- केंद्र सरकार ने बढ़ाए संरक्षण और विपणन के प्रयास
नई दिल्ली, 7 अगस्त । केंद्र सरकार ने कहा है कि लद्दाख में उच्च हिमालयी औषधीय पौधों की खेती और उनके व्यावसायिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। सरकार सी-बकथॉर्न (Seabuckthorn), रोडियोला (Rhodiola), आर्टेमिसिया (Artemisia) और एकोनाइटम (Aconitum) जैसे बहुमूल्य औषधीय पौधों के संरक्षण, वैज्ञानिक खेती और विपणन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही है।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने शुक्रवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) पूरे देश में “औषधीय पौधों का संरक्षण, विकास एवं सतत प्रबंधन” केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू कर रहा है। इसके तहत परियोजना आधारित वित्तीय सहायता देकर औषधीय पौधों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है।
किसानों को मिल रही आधुनिक सुविधाएं
सरकार के अनुसार योजना के तहत किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए नर्सरी और अन्य आधारभूत ढांचे का विकास किया जा रहा है। साथ ही सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके अलावा फसल कटाई के बाद प्रसंस्करण (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट), मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता परीक्षण, प्रमाणन तथा विपणन के लिए भी आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और नुकसान कम करने में मदद मिले।
‘e-CHARAK‘ ऐप से बाजार की जानकारी
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड ने औषधीय पौधों के विपणन को आसान बनाने के लिए ‘ई-चरक (e-CHARAK)’ मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और लद्दाख सहित देश के 25 हर्बल बाजारों में 100 औषधीय पौधों के पाक्षिक बाजार भाव की जानकारी उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से किसानों और संग्राहकों को सीधे खरीदारों से जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है। प्रमुख कंपनियों की खरीद संबंधी आवश्यकताओं और संपर्क विवरण राज्य एजेंसियों एवं क्षेत्रीय केंद्रों के साथ साझा किए जाते हैं।
लद्दाख में क्षमता निर्माण पर विशेष जोर
लद्दाख के राज्य औषधीय पादप बोर्ड (SMPB) द्वारा क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु और जैव विविधता को देखते हुए औषधीय पौधों के संरक्षण और व्यावसायिक विकास पर विशेष कार्य किया जा रहा है। बोर्ड समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां तथा खरीदार-विक्रेता सम्मेलन आयोजित करता है, ताकि किसानों को वैज्ञानिक खेती, संरक्षण, मूल्य संवर्धन और विपणन की आधुनिक जानकारी मिल सके। इसके साथ ही अनुसंधान संस्थानों और संबंधित विभागों के सहयोग से संरक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत 705 लाख रुपये से अधिक की सहायता
आयुष मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के तहत लद्दाख में पिछले पांच वर्षों के दौरान विभिन्न परियोजनाओं के लिए 705.11 लाख रुपये जारी किए गए हैं, जिनमें से 534.24 लाख रुपये का उपयोग किया जा चुका है। इस मिशन के अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं जिला अस्पतालों में आयुष सुविधाओं का विस्तार, आयुष अस्पतालों एवं औषधालयों का उन्नयन, नए एकीकृत आयुष अस्पतालों का निर्माण, आवश्यक दवाओं की आपूर्ति तथा आयुष शिक्षा संस्थानों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
अनुसंधान और संरक्षण परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड ने पिछले पांच वर्षों में लद्दाख में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियां, हर्बल गार्डन की स्थापना, ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में औषधीय पौधों के संरक्षण, जर्मप्लाज्म संग्रह, रोडियोला पर अनुसंधान तथा राज्य औषधीय पादप बोर्ड को न्यूक्लियस केंद्र रखरखाव अनुदान जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
निमू में बना सी-बकथॉर्न उत्कृष्टता केंद्र
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत लद्दाख के निमू (लेह) में सी-बकथॉर्न उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित किया गया है। इस परियोजना के लिए 789.33 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। यह केंद्र लद्दाख के बागवानी विभाग द्वारा डीआरडीओ (DRDO) के डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च (DIHAR) के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है।
इस उत्कृष्टता केंद्र में वैज्ञानिक बाग, मॉडल नर्सरी, प्रशिक्षण केंद्र, प्राथमिक प्रसंस्करण इकाई तथा किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), स्वयं सहायता समूहों (SHGs), महिलाओं और उद्यमियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री का उत्पादन, वैज्ञानिक खेती का प्रदर्शन और सी-बकथॉर्न की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
औषधीय पौधों से रोजगार और आय बढ़ाने की दिशा में पहल
सरकार का मानना है कि लद्दाख की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियां उच्च हिमालयी औषधीय पौधों की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक प्रसंस्करण, बेहतर विपणन व्यवस्था और किसानों के प्रशिक्षण के माध्यम से इस क्षेत्र को औषधीय पौधों के उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया जा सकता है। इससे स्थानीय किसानों, महिला समूहों और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
पिछले पांच वर्षों के दौरान आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) द्वारा “औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास एवं सतत प्रबंधन” केंद्रीय क्षेत्र योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं की सूची।
| क्रम संख्या | वर्ष | प्रोजेक्ट का नाम | संगठन | स्वीकृत राशि (लाख में) | जारी की गई राशि (लाखों में) | इस्तेमाल की गई रकम (लाखों में) |
| 1. | 2022-23 | लद्दाख के औषधीय पौधों और वनस्पतियों की पहचान और संरक्षण पर राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन | बायोडायवर्सिटी रिसर्च सेंटर, कारगिल कैंपस, यूनिवर्सिटी ऑफ़ लद्दाख | 5.00 | 5.00 | 0.00 |
| 2. | 2022-23 | हिमालयी औषधीय पौधों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: वर्तमान और भविष्य की संभावनाएं | बॉटनी डिपार्टमेंट एलिज़र जोल्डन मेमोरियल कॉलेज | 5.00 | 5.00 | 5.00 |
| 3. | 2024-25 | CIBS, चोगलामसर, लेह, लद्दाख के कैंपस में हर्बल गार्डन की स्थापना | Central Institute of Buddhist Studies, (Deemed to be University) Choglamsar, Leh Ladakh-194101 | 1.35 | 0.75 | – |
| 4. | 2024-25 | लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानों में प्राथमिकता वाले औषधीय पौधों के संरक्षण की स्थिति, जर्मप्लाज्म संग्रह और संसाधन वृद्धि | वैज्ञानिक प्रभारी राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान सोवा-रिग्पा (एनआरआईएसआर) लेह लद्दाख | 13.48 | 13.48 | 13.46 |
| 5. | 2024-25 | औषधीय पौधों के संरक्षण और प्रबंधन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: ट्रांस-हिमालयी परिप्रेक्ष्य | उच्च पर्वतीय शुष्क कृषि अनुसंधान संस्थान, SKUAST-K. स्टकना, लेह लद्दाख | 5.00 | 5.00 | 0.00 |
| 6. | 2025-26 | लेह लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान से रोडियोला इम्ब्रिकेटा एज्यू में अलग-अलग तरीकों से सैलिड्रोसाइड कंटेंट को बढ़ाना: फील्ड में और इन विट्रो तरीके। | सह-संगठन संस्थान सोवा रिग्पा, लेह-लद्दाख | 9.92 | – | – |
| 7. | 2023-24 to 2025-26 | न्यूक्लियस केंद्र रखरखाव अनुदान | एसएमपीबी यूटी लद्दाख | 81.00 | 81.00 | 74.52 |

















