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वर्ल्ड नो टोबैको डे पर WHO की बड़ी चेतावनी अफ्रीका में युवाओं को निकोटीन की लत के जाल में फंसा रही हैं तंबाकू कंपनियां

On: May 31, 2026 7:39 PM
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नैरोबी: विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) के अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने अफ्रीका में तेजी से बढ़ रही निकोटीन और ई-सिगरेट की लत को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। संगठन का कहना है कि तंबाकू कंपनियां अब पारंपरिक सिगरेट से आगे बढ़कर आधुनिक निकोटीन उत्पादों, फ्लेवर्ड ई-सिगरेट और वेपिंग डिवाइसेज के जरिए बच्चों और युवाओं को अपना नया लक्ष्य बना रही हैं।

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WHO ने स्पष्ट रूप से कहा है कि युवाओं में बढ़ती निकोटीन निर्भरता कोई संयोग नहीं बल्कि एक सुनियोजित व्यावसायिक रणनीति का परिणाम है, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को लंबे समय तक निकोटीन का आदी बनाना है।

इस वर्ष की थीम आकर्षण का मुखौटा उतारना

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 के लिए WHO ने थीम निर्धारित की है:

Unmasking the Appeal – Countering Nicotine and Tobacco Addiction

आकर्षण का मुखौटा उतारना निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला करना

इस अभियान का उद्देश्य उन मार्केटिंग रणनीतियों को उजागर करना है, जिनके माध्यम से तंबाकू उद्योग अपने उत्पादों को आकर्षक, आधुनिक और सुरक्षित दिखाने की कोशिश करता है।

WHO के अनुसार, कंपनियां रंगीन पैकेजिंग, स्वादयुक्त उत्पादों और डिजिटल प्रचार के माध्यम से युवाओं को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करती हैं कि ये उत्पाद अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

अफ्रीका क्यों बन रहा है तंबाकू उद्योग का सबसे बड़ा लक्ष्य?

WHO अफ्रीका क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार अफ्रीका वर्तमान समय में वैश्विक तंबाकू कंपनियों के लिए सबसे तेजी से उभरता हुआ बाजार बन चुका है।

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण महाद्वीप की युवा आबादी है।

60 प्रतिशत आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की

अफ्रीका की कुल आबादी का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा 25 वर्ष से कम आयु वर्ग में आता है। यही कारण है कि तंबाकू और निकोटीन उत्पाद बनाने वाली कंपनियां युवाओं को अपने भविष्य के उपभोक्ता के रूप में देख रही हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जहां विकसित देशों में धूम्रपान के खिलाफ जागरूकता बढ़ रही है और उपयोगकर्ता घट रहे हैं, वहीं कंपनियां नए बाजारों की तलाश में अफ्रीका जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

कमजोर कानूनों का उठा रही हैं फायदा

कई अफ्रीकी देशों में अभी भी ई-सिगरेट, वेपिंग डिवाइस और निकोटीन पाउच जैसे उत्पादों को लेकर स्पष्ट नियम और नियंत्रण व्यवस्था नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • कई देशों में इन उत्पादों की बिक्री पर पर्याप्त निगरानी नहीं है।
  • नाबालिगों को बिक्री रोकने के नियम कमजोर हैं।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इनके प्रचार को नियंत्रित करने वाले कानून सीमित हैं।

इसी नियामकीय कमी का लाभ उठाकर कंपनियां अपने उत्पादों का विस्तार कर रही हैं।

बच्चों और किशोरों को लुभाने के लिए अपनाए जा रहे नए हथकंडे

WHO ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि तंबाकू उद्योग लगातार नए तरीके अपनाकर युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।

1. हजारों फ्लेवर्स का इस्तेमाल

आज बाजार में उपलब्ध ई-सिगरेट और निकोटीन उत्पादों में लगभग 16,000 से अधिक प्रकार के फ्लेवर मौजूद हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • स्ट्रॉबेरी
  • वैनिला
  • बबल गम
  • कैंडी
  • चॉकलेट
  • मिंट

इन स्वादों के कारण बच्चों और किशोरों को यह उत्पाद सामान्य खाद्य वस्तुओं जैसे लगते हैं।

2. गैजेट जैसा आधुनिक डिजाइन

आधुनिक वेपिंग डिवाइस को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे तकनीकी गैजेट या फैशन एक्सेसरी जैसे दिखाई दें।

