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टाटा TMH में मृतक की डेड बॉडी रोकने का मामला भाजपा नेता विमल बैठा के हस्तक्षेप से 2 लाख रुपये का बकाया माफ परिवार को मिली राहत

On: May 28, 2026 4:39 PM
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जमशेदपुर: प्रतिष्ठित टाटा मेन हॉस्पिटल TMH में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक परिवार को अपने ही सदस्य के शव के लिए अस्पताल प्रबंधन के सामने गुहार लगानी पड़ी। मामला जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के लूआबसा निवासी 45 वर्षीय जुरू गोप से जुड़ा है, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने लगभग 2 लाख रुपये का बकाया बिल जमा होने तक शव देने से इनकार कर दिया

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घटना के बाद स्थानीय भाजपा नेता विमल बैठा के हस्तक्षेप से परिवार को राहत मिली और अस्पताल प्रबंधन ने मानवीय आधार पर बकाया राशि माफ कर शव सौंप दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद TMH की नीतियों और निजी अस्पतालों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

छत से गिरने के बाद गंभीर हालत में TMH में कराया गया भर्ती

जानकारी के अनुसार, जुरू गोप करीब पांच दिन पहले अपने घर की छत से गिर गए थे। गिरने के कारण उनके सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई थीं। हादसे के तुरंत बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए टाटा मेन हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति बेहद गंभीर बताते हुए ICU में भर्ती कर लिया।

अस्पताल में लगातार पांच दिनों तक उनका इलाज चलता रहा। डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। परिवार के लोग हर संभव कोशिश कर रहे थे कि किसी तरह जुरू गोप की जान बच जाए।

लेकिन इलाज के दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह टूट गई। परिजनों के अनुसार, इलाज में अब तक 3.5 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके थे। पैसे की व्यवस्था करने के लिए परिवार ने अपना घर गिरवी रख दिया और महिलाओं के जेवर तक बेच दिए। इसके बावजूद अस्पताल का पूरा बिल चुकाना संभव नहीं हो सका।

इलाज के बावजूद नहीं बच सकी जान परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

लगातार पांच दिनों तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद आखिरकार जुरू गोप ने दम तोड़ दिया। परिवार के लिए यह पल बेहद दर्दनाक था। घर का कमाने वाला सदस्य खोने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

लेकिन मौत के बाद जो हुआ उसने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया। परिवार का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बकाया बिल जमा नहीं होने तक शव देने से इनकार कर दिया।

मृतक के बेटे ने बताया कि अस्पताल में पहले ही लाखों रुपये जमा किए जा चुके थे, लेकिन मृत्यु के समय भी लगभग 2 लाख रुपये का भुगतान बाकी था। जब परिजनों ने अपनी आर्थिक मजबूरी बताई, तब कथित तौर पर अस्पताल प्रबंधन ने साफ कह दिया कि “पूरा भुगतान किए बिना डेड बॉडी रिलीज नहीं की जाएगी।

पैसे नहीं तो शव नहीं अस्पताल की कार्यशैली पर उठे सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद जमशेदपुर में निजी अस्पतालों की कार्यशैली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी अस्पताल का पहला धर्म मानवता होना चाहिए।

मृतक के परिवार की हालत ऐसी थी कि वे अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे जुटाने में असमर्थ थे। ऐसे समय में शव रोकने जैसी कार्रवाई को लोगों ने बेहद अमानवीय बताया।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आपातकालीन चिकित्सा और मृत्यु जैसे संवेदनशील मामलों में अस्पतालों को लचीला रवैया अपनाना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के साथ सहानुभूति और सहयोग की भावना आवश्यक है।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इलाज के बाद शव को रोकना किसी अस्पताल की नैतिक जिम्मेदारी के अनुरूप है?

