
जमशेदपुर, 4 सितंबर 2025। मुहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलते हुए अखिल भारतीय आदर्श शिक्षक संघ और MSITI मानगो के संयुक्त तत्वावधान में आज शिक्षक पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों को समाज के मार्गदर्शक और राष्ट्र के निर्माणकर्ता के रूप में सम्मानित किया गया।

शिक्षक का दर्जा माता-पिता के बाद सर्वोच्च
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मुहम्मद साहब ने स्वयं को शिक्षक के रूप में अल्लाह का प्रतिनिधि बताया था, और इस पर बल दिया कि शिक्षक का कार्य भी एक नबी के कार्य की तरह पवित्र और जिम्मेदारीपूर्ण है।
उन्होंने कहा—
- माता-पिता के बाद समाज में सबसे बड़ा दर्जा शिक्षक का होता है।
- एक अच्छा शिक्षक ही बच्चों को जीवन जीने का तरीका और मूल्यों का पाठ पढ़ाता है।
- विज्ञान भी इस बात को सिद्ध करता है कि जीवन में सही मार्गदर्शन के लिए शिक्षक का होना अनिवार्य है।

पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक
समारोह में निम्नलिखित शिक्षकों और गणमान्य व्यक्तियों को विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए:
- आमिर फिरदौसी
- नदीम अख्तर
- परसंता पॉल
- अब्दुल रहीम
- मुहम्मद सलाहुद्दीन
- प्रमानंद पांडे
- विशेष पुरस्कार – ब्यूरो प्रमुख श्री शाकिर अजीमाबादी
इन सभी को अखिल भारतीय आदर्श शिक्षक संघ झारखंड के अध्यक्ष डॉ. सरफराज आलम तथा संगठन के पदाधिकारियों स्केल अंजुम, मोईज अख्तर और नकीब अहमद के हाथों पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके लिए विशेष रूप से रांची से पुरस्कार मंगाए गए थे।
डॉ. सरफराज आलम का संदेश
अपने संबोधन में डॉ. आलम ने कहा कि शिक्षकों को चाहिए कि वे अपने—
- शैक्षणिक, बौद्धिक, तकनीकी, नैतिक और सामाजिक कौशल
को बढ़ावा दें और एक नेक समाज के निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएँ।
उपस्थित गणमान्य लोग
समारोह में प्रोफेसर जावेद अख्तर अंसारी, खुर्शीद अहमद, रजिया शाहीन, नौशाद आलम और मुहम्मद याह्या सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
यह आयोजन शिक्षकों की समाज निर्माण में अनिवार्य भूमिका की पुनः पुष्टि करता है और यह संदेश देता है कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षक ही सबसे मजबूत स्तंभ हैं।












































