
बिहार: Muzaffarpur के चर्चित कथित फर्जी मुठभेड़ मामलों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने वर्ष 2007 के एक पुराने मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। वीडियो में मुजफ्फरपुर निवासी अनिता देवी ने तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा पर अपने 17 वर्षीय बेटे मनीष महिवाल को पूछताछ के नाम पर घर से ले जाने और बाद में उसकी मौत होने का गंभीर आरोप लगाया है।

अनिता देवी का दावा है कि उनका बेटा निर्दोष था और उसे पूछताछ के लिए ले जाया गया था, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई। वहीं उस समय पुलिस ने इस घटना को मुठभेड़ (एनकाउंटर) बताया था। परिवार ने शुरू से ही इस दावे को खारिज करते हुए इसे कथित फर्जी मुठभेड़ बताया था। अब हाल के घटनाक्रमों के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से फिर चर्चा में आया मामला
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अनिता देवी बेहद भावुक दिखाई देती हैं। वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे को पूछताछ के लिए घर से ले जाया गया था और बाद में उसकी मौत हो गई।
उन्होंने कहा, “SDPO राजेश कुमार शर्मा मेरे बेटे को पूछताछ के लिए ले गए और मार दिया। आश्चर्य की बात है कि हत्यारा होते हुए भी कुर्सी पर बैठा है। अगर उसे सीनियर अधिकारी नहीं बचाते तो आज भरत तिवारी जिंदा होता।”
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
छठ पर्व की खुशियां मातम में बदलने का आरोप
अनिता देवी के अनुसार, 4 नवंबर 2007 की रात उनके परिवार में छठ महापर्व की तैयारियां चल रही थीं। घर में प्रसाद के लिए खजुरी और ठेकुआ बनाए जा रहे थे तथा पूरा परिवार त्योहार की खुशियों में शामिल था।
इसी दौरान, उनके अनुसार, पुलिसकर्मी घर पहुंचे और उनके 17 वर्षीय बेटे मनीष महिवाल को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए। परिवार का आरोप है कि इसके कुछ समय बाद उन्हें बेटे की मौत की सूचना मिली और त्योहार का माहौल मातम में बदल गया।
परिजनों का कहना है कि उस रात की घटना आज भी उनके परिवार के लिए एक ऐसा दर्द है जिसे वे भुला नहीं पाए हैं।
पुलिस ने उस समय बताया था एनकाउंटर
घटना के समय पुलिस ने इसे मुठभेड़ में हुई मौत बताया था। पुलिस का पक्ष था कि कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ हुई, जबकि मृतक के परिजनों ने इस दावे को शुरू से ही अस्वीकार किया।
परिवार का कहना था कि मनीष महिवाल को घर से पूछताछ के लिए ले जाया गया था, इसलिए मुठभेड़ का दावा उनकी समझ से परे है। इसी आधार पर उन्होंने उस समय भी निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग उठाई थी।
भरत तिवारी मामले के बाद फिर उठे पुराने सवाल
हाल ही में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा का नाम सामने आने के बाद यह पुराना मामला भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
भरत तिवारी मामले में दर्ज प्राथमिकी के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर वर्ष 2007 के कथित फर्जी एनकाउंटर की भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोग पुराने मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं और संबंधित मामलों में जांच एवं कानूनी प्रक्रिया अपने-अपने स्तर पर चल रही है।
पीड़ित परिवार ने दोहराई न्याय की मांग
अनिता देवी का कहना है कि उनका परिवार पिछले कई वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। उनका आरोप है कि यदि उस समय निष्पक्ष जांच होती तो आज सच्चाई सामने आ चुकी होती।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपने बेटे के लिए न्याय पाना है। उनका मानना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच हो तो वास्तविक तथ्यों का पता चल सकता है।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कई लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने लिखा कि यदि किसी मामले में नए तथ्य सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की है।
कानूनी प्रक्रिया पर टिकी सबकी नजर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पुराने मामले में यदि नए तथ्य या साक्ष्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार उनकी जांच संभव है। हालांकि अंतिम निर्णय जांच एजेंसियों और न्यायालय के निष्कर्षों पर ही निर्भर करता है।
इसलिए इस मामले में भी किसी प्रकार का अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
अभी आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले में वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारी की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि वर्ष 2007 के मामले में नई जांच शुरू होगी या नहीं।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित परिवार न्याय की मांग दोहरा रहा है, जबकि लोगों की नजर प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
Muzaffarpur का यह पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में है। एक ओर पीड़ित परिवार गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही हो सकती है।
ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय का निर्णय ही अंतिम आधार होता है। इसलिए पूरे प्रकरण में सभी पक्षों की बात सामने आने और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।












































