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“धर्म के नाम पर दरिंदगी: छांगुर बाबा गैंग का शिकार बनी कर्नाटक की युवती की खौफनाक आपबीती”

On: July 18, 2025 9:40 AM
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CRIME: उत्तर प्रदेश में पकड़े गए छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद लगातार हैरान कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। एक ऐसा रैकेट, जो धर्म के नाम पर लड़कियों को फंसाता, विदेश भेजता, उनका शोषण करता और फिर दबाव बनाकर धर्म परिवर्तन करवाता।

कर्नाटक की रहने वाली रश्मि (बदला हुआ नाम) ने एक प्रमुख न्यूज़ चैनल से अपनी आपबीती सुनाई – जिसे सुनकर रूह कांप जाए। यूपी, कर्नाटक और सऊदी तक फैला मानव तस्करी और धर्मांतरण का जाल

“इंस्टाग्राम से सऊदी अरब तक… प्यार के नाम पर बना शिकार”

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2019 के अंत में जब रश्मि के भाई का निधन हुआ, तो वह अकेली पड़ गई। इसी दौरान एक इंस्टाग्राम आईडी ‘राजू राठौड़’ से दोस्ती शुरू हुई। धीरेधीरे भरोसा बना, प्यार के झूठे वादे हुए और फिर शादी का प्रस्ताव आया। रश्मि को बताया गया कि राजू सऊदी में रहता है, और वहीं बुला लिया गया।

बिना कुछ समझे, अकेलेपन में फंसी रश्मि ने सब कुछ बेच दिया – अपना पार्लर, घर, जमीन। फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश भेजी गई। एयरपोर्ट पर मिलने वाले ‘राजू’ ने गाड़ी में बैठते ही फोन पर कहा, “पैकेज पहुंच गया।”

रश्मि को नहीं पता था कि वह ‘पैकेज’ अब वो खुद है – जिसे एक रैकेट ने 15 लाख रुपये में बेचा है।

“मांग भरी, मंगलसूत्र पहनाया – और फिर कह दिया, अब तेरा नाम आयशा है”

सऊदी पहुंचते ही जिस शख्स ने हिंदू बनकर शादी की रस्म निभाई, वही अचानक ‘वसीम’ बन गया। बोला – “अब तेरा नाम आयशा होगा।”

रश्मि जब इसका विरोध करने लगी तो मारपीट, बलात्कार, ताले में कैद, धमकियां – सब कुछ शुरू हो गया। तीन दिन तक लगातार शारीरिक उत्पीड़न होता रहा।

उसके बाद आया बदर अख्तर सिद्दीकी – छांगुर बाबा का विदेशी नेटवर्क संभालने वाला गुर्गा। उसने समझाया – “तुम्हारा असली धर्म यही है, बुतपरस्ती में कुछ नहीं रखा।”

“रेप का वीडियो बना लिया गया – कहा, नहीं मानी तो वायरल कर देंगे”

सिद्दीकी के बाद वसीम ने नया हथियार अपनाया – बलात्कार करते हुए रश्मि का वीडियो बना लिया और धमकी दी कि अगर धर्म नहीं बदला, तो ये वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर देंगे।

ढाई साल तक इस ब्लैकमेलिंग ने रश्मि को न जीने दिया, न मरने दिया।

“जब धर्म न बदला, तो गैंग रेप किया – छांगुर के अड्डे तक ले जाकर मारने की कोशिश”

रश्मि जब सहारनपुर भेजी गई तो वहां उसके साथ रह चुके लोग और वसीम की कथित बीवी (जो खुद को उसकी भाभी बताती थी) ने मिलकर उसे एक महीने तक बंधक बनाकर रखा।

रश्मि को धर्म परिवर्तन के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। अंत में एक दिन शहर से लौटते समय उसे अगवा किया गया और गैंगरेप हुआ। चाचा, दोस्त, रिश्तेदार – सबने मिलकर उसे मारा, जलाया, चोट पहुंचाई।

छांगुर के अड्डे पर ले जाकर कहा गया – “इसे मारो, खत्म करो। अब कोई काम की नहीं रही।”

छांगुर ने कहा – “चेहरे पर क्यों मारा, अब कौन खरीदेगा?”

शुद्धिकरण और नया संघर्ष – लेकिन खतरे अब भी जारी हैं”

रश्मि किसी तरह भागकर कचहरी पहुंची, जहां उसकी मुलाकात कुछ हिंदू संगठनों से हुई। जून 2024 में गोमतीनगर, लखनऊ में उनका शुद्धिकरण कराया गया।

लेकिन असली संघर्ष अब भी जारी है।

सहारनपुर में जिस घर में उसे रखा गया था, उसी का एक कमरा उसके नाम कर दिया गया। बिना बिजली, बिना सुविधा – उस अंधेरे कमरे में आज भी वह छांगुर के खौफ के साथ रह रही है।

घरघर जाकर पार्लर का काम करती है, लेकिन हर कोना डर से भरा है।

रेपिस्ट अक्सर सामने खड़े मिलते हैं, मोबाइल पर धमकी आती है, वीडियो वायरल करने की बात दोहराई जाती है।

“मैं अनाथ थी… परिवार बनाने की चाह ने मुझे सब कुछ छीन लिया”

रश्मि की कहानी कोई अकेली नहीं – बल्कि छांगुर गैंग के शिकार हजारों परिवारों की प्रतिनिधि है। उसके साथ शुद्धिकरण में शामिल हुए 15 और परिवारों की कहानियां भी कुछ ऐसी ही हैं।

सरकार और समाज से सवाल:

 ऐसे रैकेट कब तक लड़कियों को फंसाते रहेंगे?

 धर्म परिवर्तन की आड़ में मानव तस्करी को कौन संरक्षण दे रहा है?

 छांगुर के गुर्गों पर कार्रवाई कब होगी?

यह खबर किसी साजिश या सांप्रदायिक भावना के तहत नहीं, बल्कि पीड़ित की जुबानी कही गई असलियत है। इसे पढ़ें, सोचें – और ऐसे रैकेटों के खिलाफ आवाज़ उठाएं।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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