
राजकीय पॉलिटेक्निक खरसावां – जहाँ प्राचार्य को हटाया जा रहा है, षडयंत्रकारीयों के झूठ का पर्दाफाश हो रहा है और एक गहरी साजिश की बू अब खुलकर सामने आ रही है।

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में स्थित एक प्रमुख तकनीकी संस्थान है- राजकीय पॉलिटेक्निक खरसावां। यहां इन दिनों प्राचार्य उमेश कुमार को हटाने को लेकर एक संगठित अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन अब इस अभियान के पीछे की सच्चाई और संभावित साजिश की परतें धीरे-धीरे उजागर होने लगी हैं।

आरोपों के पीछे की असल कहानी
जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की जड़ में संविदा व्याख्याता उत्तम कुमार और उनके कुछ सहयोगी व्याख्याता हैं। बताया जा रहा है कि ये शिक्षक लंबे समय से कक्षा लिए बिना, अनुपस्थित रहकर, और सिर्फ वेतन लेने की आदत डाल चुके हैं। लेकिन जब प्राचार्य उमेश कुमार ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया और आदेश जारी किए, तो ये शिक्षक प्राचार्य को हटाने की कोशिशों में जुट गए।
प्राचार्य द्वारा जारी आदेश ने मचाई खलबली
प्राचार्य उमेश कुमार द्वारा जारी किए गए दो अहम आदेश—
- ज्ञापांक संख्या 12 (दिनांक 15.01.2025)
- दूसरा आदेश दिनांक 04.06.2025


इन आदेशों के बाद व्याख्याताओं में खलबली मच गई। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अनुशासन लागू होने के डर से उन्होंने छात्रों, अफसरों और प्रशासनिक तंत्र का सहारा लेकर प्राचार्य के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है।
सरायकेला प्रशासनिक हलकों में हलचल
सूत्रों के अनुसार, उत्तम कुमार और उनके सहयोगी व्याख्याता को हाल के दिनों में एसडीओ ऑफिस और उपायुक्त कार्यालय सरायकेला में लगातार देखा गया है। यह जानकारी गुप्त सूत्रों के माध्यम से सामने आई है, जिससे संदेह और भी गहराता जा रहा है कि कहीं ये सारे प्रयास प्राचार्य को हटाने की पूर्व-नियोजित रणनीति का हिस्सा तो नहीं?
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़: गंभीर आरोप
एसडीओ द्वारा की जा रही जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्राचार्य उमेश कुमार के कार्यभार संभालने से पहले, छात्रों को बिना असाइनमेंट और सेशनल जांचे नंबर दिए जाते थे।
छात्रों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उत्तम कुमार परीक्षा नियंत्रक रहते हुए कई छात्रों से पैसे लेकर बिना मूल्यांकन के नंबर दे चुके हैं।
यह न केवल संस्थान की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि छात्रों के करियर और संस्थान की साख के लिए भी खतरा बन गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या प्राचार्य को हटाने की कोशिश उनके अनुशासन लागू करने के कारण हो रही है? या फिर वे कुछ ऐसे “लोगों” के लिए खतरा बन गए हैं जिन्होंने अब तक संस्थान को ‘निजी संपत्ति’ की तरह इस्तेमाल किया है?
राजकीय पॉलिटेक्निक खरसावां का यह प्रकरण झारखंड की तकनीकी शिक्षा प्रणाली के लिए चेतावनी है। जहां एक ओर अनुशासन लागू करने वाले अधिकारी को हटाने की साजिशें रची जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर छात्रों का भविष्य, मूल्यांकन की पारदर्शिता और शैक्षणिक नैतिकता दांव पर लगी है।
अब यह प्रशासन और शिक्षा विभाग की ज़िम्मेदारी बनती है कि वे निष्पक्ष जांच कर इस बात को सुनिश्चित करें कि—












































