ईरान: Iran में जनवरी के दौरान हुए राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों से जुड़ी एक नई जांच रिपोर्ट ने गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी ईरान के खोर्रमाबाद स्थित शोहदाए अशायर अस्पताल में प्रदर्शनकारियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। दावा किया गया है कि अस्पताल पर सुरक्षा बलों ने नियंत्रण स्थापित कर लिया था और कई गंभीर रूप से घायल लोगों को इलाज देने के बजाय मुर्दाघर भेज दिया गया। साथ ही अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर भी दबाव बनाया गया तथा उन्हें स्वतंत्र रूप से इलाज करने से रोका गया।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि अस्पताल के भीतर मौजूद घायल प्रदर्शनकारियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया, जबकि कई परिवारों को अपने परिजनों के शव तक देखने की अनुमति नहीं दी गई। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना कठिन है, लेकिन रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
जांच रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
रिपोर्ट के अनुसार यह जांच दो दर्जन से अधिक स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है। इनमें अस्पताल के मेडिकल कर्मचारी, प्रत्यक्षदर्शी, पीड़ित परिवारों के करीबी लोग, अस्पताल के रिकॉर्ड और अस्पताल के भीतर से सामने आए वीडियो शामिल बताए गए हैं।
जांच में दावा किया गया कि जनवरी की कार्रवाई के दौरान अस्पताल से 200 से अधिक शव गुजरे। एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से कहा गया कि कम से कम 70 गंभीर रूप से घायल प्रदर्शनकारियों को पर्याप्त इलाज मिलने के बजाय मुर्दाघर भेज दिया गया, जबकि उनका जीवन बचाया जा सकता था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अब तक खोर्रमाबाद में मारे गए 23 लोगों की पहचान की जा चुकी है।
अस्पताल पर सुरक्षाबलों का कथित कब्जा
रिपोर्ट के अनुसार, कार्रवाई के दौरान शोहदाए अशायर अस्पताल ऐसा प्रमुख केंद्र था जहां घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज किया जा रहा था। आरोप है कि अस्पताल को चारों ओर से हथियारबंद सुरक्षा बलों ने घेर रखा था।
दावा किया गया कि अस्पताल परिसर में पुलिस, खुफिया एजेंसियों के अधिकारी और अन्य सुरक्षा कर्मी लगातार मौजूद थे। मेडिकल स्टाफ के अनुसार, डॉक्टर और नर्स जब घायलों का उपचार कर रहे थे, तब भी सुरक्षा अधिकारी उनके पास खड़े रहते थे और पूरे इलाज पर नजर रखी जाती थी।
स्वास्थ्यकर्मियों पर भी बनाया गया दबाव
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल कर्मचारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए थे, जिससे वे अपने परिवारों या बाहरी लोगों से संपर्क नहीं कर सकें।
कुछ कर्मचारियों को कथित तौर पर हिरासत में भी लिया गया। इसके अलावा सुरक्षा बल अस्पताल के विभिन्न वार्डों में जाकर घायल प्रदर्शनकारियों की पहचान कर रहे थे ताकि बाद में उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह चिकित्सा संस्थानों की निष्पक्षता और मरीजों के अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
ऑपरेशन थिएटर से मुर्दाघर तक पहुंचने के आरोप
रिपोर्ट में अस्पताल के भीतर से मिले वीडियो का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया कि वीडियो में मुर्दाघर और उसके आसपास के कमरों में बड़ी संख्या में शव दिखाई देते हैं।
बताया गया कि कई शवों पर ऑक्सीजन ट्यूब और ईसीजी पैड लगे हुए थे, जिससे संकेत मिलता है कि वे इलाज के दौरान मेडिकल निगरानी में थे। इसके बाद वे मुर्दाघर में पाए गए।
हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हो सकी है, लेकिन रिपोर्ट में इन्हें महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
गंभीर चोटों और गोली लगने के निशान
जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि कई शवों के माथे पर गोली लगने के निशान थे, जबकि कुछ के शरीर पर छर्रों के घाव मिले।
कुछ मामलों में सिर पर अत्यंत गंभीर चोटें होने का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ मृतकों के हाथों में हथकड़ियां लगी हुई थीं और उनके शरीर पर गोली लगने के निशान मौजूद थे।
कुछ अस्पताल कर्मचारियों ने कथित तौर पर ऐसे मामलों का उल्लेख किया, जिनमें उनका मानना था कि घायल व्यक्तियों को बाद में दोबारा गोली मारी गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल के भीतर भय और अफरा-तफरी का माहौल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अस्पताल की स्थिति बेहद गंभीर थी। रिपोर्ट में कहा गया कि गलियारों में खून फैला हुआ था और मुर्दाघर के साथ-साथ अस्पताल के आंगन में भी शव रखे गए थे।
कई गवाहों ने अनुमान लगाया कि कार्रवाई के दौरान 200 से 250 शव अस्पताल से होकर गुजरे।
इन दावों ने अस्पतालों में संघर्ष के दौरान मानवीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
सड़कों पर भी हुई हिंसा के आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, 8 और 9 जनवरी को खोर्रमाबाद में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिनमें हजारों लोग शामिल हुए।
आरोप लगाया गया कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सैन्य स्तर के हथियार, स्नाइपर राइफल, शॉटगन और छर्रे वाली बंदूकों का इस्तेमाल किया।
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के सिर और सीने को निशाना बनाकर गोली चलाई गई। हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
घायलों को अस्पताल पहुंचने में भी आई बाधाएं
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कई घायल प्रदर्शनकारियों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने दिया गया।
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई लोग सड़क पर ही गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े रहे और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी।
जो लोग अस्पताल तक पहुंच पाए, उनके सामने भी गिरफ्तारी या सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिए जाने का डर बना रहा।
परिवारों को शव लेने से रोके जाने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, 9 जनवरी को अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में शव जमा होने लगे।
आरोप है कि बसीज बलों ने कई परिवारों को अपने परिजनों के शवों तक पहुंचने से रोक दिया। कुछ परिवारों ने आशंका जताई कि कहीं शव सरकारी कब्जे में न चले जाएं, इसलिए उन्होंने जल्दबाजी में अपने परिजनों के शव अस्पताल से ले जाने का प्रयास किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता
रिपोर्ट सामने आने के बाद मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ी है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच में पुष्टि होती है, तो यह चिकित्सा संस्थानों की निष्पक्षता, नागरिकों के मानवाधिकार और संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के पालन से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में स्वतंत्र और पारदर्शी जांच आवश्यक होती है ताकि तथ्यों की पुष्टि हो सके और यदि किसी प्रकार का उल्लंघन हुआ है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके।
ईरान के शोहदाए अशायर अस्पताल को लेकर सामने आई यह रिपोर्ट कई गंभीर आरोपों से भरी हुई है। रिपोर्ट में घायल प्रदर्शनकारियों को पर्याप्त इलाज न मिलने, अस्पताल पर सुरक्षा बलों के कथित नियंत्रण, स्वास्थ्यकर्मियों पर दबाव, परिवारों को शवों से दूर रखने और अस्पताल के भीतर भयावह हालात का दावा किया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन यदि जांच में ये सही साबित होते हैं, तो यह मानवाधिकार और चिकित्सा नैतिकता से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर मामला माना जाएगा।




















