मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया

‘छात्रों की बात… छात्रों के साथ’ अभियान: हेमंत सोरेन ने युवाओं से परीक्षा व्यवस्था सुधार के लिए मांगे सुझाव

On: August 9, 2026 10:30 PM
Follow Us:

रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र असंतोष के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों से सीधे संवाद की पहल की है। मुख्यमंत्री ने ‘छात्रों की बात… छात्रों के साथ’ अभियान के माध्यम से छात्रों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सुझाव, समस्याएं और अनुभव साझा करने की अपील की है। सरकार की ओर से इसके लिए samvad.jharkhand.gov.in पोर्टल का भी उल्लेख किया गया है। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री की ओर से छात्रों के साथ संवाद और परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की बात सामने आई है।

---Advertisement---
Netaji Advertisement

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि संवाद से ही सुधार के रास्ते निकलते हैं और छात्रों की भागीदारी के बिना परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि झारखंड के लाखों युवाओं के सपनों से प्रतियोगी परीक्षाएं जुड़ी हुई हैं। किसी छात्र के वर्षों की मेहनत केवल उसके भविष्य तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उससे पूरे परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। इसलिए परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, निष्पक्ष, विश्वसनीय और समयबद्ध बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

JPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में सुधार की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद से सरकार ने JPSC सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नियमों में बदलाव किए हैं। प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर देश के कई राज्यों में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे समय में झारखंड का प्रयास केवल समस्याओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान का रास्ता तलाशना है।

हाल के दिनों में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन और पारदर्शिता की मांग के बीच सरकार ने छात्रों से बातचीत की पहल की है।

‘छात्रों की बात… छात्रों के साथ’ अभियान क्यों?

मुख्यमंत्री के संदेश के अनुसार, सरकार चाहती है कि राज्य के प्रत्येक जिले, प्रखंड, कॉलेज, विश्वविद्यालय, कोचिंग संस्थान और छात्र-छात्राओं की ओर से परीक्षा व्यवस्था को लेकर सुझाव सामने आएं।

छात्रों से मुख्य रूप से पूछा गया है कि—

  • परीक्षा प्रणाली में क्या-क्या कमी दिखाई देती है?
  • परीक्षा प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए क्या किया जा सकता है?
  • छात्रों ने स्वयं किन समस्याओं का सामना किया है?
  • किसी समस्या का समाधान उनके पास है तो उसे सरकार के साथ साझा करें।

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि छात्रों द्वारा दिए गए सुझावों का अध्ययन किया जाएगा और विशेषज्ञों के माध्यम से उनका परीक्षण कराया जाएगा। जो सुझाव व्यवहारिक और संभव होंगे, उन्हें नियमों तथा संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप लागू करने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।

युवाओं के रोजगार पर भी सरकार का जोर

संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि झारखंड के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार और अवसर उपलब्ध हों। इसी उद्देश्य से नियुक्ति प्रक्रियाओं में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि झारखंडी फर्स्ट की भावना के साथ स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा और उनके लिए अवसरों का विस्तार करना सरकार की प्रतिबद्धता है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि झारखंड अपने 25वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और यह यात्रा केवल सरकार की यात्रा नहीं, बल्कि सभी झारखंडवासियों की साझा यात्रा है। इस यात्रा को सफल बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।

THE NEWS FRAME

‘आपका सुझाव सरकार तक पहुंचे’

मुख्यमंत्री ने राज्य के विद्यार्थियों और युवाओं से अपील की कि वे खुलकर अपने विचार सामने रखें। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं, अनुभवों और सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को ऐसा स्वरूप देना है, जिसमें विद्यार्थियों को अपनी मेहनत और प्रतिभा पर भरोसा हो तथा उन्हें यह विश्वास रहे कि परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्ष एवं पारदर्शी है।

इस पहल के माध्यम से सरकार और छात्रों के बीच सीधे संवाद को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से अभियान का हिस्सा बनने और अपने सुझाव संबंधित पोर्टल पर दर्ज करने की अपील की है।

सरकार का संदेश

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के अंत में युवाओं से आह्वान किया कि सभी मिलकर ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करें, जिसमें हर छात्र गर्व के साथ परीक्षा दे सके और अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त रह सके।

साथियों,

हम परीक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना चाहते हैं। लेकिन ऐसा केवल सरकार अकेले नहीं कर सकती। इस परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण भागीदार आप हैं। इसी उद्देश्य से हमने “छात्रों की बात – छात्रों के साथ” अभियान प्रारंभ किया है।

मैं झारखंड के प्रत्येक जिले, प्रत्येक प्रखंड, प्रत्येक कॉलेज, विश्वविद्यालय, कोचिंग संस्थान और प्रत्येक छात्र-छात्राओं से आग्रह करता हूँ कि खुलकर अपने सुझाव दीजिए –

📌 परीक्षा प्रणाली में क्या-क्या कमी दिखाई देती है, हमें बताइए।

📌 यदि आपके पास कोई बेहतर व्यवस्था का सुझाव है, उसे साझा कीजिए।

📌 यदि आपने किसी समस्या का सामना किया है, उसका अनुभव लिखिए।

📌 यदि आपके पास कोई नया समाधान है, उसे हमारे साथ साझा कीजिए।

आपके प्रत्येक सुझाव का अध्ययन किया जाएगा। विशेषज्ञों द्वारा उनका परीक्षण किया जाएगा और जहाँ भी संभव होगा, उन्हें नियमों एवं संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप तय समय सीमा के अन्दर लागू करने का प्रयास किया जाएगा।

क्योंकि यह केवल परीक्षा सुधार का विषय नहीं है। यह झारखंड के युवाओं के विश्वास का, लाखों परिवारों के सपनों का, राज्य के भविष्य का विषय है।

मैं आप सभी युवा साथियों से आग्रह करता हूँ कि इस जनभागीदारी अभियान का हिस्सा बनें और अपने सुझाव नीचे दिए गए पोर्टल पर अवश्य दर्ज करें—

samvad.jharkhand.gov.in

आइए, हम सब मिलकर ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाएं जिस पर हर छात्र गर्व कर सके और भरोसा कर सके।

जोहार!

---Advertisement---
Netaji Advertisement
---Advertisement---
Netaji Advertisement

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Comment