
जमशेदपुर: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और अब भाजपा के बड़े नेता चम्पाई Soren कल पश्चिम बंगाल के लिए रवाना होने वाले हैं। अगले कुछ दिनों तक वे पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम, पुरुलिया और जंगलमहल क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में सक्रिय रूप से प्रचार करेंगे।

चम्पाई Soren को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इन चुनावों में खास जिम्मेदारी दी है – बंगाल के सीमावर्ती इलाकों के वोटरों को भाजपा के पक्ष में झुकाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।
Soren दिल्ली जाते हुए अमित शाह का आदेश
जानकारी के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह जब अपने दिल्ली जाने के दौरान रांची एयरपोर्ट पहुंचे, तब उन्होंने चम्पाई सोरेन से कहा कि वे यथाशीघ्र पश्चिम बंगाल के चुनाव अभियान में शामिल हों। इसका मतलब है कि मिशन बंगाल के लिए एक खास और तात्कालिक रणनीति बनाई जा रही है, जिसमें झारखंड के अनुभवी नेता अपनी भूमिका निभाएंगे।
अमित शाह समेत कई वरिष्ठ नेता इस समय बंगाल में कैंप किए हुए हैं, जिससे यह साफ है कि भाजपा पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों को बहुत गंभीरता से ले रही है और सत्ता की दहलीज पर खड़े होने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।

झाड़ग्राम, पुरुलिया और जंगलमहल की राजनीतिक जमीन
चम्पाई Soren को यह जिम्मेदारी इसलिए दी गई है क्योंकि झारखंड आंदोलन के समय से ही वे पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों, खासकर झाड़ग्राम, पुरुलिया और जंगलमहल क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर काफी अच्छी पकड़ रखते हैं।
इस क्षेत्र में आदिवासी और उपेक्षित वर्गों की राजनीतिक जमीन बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। भाजपा को उम्मीद है कि चम्पाई सोरेन और अन्य झारखंडी नेता इस जनसमूह के दर्द और इतिहास को समझते हैं, इसलिए उनकी सक्रियता से यहां के वोटर भाजपा के पक्ष में झुक सकते हैं।
झारखंड से बंगाल को जोड़ने वाला टाइगर
चम्पाई Soren को आम तौर पर झारखंड में “टाइगर” या जिद्दी लड़ाका नेता माना जाता है। आंदोलनों से लेकर संसदीय राजनीति तक उनका नाम विवादित और जोशीली छवि के साथ जुड़ा है। अब भाजपा उसी छवि को बंगाल के सीमावर्ती, पिछड़े और आदिवासी‑आधारित क्षेत्रों में इस्तेमाल करना चाहती है।
पार्टी के भीतर यह उम्मीद है कि चम्पाई Soren की भाषा, उनका स्टाइल और जमीनी स्तर पर पहुंच, जंगलमहल क्षेत्र के युवाओं और आदिवासियों को भाजपा के प्रति जोड़ने में मदद करेंगे।
Soren भाजपा का बंगाल‑स्पेशल अभियान
इस बार पश्चिम बंगाल में भाजपा सिर्फ नेताओं की रैलियों पर भरोसा नहीं कर रही, बल्कि एक तरह का स्ट्रक्चर्ड अभियान चला रही है। झारखंड से भी कई विधायक और नेताओं को बंगाल के अलग‑अलग जिलों में जनसंपर्क और प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है।
इसी रणनीति के तहत चम्पाई Sorenको जंगलमहल और राढ़ क्षेत्र से जुड़ी सीमावर्ती विधानसभा सीटों पर खास रूप से लगाया गया है, ताकि वहां के मतदाता यह महसूस करें कि उनकी “अपनी जमीन” से जुड़ा नेता उनके पक्ष में खड़ा है।
यह चुनाव क्यों भाजपा के लिए खास है?
पिछले कुछ चुनावों में पश्चिम बंगाल ने जो राजनीतिक रुझान दिखाए, उससे यह साफ है कि यह राज्य अब केवल दो या तीन पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि बहु‑ध्रुवीय राजनीति की तरफ जा रहा है। भाजपा इसी दरार को भुनाना चाहती है, खासकर जंगलमहल और पुरुलिया जैसे इलाकों में।
यही वजह है कि गृह मंत्री अमित शाह से लेकर चम्पाई Soren तक “मिशन बंगाल” के नाम पर जो अभियान चलाया जा रहा है, वह केवल एक‑दो दिन का नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाला रणनीतिक अभियान बनने की तैयारी है।
क्या हो सकता है असर?
चम्पाई Soren जैसे नेता की मास चारिस्मा और जमीन से जुड़ाव से भाजपा को उम्मीद है कि:
- झाड़ग्राम‑पुरुलिया‑जंगलमहल के युवा और आदिवासी वोटर भाजपा के प्रति रुझान बढ़ाएंगे।
- सीमावर्ती विधानसभा सीटों पर जहां ऐतिहासिक रूप से अन्य पार्टियों की जमीन थी, वहां भाजपा को नए इलाके मिल सकें।
- झारखंड‑बंगाल की साझा जनसंस्कृति और इतिहास पर आधारित विज़न से लोगों को एक “संयुक्त असमिता” का एहसास दिलाया जा सके।
मिशन बंगाल पर निकले चम्पाई Soren सिर्फ भाजपा के एक नेता नहीं हैं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत हैं कि भारतीय जनता पार्टी अब झारखंड‑बंगाल सीमा को एक खास राजनीतिक मोर्चा बनाने की कोशिश कर रही है।
अगर चम्पाई Soren जैसे नेता जमीन पर सही तरह से उतरते हैं, तो यह न सिर्फ पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों को बदल सकता है, बल्कि झारखंड की राजनीति पर भी दशकों तक गहरा असर डाल सकता है
ज्ञात हो कि इस बार पश्चिम बंगाल में सत्ता की दहलीज पर खड़ी भाजपा इन चुनावों में जीत के लिए पूरी ताकत लगा रही है। गृह मंत्री अमित शाह समेत कई वरिष्ठ नेता बंगाल में कैंप किए हुए हैं।









