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Kulgam आतंकी हमला 20 मिनट तक मजदूरों के बीच बैठा, भरोसा जीता पानी मांगा और फिर दो श्रमिकों की गोली मारकर हत्या

On: August 3, 2026 1:31 AM
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जम्मू-कश्मीर: Kulgam जिले में हुए एक आतंकी हमले ने एक बार फिर घाटी में काम करने वाले गैर-स्थानीय श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हमले में छत्तीसगढ़ से रोजी-रोटी कमाने आए दो मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच के अनुसार, हमलावर ने वारदात को अंजाम देने से पहले करीब 15 से 20 मिनट तक मजदूरों के बीच बैठकर बातचीत की, उनका भरोसा जीता और फिर अचानक बेहद करीब से गोलीबारी कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

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सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की जांच तेज कर दी है और पूरे क्षेत्र में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था भी और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

20 मिनट तक मजदूरों के बीच बैठा रहा हमलावर

जानकारी के अनुसार, हमलावर ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले श्रमिकों के पास पहुंचा और सामान्य व्यक्ति की तरह उनके बीच बैठ गया। उसने मजदूरों से बातचीत की, उनके नाम पूछे और उनके साथ सामान्य व्यवहार किया, जिससे किसी को भी उस पर संदेह नहीं हुआ।

बताया जा रहा है कि उसके पास एक काला बैग था, जिसमें उसने कथित तौर पर एक असॉल्ट राइफल छिपा रखी थी। बातचीत के दौरान उसने ऐसा माहौल बनाया कि वहां मौजूद लोगों को लगा कि वह किसी प्रकार का खतरा नहीं है।

पानी मांगकर जीता भरोसा फिर बरसाईं गोलियां

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, लगभग 20 मिनट तक बातचीत करने के बाद हमलावर ने बाहर निकलते समय प्यास लगने की बात कही और पानी मांगा।

जैसे ही एक श्रमिक की पत्नी उसके लिए पानी लेने के लिए मुड़ी, उसने मौके का फायदा उठाया और दोनों मजदूरों पर बेहद करीब से गोली चला दी। अचानक हुई गोलीबारी से वहां अफरा-तफरी मच गई।

बताया गया है कि घटना के समय घटनास्थल पर करीब डेढ़ से दो वर्ष का एक मासूम बच्चा भी मौजूद था। गोलीबारी के बाद हमलावर अपने एक साथी के साथ मौके से फरार हो गया।

पहचान पूछने के बाद बनाया निशाना

जांच में सामने आया है कि हमलावर ने बातचीत के दौरान मजदूरों से उनकी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी भी पूछी थी।

जांच एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि क्या हमला पूरी तरह सुनियोजित था और क्या मजदूरों को पहले पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया।

हमलावर की पहचान लतीफ बट के रूप में होने का दावा

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में हमलावर की पहचान लतीफ बट के रूप में की गई है। अधिकारियों का कहना है कि वह एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

जांच में यह भी सामने आया है कि उसने अपनी राइफल को बैग में छिपाकर रखा था ताकि किसी को उस पर शक न हो। घटनास्थल पर पहुंचने के बाद उसने पहले सामान्य बातचीत की और सही समय का इंतजार करता रहा।

हालांकि, जांच अभी जारी है और सुरक्षा एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कर रही हैं।

पहलगाम हमले जैसी रणनीति की जांच

सुरक्षा एजेंसियां इस हमले की तुलना पहले हुए पहलगाम आतंकी हमले से भी कर रही हैं, जहां हमलावरों द्वारा कथित रूप से लोगों की पहचान पूछने के बाद हमला किए जाने की बात सामने आई थी।

हालांकि दोनों मामलों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां हमले के तरीके और हमलावरों की रणनीति का विश्लेषण कर रही हैं।

पुलिस और सेना ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे।

पूरे इलाके की घेराबंदी कर व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया। घटनास्थल से फोरेंसिक टीम ने महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हमलावर किस रास्ते से आया और घटना के बाद किस दिशा में फरार हुआ।

सहयोगियों की तलाश में जुटीं एजेंसियां

जांच एजेंसियां केवल मुख्य हमलावर की ही नहीं बल्कि उसके संभावित सहयोगियों की भी तलाश कर रही हैं।

खुफिया एजेंसियां स्थानीय स्तर पर सक्रिय आतंकी नेटवर्क, लॉजिस्टिक सपोर्ट और हमले की पूर्व योजना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के हमलों में कई बार स्थानीय स्तर पर सहयोग मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा बढ़ाई गई

इस आतंकी हमले के बाद प्रशासन ने गैर-स्थानीय श्रमिकों की सुरक्षा को और मजबूत करने का फैसला लिया है।

संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। साथ ही प्रवासी मजदूरों के रहने के स्थानों, ईंट-भट्ठों, निर्माण स्थलों और अन्य कार्यस्थलों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

प्रशासन का कहना है कि मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।

घाटी में फिर बढ़ी सुरक्षा को लेकर चिंता

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले हजारों गैर-स्थानीय मजदूरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी और खुफिया तंत्र को और मजबूत बनाना आवश्यक है ताकि ऐसे हमलों को समय रहते रोका जा सके।

Kulgam में दो प्रवासी श्रमिकों की हत्या केवल एक आतंकी वारदात नहीं, बल्कि घाटी में काम करने वाले गैर-स्थानीय मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौती भी है। शुरुआती जांच के अनुसार, हमलावर ने पहले मजदूरों का भरोसा जीता, सामान्य बातचीत की और फिर अचानक हमला कर दिया। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट होगा कि हमले की पूरी साजिश कैसे रची गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।

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