
जमशेदपुर । पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड से पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल ने भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग पर एक तीखी, भावपूर्ण और संदेशात्मक कविता प्रस्तुत की है। यह कविता न सिर्फ व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि जनता की जागरूकता और बदलते समय की ताकत को भी दर्शाती है।

कविता में भ्रष्टाचार और सत्ता पर करारा प्रहार
पूरी कविता
“चोरी और सीना जोरी
सब करोगे जबरन।
भ्रष्टाचारी जेल जाओगे
जेल से करोगे शासन।।
यही नीति सिद्धांत है
संविधान का सम्मान।
लूट का छूट मिल जाए
होगी भारत महान।।
नेता हो तू विधाता नहीं
समझ लो पहचान।
अपनी गुनाहों की कर्ज
करना होगा भुगतान।।
देख रही जनता सबकुछ
बखूबी समझ रही है।
संसद की जो शोरगोल
क्या गलत क्या सही है।।
ये वक्त बहत बलवान है
तेरी रिमोट से बाहर है।
सत्ता कया उसके अधीन
ये सारी संसार है।।
सियासत है दांव पेंच का
कब तक अजमाओगे।
निश्चित ऊंचे ऊंट एक दिन
पहाड़ के नीचे आओगे।।”
- करुणा मय मंडल, पूर्व जिला पार्षद पोटका, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड
कविता का संदेश – सत्ता से जनता का सीधा संवाद
इस कविता में कवि ने भ्रष्टाचार, सत्ता की हठधर्मिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण पर गहरी चोट की है।
- कवि कहते हैं कि आज की राजनीति में चोरी और जबरन वसूली आम हो गई है।
- भ्रष्ट नेता जेल भी जाते हैं और वहीं से सत्ता पर नियंत्रण करने की कोशिश करते हैं।
- संविधान की दुहाई देने वाले ही लूट और छूट के सहारे भारत महान बनाने का दावा करते हैं, यह व्यवस्था की विडंबना है।
- कवि चेतावनी देते हैं कि सत्ता में बैठे नेता खुद को भगवान न समझें।
- जनता सब कुछ देख रही है और सही-गलत का फैसला करना जानती है।
- समय बहुत बलवान है, किसी के “रिमोट कंट्रोल” में नहीं है।
- राजनीति दांव-पेंच का खेल है, लेकिन अंततः सत्ता के ऊँट को पहाड़ के नीचे आना ही पड़ेगा।
जनता का मनोभाव
यह कविता जनता के भीतर गहराते असंतोष और लोकतांत्रिक चेतना का प्रतिबिंब है।
कवि करुणा मय मंडल ने अपनी रचना के माध्यम से यह संदेश दिया है कि –
- सत्ता अस्थायी है, जनता स्थायी है।
- भ्रष्टाचार और अन्याय ज्यादा दिन टिक नहीं सकता।
- लोकतंत्र में अंतिम ताकत जनता के पास है।









































