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विकसित भारत@2047 की राह खेतों और किसानों से होकर गुजरती है: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

On: June 13, 2026 9:56 PM
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परंपरा और प्रौद्योगिकी के समन्वय से भारत बनेगा वैश्विक कृषि नेतृत्वकर्ता, सतत कृषि को बताया विकसित भारत की आधारशिला

नई दिल्ली, 13 जून 2026। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना तभी साकार होगा, जब देश का कृषि क्षेत्र मजबूत, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की विकास यात्रा उसके खेतों, किसानों और गांवों से होकर गुजरती है तथा सतत कृषि, नवाचार और अनुसंधान ही विकसित भारत के निर्माण की सुदृढ़ आधारशिला हैं।

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श्री बिरला शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “विकसित भारत@2047 के लिए सतत कृषि: परंपरा, प्रौद्योगिकी और ठोस परिणाम” के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का आयोजन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है।

कृषि केवल व्यवसाय नहीं, भारत की संस्कृति का आधार

अपने संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत में कृषि केवल आजीविका या आर्थिक गतिविधि का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की संस्कृति, परंपरा, सभ्यता और जीवन-दर्शन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की जड़ें कृषि में निहित हैं और किसानों का योगदान केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे देश की सामाजिक और आर्थिक संरचना को भी मजबूती प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने तथा समावेशी विकास की गति तेज करने में कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत के गांवों को देश की असली ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत के विकास के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है।

जलवायु परिवर्तन के दौर में नई कृषि सोच की जरूरत

ओम बिरला ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में कृषि क्षेत्र को भी नई चुनौतियों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ विज्ञान आधारित, अनुसंधान संचालित और नवाचार केंद्रित कृषि मॉडल को अपनाना समय की मांग बन गया है। किसानों को ऐसी तकनीकों से जोड़ना होगा जो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग को भी सुनिश्चित करें।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का समन्वय ही भविष्य की टिकाऊ कृषि व्यवस्था का आधार बनेगा।

ड्रोन, AI और डिजिटल खेती बदल रहे कृषि की तस्वीर

कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और डिजिटल फार्मिंग जैसी आधुनिक तकनीकें खेती को नई दिशा दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के उपयोग से किसान फसलों की निगरानी, रोग नियंत्रण, सिंचाई प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने जैसे कार्य अधिक सटीकता और दक्षता के साथ कर पा रहे हैं।

उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश का कृषि भविष्य इनके नवाचारों और अनुसंधान पर निर्भर करता है। यदि वैज्ञानिक शोध सीधे किसानों तक पहुंचे तो कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है।

कृषि आधारित उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

ओम बिरला ने कहा कि केवल खेती तक सीमित रहकर किसानों की आय को दोगुना नहीं किया जा सकता। इसके लिए कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और कृषि स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, युवाओं को गांवों में ही काम मिलेगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि कृषि उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देकर भारत वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य पर दिया जोर

पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने जल संरक्षण को कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों, ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीकों के व्यापक उपयोग से जल संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है।

उन्होंने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों के विकास की आवश्यकता पर भी बल दिया।

श्री बिरला ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और देश के वैज्ञानिक समुदाय द्वारा इस दिशा में किए जा रहे कार्य सराहनीय हैं, जो भविष्य की कृषि को अधिक टिकाऊ और उत्पादक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

युवाओं और महिलाओं की भूमिका होगी निर्णायक

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत की कृषि क्रांति का अगला चरण युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही संभव होगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं की ऊर्जा, महिलाओं का नेतृत्व और जमीनी स्तर पर विकसित हो रहे नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देंगे। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा कृषि स्टार्टअप्स, एग्रीटेक कंपनियों और नवाचार आधारित खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो सकारात्मक संकेत है।

आत्मनिर्भर कृषि मॉडल विकसित करने का आह्वान

अपने संबोधन के दौरान श्री बिरला ने शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और किसानों से मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों को मिलकर ऐसे कृषि मॉडल विकसित करने होंगे जो आत्मनिर्भर, टिकाऊ और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने वाले हों।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब कृषि क्षेत्र मजबूत होगा और किसानों को तकनीक, बाजार तथा वित्तीय संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

विकसित भारत@2047 की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह आयोजन देश की सामूहिक बौद्धिक क्षमता और रचनात्मक चिंतन का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी दो दिनों में होने वाले विचार-विमर्श से कृषि शिक्षा, अनुसंधान और सतत कृषि पद्धतियों को नई दिशा मिलेगी।

उन्होंने आशा जताई कि सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव और निष्कर्ष न केवल किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संदेश स्पष्ट है कि भारत की आर्थिक प्रगति और विकसित राष्ट्र बनने का सपना कृषि क्षेत्र की मजबूती पर निर्भर करता है। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, जल संरक्षण, कृषि नवाचार और किसानों की समृद्धि को केंद्र में रखकर ही भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। कृषि को विकास की धुरी बनाकर भारत न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि वैश्विक कृषि नेतृत्वकर्ता के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करेगा।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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