
सरायकेला: खरसावां जिले के आदित्यपुर स्थित Shrinath कॉलेज ऑफ एजुकेशन एवं Shrinath पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और भाषा अनुवाद पर आधारित एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विद्यार्थियों और शिक्षकों को एआई तकनीक, उसके उपयोग, सीमाओं और नैतिक पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ उसके जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक बनाना था।
अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद् डॉ. दीपशिखा बेहरा रहीं मुख्य वक्ता
कार्यशाला में प्रसिद्ध शिक्षाविद् और शोधकर्ता डॉ. दीपशिखा बेहरा ने रिसोर्स पर्सन के रूप में भाग लिया। डॉ. बेहरा वर्तमान में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडीज इन द ह्यूमैनिटीज में पोस्ट डॉक्टोरल फेलो के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वह यूनाइटेड किंगडम के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ऑक्सफोर्ड कंपेरेटिव क्रिटिसिज्म एंड ट्रांसलेशन रिसर्च सेंटर में परियोजना सहयोगी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं।
उनकी उपस्थिति ने कार्यशाला को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक दृष्टिकोण प्रदान किया, जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर विकसित हो रही एआई तकनीकों की जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यशाला का विषय रहा एआई ट्रांसलेशन और नैतिकता
कार्यशाला का मुख्य विषय “ट्रांसलेटिंग मल्टीलिंगुअल वर्ल्ड्स यूजिंग एलएलएम्स: एथिक्स ऑफ एआई ट्रांसलेशन इन स्कूल एजुकेशन इन द ग्लोबल साउथ” रखा गया था।
इस विषय के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया कि बहुभाषी समाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुवाद तकनीक किस प्रकार कार्य करती है तथा इसके उपयोग में नैतिक जिम्मेदारियों का कितना महत्व है।
विद्यार्थियों से पूछा गया आप एआई को कैसे समझते हैं?
कार्यशाला के दौरान डॉ. दीपशिखा बेहरा ने विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करते हुए सबसे पहले यह प्रश्न पूछा कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को किस रूप में समझते हैं। विद्यार्थियों ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एआई आज डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में शिक्षा, जानकारी और विभिन्न कार्यों में उपयोग किया जा रहा है।
इसके बाद उन्होंने विद्यार्थियों से एआई के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों पर अपने विचार लिखने के लिए कहा, जिससे छात्रों की सोच और समझ का मूल्यांकन किया जा सके।
एआई मानव द्वारा निर्मित है, मानव का विकल्प नहीं
डॉ. दीपशिखा ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव द्वारा विकसित की गई तकनीक है, लेकिन यह स्वयं मानव नहीं है। उन्होंने बताया कि एआई कई कार्यों को आसान बनाता है, जानकारी उपलब्ध कराता है और समय की बचत करता है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग से लोगों में निष्क्रियता बढ़ सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सचेत करते हुए कहा कि एआई पर अत्यधिक निर्भरता सृजनात्मक क्षमता और स्वतंत्र सोच को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इसका उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए।
रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझाया एआई का महत्व
कार्यशाला को रोचक बनाने के लिए डॉ. दीपशिखा ने विद्यार्थियों को कुछ पुरानी कविताओं की अधूरी पंक्तियां दीं और उन्हें अपने शब्दों में पूरा करने के लिए कहा। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशक्ति और भाषा कौशल का उपयोग करते हुए अलग-अलग तरीके से उन पंक्तियों को पूरा किया।
इसके अलावा उन्होंने एक अधूरी कहानी भी विद्यार्थियों को दी, जिसमें कुछ स्थान रिक्त छोड़े गए थे। छात्रों ने अपनी रचनात्मक सोच के आधार पर कहानी को पूरा किया। इस गतिविधि के माध्यम से यह बताया गया कि मानव की कल्पनाशक्ति और मौलिक सोच की तुलना किसी मशीन से नहीं की जा सकती।
चैटजीपीटी और एआई टूल्स पर भी हुई चर्चा
कार्यशाला के दौरान डॉ. दीपशिखा ने चैटजीपीटी सहित विभिन्न एआई आधारित टूल्स के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये तकनीकें अध्ययन और शोध में सहायक हो सकती हैं, लेकिन इनसे प्राप्त जानकारी को बिना जांचे स्वीकार करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि एआई कई बार गलत या अधूरी जानकारी भी प्रस्तुत कर सकता है, इसलिए उपयोगकर्ताओं को तथ्यों का सत्यापन करना चाहिए और आलोचनात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए।

मातृभाषा में अनुवाद कर समझाई भाषा की जटिलता
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भाषा अनुवाद से जुड़ा रहा। डॉ. दीपशिखा ने विद्यार्थियों को एक हिंदी कविता दी और उसे अपनी-अपनी मातृभाषा में अनुवाद करने के लिए कहा।
इस अभ्यास के माध्यम से उन्होंने समझाया कि भारत जैसे बहुभाषी देश में भाषाओं की सांस्कृतिक और भावनात्मक विविधता बहुत गहरी है। ऐसे में यदि केवल एआई पर निर्भर होकर अनुवाद किया जाए तो कई बार मूल अर्थ और भाव बदल सकते हैं। इसलिए मानवीय समझ और भाषा ज्ञान की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रहेगी।
प्राचार्या डॉ. मौसुमी महतो ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित
Shrinath कॉलेज ऑफ एजुकेशन की प्राचार्या डॉ. मौसुमी महतो ने कहा कि वर्तमान समय में एआई का उपयोग लगभग हर क्षेत्र में बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को समझना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं छात्रों को नई तकनीकों के प्रति जागरूक बनाती हैं और उन्हें जिम्मेदारी के साथ तकनीक का उपयोग करने की प्रेरणा देती हैं।
Shrinath पब्लिक स्कूल के प्राचार्य ने कार्यशाला को बताया उपयोगी
श्रीनाथ पब्लिक स्कूल के प्राचार्य श्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध हुई है। उन्होंने बताया कि आज का समय एआई और चैटजीपीटी जैसी तकनीकों का है, इसलिए छात्रों को इनकी कार्यप्रणाली, उपयोगिता और सीमाओं की जानकारी होना आवश्यक है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला से विद्यार्थियों में तकनीक के प्रति सही दृष्टिकोण विकसित होगा और वे इसका उपयोग रचनात्मक कार्यों में करेंगे।

बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी रहे उपस्थित
कार्यशाला में श्रीनाथ कॉलेज ऑफ एजुकेशन तथा श्रीनाथ पब्लिक स्कूल के शिक्षक एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से कई प्रश्न पूछे, जिनका विस्तार से उत्तर दिया गया। इससे छात्रों की जिज्ञासा और सीखने की उत्सुकता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से बदलती दुनिया की महत्वपूर्ण तकनीक बन चुकी है, लेकिन इसके साथ नैतिकता, रचनात्मकता और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। Shrinath कॉलेज ऑफ एजुकेशन और Shrinath पब्लिक स्कूल द्वारा आयोजित यह कार्यशाला विद्यार्थियों को तकनीक का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने और आलोचनात्मक सोच विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।










































