
चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी पहल प्रोजेक्ट Jagriti बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम” के तहत सोमवार को जिले के सात अलग-अलग केंद्रों पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान में जिलेभर के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और कुल 235 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। जिला प्रशासन ने इसे जिले को रक्तयुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

रक्तदान शिविर का उद्देश्य केवल रक्त संग्रह करना नहीं था, बल्कि समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इस मानवीय कार्य से जोड़ना भी था। अभियान के दौरान युवाओं, पुलिसकर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
सात केंद्रों पर एक साथ आयोजित हुआ रक्तदान शिविर
जिला प्रशासन द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन जिले के सात प्रमुख स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक केंद्रों पर किया गया। इनमें पुलिस लाइन चाईबासा, सदर अस्पताल चाईबासा, अनुमंडल अस्पताल चक्रधरपुर, तांतनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, झींकपानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, टोंटो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा मंझारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल रहे।
सभी केंद्रों पर रक्तदाताओं की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने रक्त संग्रहण की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया। रक्तदाताओं के लिए आवश्यक चिकित्सा जांच, परामर्श और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
पुलिस लाइन चाईबासा में हुआ मुख्य कार्यक्रम का आयोजन
रक्तदान अभियान का मुख्य कार्यक्रम पुलिस लाइन चाईबासा में आयोजित किया गया। इस शिविर का उद्घाटन सिंहभूम पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) अनुरंजन किस्पोट्टा ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अमित रेनू, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी, सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, सदर अंचल अधिकारी उपेंद्र कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने रक्तदान शिविर का निरीक्षण किया तथा रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया। अधिकारियों ने इस अभियान को जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
डीआईजी ने स्वयं रक्तदान कर दिया प्रेरणादायक संदेश
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि उद्घाटन के बाद डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने स्वयं रक्तदान किया। उन्होंने अपने इस कदम से लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया और यह संदेश दिया कि रक्तदान एक सुरक्षित, सरल और जीवन बचाने वाला कार्य है।
उनके रक्तदान करने के बाद शिविर में उपस्थित कई लोगों ने भी रक्तदान के लिए आगे आकर पंजीकरण कराया। डीआईजी का यह कदम अभियान के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ और उपस्थित लोगों ने उनकी सराहना की।
पुलिस एसोसिएशन और जवानों की रही उल्लेखनीय भागीदारी
पुलिस लाइन में आयोजित शिविर में पुलिस एसोसिएशन की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारियों एवं जवानों ने रक्तदान किया। कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मियों ने समाज सेवा के इस कार्य में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाकर एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया।
शिविर में पुलिस बल के जवानों ने रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का भी कार्य किया और लोगों को इसके महत्व के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि रक्तदान जैसे कार्य समाज और प्रशासन के बीच विश्वास को मजबूत बनाते हैं।
रक्तदाताओं को किया गया सम्मानित
रक्तदान करने वाले सभी लोगों को जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सम्मानित किया गया। रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र और कॉफी मग प्रदान कर उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि रक्तदान करने वाले लोग वास्तव में समाज के नायक हैं, क्योंकि उनके द्वारा दिया गया रक्त किसी जरूरतमंद मरीज की जान बचाने में सहायक बन सकता है। सम्मान मिलने से रक्तदाताओं में उत्साह देखने को मिला और उन्होंने भविष्य में भी नियमित रूप से रक्तदान करने का संकल्प लिया।

रक्तदान और अंगदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा अनुरंजन किस्पोट्टा
इस अवसर पर डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रक्तदान और अंगदान मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान ने भले ही कई क्षेत्रों में प्रगति कर ली हो, लेकिन आज भी मानव रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों, प्रसव संबंधी जटिलताओं और विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं में रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता ही जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदाता बनते हैं। उन्होंने सभी सक्षम नागरिकों से नियमित रूप से रक्तदान करने की अपील की।
रक्तदान को जन-आंदोलन बनाने की जरूरत उपायुक्त मनीष कुमार
उपायुक्त मनीष कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य केवल रक्त संग्रह करना नहीं है, बल्कि समाज में स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि यदि अधिक से अधिक लोग नियमित रूप से रक्तदान करेंगे तो जिले में कभी भी रक्त की कमी नहीं होगी।
उन्होंने युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि रक्तदान को जन-आंदोलन का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग से पश्चिमी सिंहभूम जल्द ही रक्त की उपलब्धता के मामले में आत्मनिर्भर जिला बनेगा।
प्रोजेक्ट Jagriti बना स्वास्थ्य जागरूकता का सशक्त माध्यम
जिला प्रशासन द्वारा संचालित “प्रोजेक्ट जागृति – बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम” लगातार लोगों के बीच स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रहा है। रक्तदान अभियान इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य, मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
प्रशासन के इस प्रयास को जिलेभर में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। आम लोगों, युवाओं और विभिन्न संगठनों की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि रक्तदान के प्रति लोगों का दृष्टिकोण तेजी से सकारात्मक हो रहा है।
जिले को रक्तयुक्त बनाने की दिशा में बढ़ रहा कारवां
235 यूनिट रक्त संग्रह के साथ संपन्न हुआ यह अभियान पश्चिमी सिंहभूम को रक्तयुक्त जिला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि यदि इसी प्रकार लोगों का सहयोग मिलता रहा तो भविष्य में रक्त की कमी के कारण किसी भी मरीज को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
प्रोजेक्ट जागृति के माध्यम से प्रशासन लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है जो समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। रक्तदान शिविर की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि समाज और प्रशासन मिलकर किसी भी सकारात्मक लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।














