
जमशेदपुर: Golden line जमशेदपुर की जीवनरेखा मानी जाने वाली Golden line नदी में लगातार बढ़ते जलप्रदूषण की चिंता अब सिर्फ वैज्ञानिक और पर्यावरणविदों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुद्दा जनता के बीच भी खूब गूंज रहा है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को भुईयाडीह स्थित बाबूडीह और लालभट्ठा Golden line नदी घाटों का व्यापक भ्रमण किया और यहां लाखों मछलियों के मरने की दृश्य देखकर राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण संस्थानों पर सख्त सवाल उठाए। इस थीम को लेकर आज हम “लाखों मछलियों के मरने के बाद Golden line नदी का भविष्य क्या है?” जैसे प्रश्न को सीधे‑सीधे “सरयू राय बाबूडीह लालभट्ठा Golden line नदी घाट भ्रमण” शीर्षक से बनाते हुए एक विस्तृत, जनउन्मुख और विश्लेषणात्मक हिंदी ब्लॉग लेख तैयार करेंगे, जो न केवल समाचार‑सार ही बताए, बल्कि इस घटना के पीछे के पर्यावरणीय, वैज्ञानिक और प्रशासनिक पहलुओं को भी सरल भाषा में समझाए।

Golden line में मछलियों का महाकाताकोप
दिनांक 31 मार्च 2026 को स्वर्णरेखा नदी के भुईयाडीह–बाबूडीह और लालभट्ठा घाटों पर लोगों ने देखा कि नदी के पानी में और किनारे पर हजारों–लाखों मछलियां मृत अवस्था में तैर रही थीं। तीन दिन बाद भी ये घाट मृत मछलियों से लदे मिले, जिन पर कीड़े लग रहे थे और भयानक दुर्गंध फैल रही थी। नदी का पानी किनारे पर काला रंग लिए हुए था, जो साफ संकेत था कि यहां केमिकल‑युक्त, अत्यधिक प्रदूषित बहिस्राव नदी में गिर रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, टाटा स्टील की फैक्ट्री और आस‑पास के रिहायशी इलाकों से निकलने वाले बड़े‑बड़े नालों के दूषित बहिस्राव ही नदी के प्रदूषण और मछलियों के मरने का मुख्य कारण हैं। यह तय करना कि यह बहिस्राव टाटा स्टील की फैक्ट्री से आ रहा है या रिहायशी इलाकों की अवैध गतिविधियों से, इसीलिए उच्चस्तरीय वैज्ञानिक जांच की मांग की जा रही है।hindi.news18+2

सरयू राय का घाट भ्रमण और आह्वान
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने घटना के तीन दिन बाद खुद इन घाटों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि “लाखों मछलियों के मरने की घटना” के बावजूद स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने समय पर, पारदर्शी और वैज्ञानिक जांच जारी नहीं की है। उन्होंने तीन प्रमुख संस्थाओं को इस मुद्दे में गंभीर होने का आह्वान किया:
- जिला के उपायुक्त (जिला पर्यावरण समिति के अध्यक्ष)
- झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जल‑प्रदूषण नियामक)
- जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (शहरी प्रदूषण और नदी‑किनारा नियंत्रण)
सरयू राय ने मांग की कि इन तीनों संस्थाओं ने अब तक जो कार्रवाई और जांच की है, उसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से जारी की जाए, ताकि जनता के सामने सच‑सच आए और जिम्मेदार तत्वों को छुपाने का मौका न मिले।

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर सवाल
सरयू राय ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को सबसे अधिक “गैर‑जिम्मेदार” बताया। उनकी बातों का सार यह रहा:
- बोर्ड में पदाधिकारियों और वैज्ञानिकों की भारी कमी है, जिससे वास्तविक निगरानी और विश्लेषण संभव नहीं हो पा रहा।
- जो अधिकारी हैं, वे ज्यादातर औद्योगिक इकाइयों को रेगुलेटरी अनुमतियां देने में व्यस्त रहते हैं, न कि प्रदूषण की वास्तविकता पर डेटा‑आधारित जांच में।
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार औद्योगिक इकाइयों में ऑनलाइन Continuous Emission Monitoring System (CEMS) लगना चाहिए, जो दूषित बहिस्राव का डेटा रियल‑टाइम केंद्रीय और राज्य प्रदूषण बोर्ड को भेजता है, लेकिन
- राज्य प्रदूषण बोर्ड की वेबसाइट पर 30 मार्च–1 अप्रैल 2026 के बीच के लिए टाटा स्टील के प्रदूषण डेटा उपलब्ध नहीं हैं।
- केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की साइट पर कुछ डेटा तो मिलते हैं, लेकिन कई गुरुत्वपूर्ण मापदंड जैसे अमोनिया‑नाइट्रोजन, तेल‑ग्रीस, सायनाइड आदि के लिए सेंसर और अलर्ट‑सिस्टम टाटा स्टील में लगे ही नहीं हैं।
इन बातों से उनका निष्कर्ष यह है कि “राज्य प्रदूषण बोर्ड” का होना और न होना बराबर है, यानी यह संस्था नियमन के बजाय औपचारिकता और रेगुलेटरी प्रक्रियाओं तक सीमित दिख रही है

ऑनलाइन मॉनिटरिंग और अनुपलब्ध डेटा
सरयू राय ने जांच के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की वेबसाइट का भी विश्लेषण किया, जो कुछ गंभीर तथ्य सामने लाता है:
- टाटा स्टील ने अमोनिया‑युक्त नाइट्रोजन और तेल‑ग्रीस के लिए कोई अलग सेंसर नहीं लगाया, जबकि ये मापदंड जल‑प्रदूषण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- COD (Chemical Oxygen Demand), BOD (Biological Oxygen Demand), TSS (Total Suspended Solids), Flow Outlet और बहिस्राव का तापमान (Temperature) जैसे मापदंडों पर अलर्ट‑सिस्टम नहीं लगा, जिसके कारण प्रदूषण सीमाओं से ऊपर जाने पर फैक्ट्री स्वतः बंद होने की व्यवस्था नहीं है।
- उद्योग से निकलने वाले और रिहायशी इलाकों होकर स्वर्णरेखा में गिरने वाले बहिस्राव में BOD और COD की मात्रा निर्धारित सीमा से कहीं अधिक पाई गई:
- BOD की सीमा 30 mg/L है, लेकिन 31 मार्च देर रात के डेटा के अनुसार इस बहिस्राव में BOD 439.6 mg/L थी।
- COD की सीमा 250 mg/L रखी गई है, लेकिन CPCB डेटा में COD 880.8 mg/L दर्ज
Golden Line नदी में उत्पन्न गंभीर पर्यावरण संकट ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। हाल ही में लाखों मछलियों की अचानक मौत से नदी के आसपास रहने वाले लोगों में दहशत और चिंता का माहौल है। इस घटना ने न केवल जल प्रदूषण के खतरे को उजागर किया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही विधायक सरयू राय मौके पर पहुंचे और बाबूडीह तथा लालभट्ठा स्थित स्वर्णरेखा नदी घाट का दौरा किया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। सरयू राय ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल मछलियों की मौत नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम के लिए खतरे की घंटी है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच के निर्देश देने और पानी की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की। साथ ही यह भी कहा कि यदि किसी उद्योग या अन्य स्रोत से प्रदूषण फैलाया गया है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने भी नदी में बदबू और पानी के रंग में बदलाव की शिकायत की है, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ जाती है। अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि इस पर्यावरणीय संकट का समाधान कैसे निकाला जाएगा।









































