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करीम सिटी कॉलेज में याद किए गए प्रोफेसर Ahmed सज्जाद

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On: April 30, 2026 9:14 PM
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जमशेदपुर: करीम सिटी कॉलेज में एक भावुक कार्यक्रम हुआ, जहां प्रोफेसर Ahmed सज्जाद की याद में सभी ने श्रद्धांजलि दी। उर्दू स्नातकोत्तर विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस इवेंट में उनके जीवन, योगदान और विचारों पर चर्चा हुई। प्रो. सज्जाद का 26 अप्रैल 2026 को रांची में 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। यह कार्यक्रम न सिर्फ उनकी स्मृति को ताजा करता है, बल्कि उर्दू साहित्य और शिक्षा जगत के लिए प्रेरणा भी। इस ब्लॉग में हम प्रो. सज्जाद की जीवनी, कार्यक्रम की डिटेल्स, उनके विचार और महत्व जानेंगे। उर्दू प्रेमी या शिक्षा के क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए खास!

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प्रोफेसर Ahmed सज्जाद जीवन परिचय

प्रोफेसर Ahmed सज्जाद उर्दू साहित्य और इस्लामियात के बड़े विद्वान थे। रांची विश्वविद्यालय में उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष रहे। 87 वर्ष की उम्र में 26 अप्रैल 2026 को उनका देहांत हुआ। वे लेखक, शिक्षक और समाज सुधारक के रूप में जाने जाते थे।

उनका जन्म एक विद्वान परिवार में हुआ। रांची यूनिवर्सिटी में लंबे समय पढ़ाया। उर्दू में किताबें लिखीं, जो आज भी पढ़ी जाती हैं। करीम सिटी कॉलेज में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। वे राष्ट्रीय एकता और सही शिक्षा के प्रबल समर्थक थे।

कार्यक्रम का विवरण श्रद्धांजलि सभा

करीम सिटी कॉलेज, साकची, जमशेदपुर के उर्दू स्नातकोत्तर विभाग ने 30 अप्रैल 2026 को विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। प्रोफेसर Ahmed सज्जाद की याद में। डॉ. सादिक इकबाल ने शुरुआत उनकी जीवनी से की। विभागाध्यक्ष डॉ. शाहबाज अंसारी ने उर्दू साहित्य में उनके योगदान पर बोले।

प्रो. मोहम्मद ईसा (गौहर अजीज) ने उनके विचारों की गहराई से विवेचना की। अंत में सभी ने दुआएं कीं – “प्रो. सज्जाद को भुलाया नहीं जा सकेगा।” स्टूडेंट्स, टीचर्स और गेस्ट्स की मौजूदगी ने इसे यादगार बनाया।

मुख्य स्पीकर्स और उनके योगदान

  • डॉ. सादिक इकबाल: जीवनी पर प्रकाश।
  • डॉ. शाहबाज अंसारी: साहित्यिक महत्व।
  • प्रो. मोहम्मद ईसा: विचारों की विवेचना।

प्रो. Ahmed सज्जाद के साहित्यिक और सामाजिक योगदान

प्रोफेसर Ahmed सज्जाद उर्दू के प्रमुख लेखक थे। उनकी किताबें इस्लामियात, साहित्य और समाज पर। रांची यूनिवर्सिटी में विभाग चेयरमैन के रूप में उर्दू को नई ऊंचाई दी।

मुख्य योगदान:

  • राष्ट्रीय एकता: लेखों में हिंदू-मुस्लिम सद्भाव पर जोर।
  • शिक्षा सुधार: समाज में सही शिक्षा की वकालत।
  • लेखन: कविताएं, निबंध, किताबें।
  • मेंटरिंग: कई स्टूडेंट्स को गाइड किया।

वे कहते थे, “उर्दू सिर्फ भाषा नहीं, एकता का पुल है।” उनका काम आज भी रेलेवेंट।

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अन्य अतिथियों की भूमिका: कार्यक्रम की सफलता

कार्यक्रम में डॉ. आफताब आलम, डॉ. उधम सिंह, डॉ. राशिद इकबाल, डॉ. साकेत कुमार, डॉ. ओम प्रकाश सिंह देव उपस्थित। स्टूडेंट्स ने भी हिस्सा लिया। इनकी मौजूदगी ने इसे इंटरडिसिप्लिनरी बनाया। करीम सिटी कॉलेज ने साबित किया कि उर्दू विभाग कितना एक्टिव है।

उर्दू साहित्य में प्रो. सज्जाद का महत्व

उर्दू साहित्य में प्रोफेसर Ahmed सज्जाद एक चमकते सितारे। इस्लामिक स्टडीज और मॉडर्न इश्यूज पर उनका काम यूनिक। वे प्रोग्रेसिव राइटर्स की तरह सोचते – शिक्षा से समाज बदले। जमशेदपुर जैसे शहर में उनका प्रभाव गहरा। युवा लेखकों के लिए आइडल।

स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणा: प्रो. सज्जाद से सीखें

प्रोफेसर Ahmed सज्जाद की तरह बनना चाहते हो? टिप्स:

  1. रोज पढ़ाई: उर्दू क्लासिक्स पढ़ो।
  2. लिखो: निबंध, कविताएं शुरू करो।
  3. सद्भाव फैलाओ: एकता पर फोकस।
  4. टीचिंग: दूसरों को सिखाओ।
  5. मेंटर्स: विद्वानों से जुड़ो।
  6. इवेंट्स: सेमिनार अटेंड करो।
  7. डिजिटल: सोशल मीडिया पर शेयर।

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उर्दू साहित्य में करियर

  • टीचर, राइटर।
  • जर्नलिस्ट, ट्रांसलेटर।
  • कल्चरल ऑर्गनाइजर।

करीम सिटी कॉलेज में याद किए गए प्रोफेसर Ahmed सज्जाद – यह कार्यक्रम उनकी स्मृति को जीवंत करता है। उर्दू साहित्य, शिक्षा और एकता के योद्धा को सलाम। उनकी दुआएं हमेशा याद रहेंगी। युवा, उनके रास्ते पर चलो! अपनी यादें कमेंट्स में शेयर करें।

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