कई उत्पाद:

  • पेन जैसे दिखते हैं
  • यूएसबी ड्राइव की तरह नजर आते हैं
  • छोटे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का रूप रखते हैं

इस वजह से बच्चों और किशोरों के लिए इन्हें छिपाकर रखना आसान हो जाता है।

3. सोशल मीडिया के जरिए प्रचार

WHO ने विशेष रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हो रहे प्रचार को लेकर चिंता जताई है।

इंस्टाग्राम, टिकटॉक और अन्य डिजिटल मंचों पर कई प्रभावशाली व्यक्तियों (इन्फ्लुएंसर्स) के माध्यम से इन उत्पादों को:

  • फैशनेबल
  • आधुनिक
  • कूल
  • ट्रेंडिंग

बताकर प्रचारित किया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह रणनीति किशोरों पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालती है।

निकोटीन बच्चों के मस्तिष्क के लिए क्यों है खतरनाक?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरावस्था में निकोटीन का सेवन दिमागी विकास पर गंभीर असर डाल सकता है।

किशोरावस्था वह समय होता है जब मस्तिष्क तेजी से विकसित हो रहा होता है। इस दौरान निकोटीन का प्रभाव तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।

संभावित दुष्प्रभाव:
  • एकाग्रता में कमी
  • याददाश्त कमजोर होना
  • सीखने की क्षमता प्रभावित होना
  • व्यवहार संबंधी समस्याएं
  • निर्णय लेने की क्षमता पर असर

WHO के अनुसार निकोटीन एक अत्यधिक लत लगाने वाला पदार्थ है और कम उम्र में इसकी आदत भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव

विशेषज्ञों के मुताबिक निकोटीन के लगातार उपयोग से युवाओं में निम्नलिखित समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है:

मानसिक प्रभाव
  • चिंता (Anxiety)
  • तनाव
  • अवसाद (Depression)
  • व्यवहारिक अस्थिरता
शारीरिक प्रभाव
  • हृदय रोगों का खतरा
  • फेफड़ों की समस्याएं
  • श्वसन संबंधी बीमारियां
  • निकोटीन पर निर्भरता

यही कारण है कि स्वास्थ्य संगठन इसे केवल धूम्रपान की समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट मान रहे हैं।

WHO ने सरकारों को दिए सख्त सुझाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अफ्रीकी देशों की सरकारों और नीति निर्माताओं से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

WHO की प्रमुख सिफारिशें:
फ्लेवर वाले उत्पादों पर प्रतिबंध

निकोटीन और तंबाकू उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले सभी प्रकार के स्वादों और स्वीटनर्स पर रोक लगाने की सिफारिश की गई है।

डिजिटल विज्ञापनों पर पूर्ण नियंत्रण

सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर होने वाले विज्ञापन, प्रायोजन और प्रचार गतिविधियों को प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।

उच्च कर व्यवस्था

इन उत्पादों पर कर बढ़ाकर उन्हें युवाओं की पहुंच से दूर रखने की सलाह दी गई है।

कड़े लाइसेंसिंग नियम

खुदरा विक्रेताओं के लिए सख्त लाइसेंस प्रणाली लागू करने और नाबालिगों को बिक्री करने वालों पर भारी जुर्माना तथा कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

नई पीढ़ी को बचाने की जरूरत

WHO का कहना है कि यदि अभी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में निकोटीन की लत सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों और युवाओं को तंबाकू उद्योग की मार्केटिंग रणनीतियों से बचाने के लिए सरकार, स्कूल, अभिभावक और नागरिक समाज को मिलकर काम करना होगा।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर WHO का संदेश स्पष्ट है कि तंबाकू और निकोटीन उद्योग नई पीढ़ी को लक्ष्य बनाकर अपने बाजार का विस्तार कर रहा है। आकर्षक फ्लेवर्स, आधुनिक डिजाइन और सोशल मीडिया प्रचार के जरिए युवाओं को निकोटीन की लत की ओर धकेला जा रहा है।

यदि समय रहते कड़े कानून, प्रभावी निगरानी और जनजागरूकता अभियान नहीं चलाए गए, तो अफ्रीका सहित दुनिया के कई हिस्सों को भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।

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