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कविता में माँ के करुणामय, संकटहारी और मंगलकारी रूप का भावपूर्ण वर्णन मिलता है- करुणामय मंडल

On: September 27, 2025 10:32 PM
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भक्ति कविता: यह भक्ति कविता श्री करुणामय मंडल, पूर्व जिला पार्षद, पोटका (पूर्वी सिंहभूम, झारखंड) द्वारा रची गई है। कवि करुणामय मंडल ने अपनी इस रचना में माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री, द्वितीये मां ब्रह्मचारिणी, मां कुष्मांडा, देवी कात्यायनी का स्तवन किया है। यह कविता नवरात्रि के शुभारंभ पर लिखी गई, जिसमें माँ के करुणामय, संकटहारी और मंगलकारी रूप का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।

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“नव रात्रा शुभारंभे
नमामी मां शैलपुत्री।
जगत माते जगदम्बे
जगदेश्वरी जगधात्री।।
वृषभ वाहन माते
त्रिशूल पद्म धारिनी।
सर्वाग्रे पुजिता देवी
नव दुर्गा स्वरूपिणी।।
अशुभ अरिष्ठ नाशिनी
दयामयी दाक्षायणी।
नमामी संकट हारिनी
सर्व मंगल कारिणी।।”

———————–

“द्वितीये मां ब्रह्मचारिणी
शुभ्र वस्त्र धारिणी।
हस्ते माला कमंडल धृत
देवी ज्ञानी तपस्विनी।।
नमामी दुर्गे दुर्गति नाशिनी
मां सद्बुद्धि दायिनी।
आदि व्याधि कष्ट हारिनी
सर्व कल्याण कारिनी।।
जय जय शिव सिमंतिनी
जय मां शैल नंदिनी।
जय जय जगत पालिनी
जय जय व्रम्हचारिनी।।”

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“नमामी मां कुष्मांडा रूपिनी
चतुर्थ दुर्गा स्वरूपनी।
मां अष्ट भुजा अरिष्ट नाशिनी
दयामयी दुःख निवारिणी।
कमल-कमंडल-जपमाला
जननी जोगेश्वरी योगिनी।
देवी धनुष-बाण-गदा-चक्र
अमृत कलश धारिनी।।
शेरावाली शार्दुल बाहिनी
नमामी दुर्गे जगज्जननी।
कुष्मांडा मां कंटक हारिनी
जय जय जय जनार्दनी।।”

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“नव दुर्गा षष्ठ रूपिणी
नमामी देवी कात्यायनी।
मां चतुर्भुजे स्वर्ण वरनी
नमामी महिषासुरमर्दिनी।।
दहिने वरद हस्ता देवी
वामे पद्म खड़्ग धारिणी।
असुर अशुभ नाशिनी
शंकरी संकट तारिणी।।
जगत मयी जगत जयी
जय जय जगततारिणी।
जय दुर्गा षष्ठ रूपिणी
जय जय मां कात्यायनी।।”

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🌺 माँ दुर्गा के नौ स्वरूप

नवरात्रि में पूजित माँ दुर्गा के नौ रूप इस प्रकार हैं—

  1. माँ शैलपुत्री – वृषभवाहिनी, त्रिशूल और कमलधारिणी।
  2. माँ ब्रह्मचारिणी – तपस्या और संयम की मूर्ति।
  3. माँ चंद्रघंटा – अद्भुत शक्ति और वीरता की देवी।
  4. माँ कूष्मांडा – सृष्टि की उत्पत्ति करने वाली आदिशक्ति।
  5. माँ स्कंदमाता – पुत्रकारक और वात्सल्यमयी।
  6. माँ कात्यायनी – साहस और विजय की देवी।
  7. माँ कालरात्रि – रौद्र रूप, असुरों का संहार करने वाली।
  8. माँ महागौरी – पवित्रता, शांति और सौम्यता का प्रतीक।
  9. माँ सिद्धिदात्री – सिद्धियाँ और वरदान प्रदान करने वाली।

भक्ति वाक्य

  • “हे माँ शैलपुत्री, आप नवदुर्गा के प्रथम स्वरूप हैं, आपके चरणों में शरण लेकर भक्त अपने जीवन में स्थिरता और शांति पाते हैं।”
  • “माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से तप, संयम और धैर्य की प्राप्ति होती है, जो जीवन को नई दिशा देता है।”
  • “माँ चंद्रघंटा के आशीर्वाद से भय का नाश होता है और साहस का संचार होता है।”
  • “माँ कूष्मांडा के प्रकाश से अज्ञान दूर होता है और जीवन में ऊर्जा का संचार होता है।”
  • “माँ कालरात्रि की उपासना से शत्रुओं का नाश होता है और साधक निडर बनता है।”
  • “माँ सिद्धिदात्री भक्तों को अद्भुत सिद्धियाँ और इच्छित फल प्रदान करती हैं।”

कवि करुणामय मंडल ने अपनी इस काव्य-रचना के माध्यम से यही संदेश दिया है कि नवरात्रि केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह भक्ति, शक्ति और आत्मबल का उत्सव है। माँ दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप की आराधना से जीवन में साहस, करुणा, शांति और मंगल का मार्ग प्रशस्त होता है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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