और 65 मिस्त्री लगाए गए! और भुगतान भी हो गया पूरे ₹1,06,984 का। सुधाकर कंस्ट्रक्शन नाम की एजेंसी ने यह बिल 5 मई 2025 को बनाया था, जबकि स्कूल के प्रिंसिपल ने उसी बिल को एक महीने पहले यानी 4 अप्रैल को ही सत्यापित कर दिया! मतलब काम हुआ भी नहीं और बिल पहले ही पास हो गया।

No Photos, No Details… Yet Bill Cleared!

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सरकारी नियमों के मुताबिक, किसी भी मरम्मत या निर्माण कार्य में “पहले और बाद” की तस्वीरें जरूरी होती हैं। लेकिन यहां कोई फोटो नहीं, कोई वर्क रिपोर्ट नहीं — इसके बावजूद ट्रेजरी अफसर ने भुगतान पास कर दिया।

किये गए बिल से भुगतान की ओरिजिनल बिल जिसपर सबके हस्ताक्षर है
किये गए बिल से भुगतान की ओरिजिनल बिल जिसपर सबके हस्ताक्षर है

Who’s Responsible?

अब सवाल उठ रहे हैं — ट्रेजरी ऑफिस, शिक्षा विभाग और खुद स्कूल प्रिंसिपल की भूमिका पर। क्या सब मिलीभगत से हुआ? क्या बिना लेन-देन के सरकारी दफ्तरों में कोई भी बिल पास हो सकता है?

Shocking Corruption in Govt School: Paint सिर्फ 4 लीटर, पर मजदूर 168!

‘जो पकड़ाया वो चोर, जो पचा गया वो अफसर!’

जनता का कहना है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है। देश के ज्यादातर सरकारी विभागों में फाइलें तब तक अटकी रहती हैं जब तक पैसा न चढ़े। यह सिस्टम बन गया है — भ्रष्टाचार एक आदत हो चुकी है।

District Education Officer’s Response

जब जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मरपची से इस पर पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मुझे सोशल मीडिया से इस मामले की जानकारी मिली है। मैं जांच करवाऊंगा और जरूरी कदम उठाऊंगा।”

आखिर कब तक चलेगा ये खेल?

यह मामला सिर्फ पैसों के घोटाले का नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी, जिम्मेदारी की कमी और जवाबदेही के अभाव को दिखाता है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे घोटाले यूं ही चलते रहेंगे — और जनता का पैसा लुटता रहेगा।

समीक्षा:

शहडोल जिले के सरकारी स्कूल में हुए मरम्मत घोटाले की यह खबर भ्रष्टाचार के गहराते जाल की गंभीर तस्वीर पेश करती है। महज 4 लीटर पेंट के कार्य में 168 मजदूर और 65 मिस्त्री दिखाकर 1 लाख से अधिक की राशि निकालना सिस्टम की लापरवाही और मिलीभगत को दर्शाता है।

बिल में तारीखों की विसंगति, फोटो और विवरण की गैरहाजिरी, फिर भी भुगतान — यह स्पष्ट करता है कि नियमों की खुलकर अनदेखी हुई।

ट्रेजरी से लेकर शिक्षा विभाग तक, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठते हैं। शिक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्था में इस प्रकार की धोखाधड़ी बेहद चिंताजनक है। यदि ऐसे मामलों में कड़ी जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी संसाधनों की लूट रुकना मुश्किल है। यह घटना प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और सख्त निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है। ऐसी घटनाएं जनविश्वास को कमजोर करती हैं और तंत्र की साख पर गहरा आघात पहुंचाती हैं।

ग्यारहवीं और बारहवीं की परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक आउट मामले में अभी तक कोई कदम नहीं उठाना जैक चेयरमैन के क्रियाकलाप पर भी प्रश्नात्मक चिन्ह है – दीपक पांडेय

सारांश:


भ्रष्टाचार की यह मिसाल हमें सोचने पर मजबूर करती है — क्या हमारे बच्चे ऐसे ही सिस्टम में पढ़ेंगे, जहां 4 लीटर Paint लगाने के लिए 168 मजदूरों का झूठा बिल बनाया जाता है? क्या सरकार सिर्फ सोशल मीडिया से खबरें लेकर कार्रवाई करेगी या फिर असल सुधार की पहल होगी?

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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