भाजपा नेता विमल बैठा पहुंचे TMH परिवार की मदद के लिए उठाई आवाज

जब परिवार पूरी तरह निराश हो चुका था, तब उन्होंने स्थानीय भाजपा नेता विमल बैठा से संपर्क किया। सूचना मिलते ही विमल बैठा तुरंत टाटा मेन हॉस्पिटल पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन से बातचीत की।

उन्होंने अस्पताल प्रशासन के सामने मृतक परिवार की आर्थिक स्थिति रखी और मानवीय आधार पर राहत देने की मांग की। विमल बैठा ने कहा कि परिवार पहले ही अपना सब कुछ बेच चुका है और अब शव के लिए पैसे मांगना उचित नहीं है।

उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से अपील करते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में संवेदनशीलता दिखाना आवश्यक है। लंबे समय तक चली बातचीत और दबाव के बाद अस्पताल प्रबंधन ने आखिरकार बड़ा फैसला लिया।

2 लाख रुपये का बकाया माफ, परिवार को सौंपा गया शव

भाजपा नेता विमल बैठा के हस्तक्षेप के बाद TMH प्रबंधन ने मानवीय आधार पर लगभग 2 लाख रुपये का बकाया बिल माफ कर दिया। इसके बाद अस्पताल ने जुरू गोप का शव परिजनों को सौंप दिया।

शव को जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के लूआबसा स्थित उनके घर लाया गया, जहां पूरे इलाके में शोक का माहौल देखने को मिला। देर शाम गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

परिवार के लोगों ने विमल बैठा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अगर समय पर मदद नहीं मिलती तो वे अपने परिजन का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाते।

मृतक के बेटे ने सुनाई दर्दभरी आपबीती

मृतक के बेटे ने मीडिया से बातचीत में कहा:

हमने पिताजी के इलाज के लिए सब कुछ गिरवी रख दिया था। घर के जेवर तक बेच दिए। अस्पताल में लाखों रुपये जमा कर चुके थे, लेकिन मौत के बाद भी शव के लिए पैसे मांगे जा रहे थे। हमारे पास अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं बचे थे। विमल बैठा जी नहीं आते तो शायद हम अपने पिता का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाते।”

उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

विमल बैठा बोले दुख की घड़ी में अस्पतालों को संवेदनशील होना चाहिए

भाजपा नेता विमल बैठा ने कहा कि किसी भी अस्पताल को सिर्फ व्यापारिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा:

दुख की घड़ी में अस्पतालों को मानवता और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। पैसे के लिए किसी की डेड बॉडी रोकना अमानवीय है। गरीब परिवारों की मदद करना समाज और संस्थाओं दोनों की जिम्मेदारी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए अस्पताल प्रशासन को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।

TMH की नीति पर स्थानीय लोगों में नाराजगी

इस घटना के बाद जमशेदपुर में TMH की कथित “पहले भुगतान, फिर शव” नीति को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कहा कि अस्पतालों को आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए राहत नीति बनानी चाहिए।

लोगों का कहना है कि इलाज के दौरान परिवार पहले ही मानसिक और आर्थिक संकट से गुजरता है। ऐसे समय में शव रोकने जैसी घटनाएं परिवार को और अधिक तोड़ देती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि निजी अस्पतालों में मेडिकल इमरजेंसी और मृत्यु के मामलों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना मजबूत होनी चाहिए।

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गरीब परिवारों के लिए राहत नीति की मांग तेज

घटना के बाद अब शहर में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए विशेष राहत नीति बनाने की मांग तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अस्पतालों को CSR और मानवीय फंड के माध्यम से ऐसे परिवारों की मदद करनी चाहिए।

कई लोगों ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को भी इस प्रकार के मामलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने परिजन के शव के लिए संघर्ष न करना पड़े।

जमशेदपुर में चर्चा का विषय बना TMH डेड बॉडी विवाद

फिलहाल यह मामला पूरे जमशेदपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा नेता विमल बैठा की पहल की सराहना कर रहे हैं।

इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ संवेदनशीलता और मानवता भी उतनी ही जरूरी है।

जुरू गोप अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौत के बाद सामने आई यह घटना अस्पताल व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों पर बड़ा सवाल छोड़ गई है।

जमशेदपुर के TMH अस्पताल में सामने आया यह मामला सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण की जरूरत को भी उजागर करता है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के लिए इलाज के बाद शव प्राप्त करना भी एक संघर्ष बन गया।

भाजपा नेता विमल बैठा के हस्तक्षेप से परिवार को राहत जरूर मिली, लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि अस्पतालों को केवल नियमों से नहीं, बल्कि इंसानियत से भी काम लेना चाहिए। समाज अब उम्मीद कर रहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और अस्पताल संकट की घड़ी में लोगों का सहारा बनें, बोझ नहीं।

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