नई दिल्ली: Government ने देशभर में बेटियों के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है। सरकार का कहना है कि लड़कियों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इनमें सबसे प्रमुख ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (BBBP) अभियान है, जिसने एक सरकारी योजना से आगे बढ़कर राष्ट्रीय जनआंदोलन का रूप ले लिया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, समग्र शिक्षा योजना और नव भारत साक्षरता कार्यक्रम जैसी पहलें भी बेटियों और महिलाओं को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ बना राष्ट्रीय जनआंदोलन
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से 22 जनवरी 2015 को शुरू की गई ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना का उद्देश्य बाल लिंग अनुपात में सुधार करना, कन्या भ्रूण हत्या जैसी समस्याओं पर रोक लगाना तथा बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
Government के अनुसार यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों, मीडिया, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी से एक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है। इसका मुख्य लक्ष्य समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है।
देश के सभी जिलों तक पहुंचा अभियान
15वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान ‘मिशन शक्ति’ के ‘संबल’ घटक के तहत इस योजना का विस्तार देश के सभी जिलों तक कर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि अब इस योजना के तहत केवल जागरूकता अभियान ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।
जन्म के समय लिंग अनुपात में हुआ सुधार
सरकार ने स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में जन्म के समय लिंग अनुपात (Sex Ratio at Birth) में लगातार सुधार दर्ज किया गया है।
वर्ष 2014-15 में यह अनुपात 918 था, जो बढ़कर 2025-26 (अनंतिम) में 929 तक पहुंच गया है। सरकार का मानना है कि यह सुधार विभिन्न जागरूकता अभियानों और सरकारी योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है।
समग्र शिक्षा योजना से बढ़ रहा कौशल विकास
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप समग्र शिक्षा योजना के तहत कक्षा 6 से 12 तक व्यावसायिक शिक्षा को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, विशेषकर किशोरियों, को आधुनिक तकनीकी और व्यावसायिक कौशल उपलब्ध कराना है ताकि वे भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार हो सकें।
लड़कियों को STEM और आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा
सरकार ने बताया कि लड़कियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, दूरसंचार, नवीकरणीय ऊर्जा और ऑटोमोबाइल जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी छात्राओं को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी उन क्षेत्रों में बढ़ाना है जहां पहले उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम रही है।
स्किल लैब और उद्योग आधारित प्रशिक्षण पर जोर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ के माध्यम से स्किल लैब स्थापित की जा रही हैं।
इन प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, औद्योगिक अनुभव और करियर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे छात्राओं को रोजगार के नए अवसरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा।
हजारों स्कूलों में शुरू हुई व्यावसायिक शिक्षा
सरकार के अनुसार वर्ष 2025-26 तक व्यावसायिक शिक्षा लागू करने के लिए 31,477 स्कूलों को मंजूरी दी गई है।
इनमें से 25,181 स्कूलों में कौशल आधारित शिक्षा शुरू हो चुकी है। इससे देशभर के लगभग 39.49 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है। ये आंकड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा मार्च 2026 तक उपलब्ध कराए गए हैं।
लड़कियों के लिए बेहतर स्कूल सुविधाओं पर जोर
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
इसमें छात्राओं के लिए अलग शौचालय, सुरक्षित परिसर और आवश्यक सुविधाओं का निर्माण एवं रखरखाव भी शामिल है। राज्यों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर हर वर्ष सहायता प्रदान की जाती है।
महिला साक्षरता में भी दर्ज हुआ सुधार
Government द्वारा वर्ष 2022-23 से लागू ‘उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 3.36 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा (FLNAT) में भाग लिया है।
इनमें लगभग 2.29 करोड़ महिलाएं शामिल हैं और परीक्षा में उनकी सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक रही है।
महिला साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के प्रभाव से देश में महिला साक्षरता दर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
जनगणना 2011 के अनुसार महिला साक्षरता दर 65.46 प्रतिशत थी, जो पीएलएफएस 2025 के अनुसार बढ़कर 74.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक भागीदारी में बढ़ोतरी का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
रोजगार और आत्मनिर्भरता पर सरकार का विशेष फोकस
Government का मानना है कि आधुनिक दौर में आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास है।
इसी उद्देश्य से लड़कियों को बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे भविष्य में बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
सामाजिक सोच बदलने पर भी दिया जा रहा जोर
Government का कहना है कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की सोच बदलना भी उतना ही जरूरी है।
इसी कारण ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के माध्यम से परिवारों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और युवाओं को जागरूक किया जा रहा है ताकि बेटियों को समान अवसर और सम्मान मिल सके।
राज्यसभा में दी गई जानकारी
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सरकार शिक्षा, सुरक्षा, कौशल विकास और सामाजिक जागरूकता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य देश की हर बेटी को सुरक्षित, शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।
केंद्र Government की विभिन्न योजनाएं यह दर्शाती हैं कि बेटियों के समग्र विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से लेकर समग्र शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, कौशल विकास और नव भारत साक्षरता कार्यक्रम तक, कई पहलें मिलकर लड़कियों के लिए बेहतर भविष्य तैयार करने का प्रयास कर रही हैं। जन्म के समय लिंग अनुपात, महिला साक्षरता और कौशल शिक्षा में दर्ज सुधार इस दिशा में सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

















