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खुंटपानी के उत्क्रमित प्राथमिक Schoolके मिड डे मील में कीड़ा मिलने से हड़कंप बच्चों ने फेंका खाना

On: May 19, 2026 5:06 PM
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पश्चिम सिंहभूम: जिले के खुंटपानी प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित प्राथमिक School बनामगुटू में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब School में परोसे गए मिड डे मील में कीड़ा मिलने की शिकायत सामने आई। भोजन की खराब गुणवत्ता देखकर बच्चों ने खाना खाने से इनकार कर दिया और कई छात्र-छात्राओं ने भोजन फेंक दिया। इस घटना के बाद विद्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई बच्चे भूखे पेट ही पढ़ाई करने को मजबूर हो गए।

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घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए। मामले ने एक बार फिर स्कूलों में परोसे जा रहे मिड डे मील की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

School पहुंचकर जनप्रतिनिधियों ने की जांच

मामले की सूचना मिलने के बाद प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा एवं जिला परिषद सदस्या यमुना तियू तत्काल School पहुंचे। उन्होंने विद्यालय में मौजूद बच्चों, शिक्षकों और संबंधित कर्मियों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली।

जांच के दौरान बच्चों ने बताया कि मिड डे मील में कई बार खराब गुणवत्ता वाला भोजन दिया जाता है। छात्रों का कहना था कि भोजन में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री कई बार खाने योग्य नहीं होती और इससे बदबू भी आती है।

जनप्रतिनिधियों ने School में उपलब्ध भोजन की गुणवत्ता की जांच की और इस पूरी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।

सेंट्रलाइज्ड किचन से आने वाले भोजन पर उठे सवाल

जांच के दौरान यह बात सामने आई कि School में भोजन सेंट्रलाइज्ड किचन से भेजा जाता है। बच्चों और शिक्षकों ने आरोप लगाया कि कई बार भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब होती है और साफ-सफाई का भी पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मिड डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, लेकिन इस तरह की लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

विद्यालय में मिड डे मील में कीड़ा मिलने की घटना ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। कई अभिभावकों ने प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बच्चों ने बताया- कई बार मिलता है खराब खाना

School के बच्चों ने जांच टीम को बताया कि यह पहली बार नहीं है जब भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत हुई हो। छात्रों के अनुसार कई बार भोजन अधपका, बासी या खराब गुणवत्ता का मिलता है।

कुछ बच्चों ने कहा कि भोजन से दुर्गंध आती है, जबकि कई बार सब्जियों और चावल में गंदगी भी देखने को मिलती है। इस कारण कई छात्र मिड डे मील खाने से बचते हैं।

बच्चों की शिकायतों ने मिड डे मील संचालन व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रखंड प्रमुख ने लगाए गंभीर आरोप

प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा ने आरोप लगाया कि निरीक्षण से पहले संबंधित एजेंसी को सूचना दे दी जाती है। इसके कारण जांच वाले दिन ही बेहतर भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जबकि सामान्य दिनों में बच्चों को घटिया भोजन दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि यदि बिना सूचना के औचक निरीक्षण किया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

प्रखंड प्रमुख ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी एनजीओ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने की भी मांग उठाई गई है।

लाइसेंस रद्द करने की उठी मांग

मामले को गंभीर बताते हुए जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने मांग की कि जिस एनजीओ या एजेंसी द्वारा भोजन की आपूर्ति की जा रही है, उसकी कार्यप्रणाली की पूरी जांच होनी चाहिए। यदि लापरवाही साबित होती है तो उसका लाइसेंस तत्काल रद्द किया जाए।

इसके अलावा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है।

कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

प्रखंड प्रमुख और अन्य जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने चाहिए।

स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से मांग की कि School में मिड डे मील की नियमित जांच की जाए और भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

मिड डे मील योजना का उद्देश्य और वर्तमान स्थिति

मिड डे मील योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है ताकि बच्चों में कुपोषण कम हो और School में उपस्थिति बढ़े।

यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन जब भोजन की गुणवत्ता खराब हो जाती है, तो योजना का उद्देश्य ही प्रभावित होने लगता है।

खुंटपानी की यह घटना बताती है कि मिड डे मील योजना की निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।

School में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को दिया जाने वाला भोजन पूरी तरह स्वच्छ और पौष्टिक होना चाहिए। खराब भोजन बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

School में भोजन तैयार करने और वितरण करने वाली एजेंसियों को साफ-सफाई, गुणवत्ता और पोषण मानकों का सख्ती से पालन करना चाहिए।

यदि समय रहते इस तरह की समस्याओं पर रोक नहीं लगाई गई तो बच्चों में बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

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प्रशासन से अभिभावकों की बड़ी उम्मीद

घटना के बाद अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए विद्यालय भेजते हैं, लेकिन यदि वहां सुरक्षित भोजन भी नहीं मिल पा रहा है तो यह बेहद चिंता की बात है।

लोगों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

खुंटपानी के उत्क्रमित प्राथमिक School बनामगुटू में मिड डे मील में कीड़ा मिलने की घटना ने स्कूलों में बच्चों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों द्वारा भोजन फेंकना और भूखे पेट पढ़ाई करना यह दर्शाता है कि मिड डे मील व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

प्रशासन, शिक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियों को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही नियमित निरीक्षण और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके।

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